मुंबई, दिव्यराष्ट्र:/ नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, मुंबई में महज तीन महीने 20 दिन की बच्ची जानकी की दुर्लभ जन्मजात छाती की विकृति पार्शियल कंजेनिटल स्टर्नल क्लेफ्ट की सफल सर्जरी की गई। इस विकृति में छाती की हड्डी (स्टर्नम) के दोनों हिस्से पूरी तरह जुड़ नहीं पाते, जिससे हृदय और प्रमुख रक्त वाहिकाओं को प्राकृतिक सुरक्षा मिळत नाही.
जन्म के बाद जानकी की छाती के बीचों-बीच स्टर्नम के दोनों हिस्सों के बीच करीब पांच सेंटीमीटर का अंतर पाया गया था। उसकी त्वचा के नीचे हृदय की धड़कन भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। हालांकि बच्ची सक्रिय थी और सामान्य रूप से दूध पी रही थी, लेकिन उसे समय-समय पर सांस लेते समय आवाज आने और सांस फूलने की समस्या होती थी। ऐसी स्थिति में मामूली चोट भी हृदय के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी।
अस्पताल में विस्तृत जांच और सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी के जरिए बच्ची की छाती और हृदय की संरचना का आकलन किया गया। इसके आधार पर विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने सर्जरी की योजना तैयार की। नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, मुंबई वरिष्ठ सलाहकार पीडियाट्रिक सर्जरी डॉ. रसिकलाल शाह, वरिष्ठ सलाहकार पीडियाट्रिक कार्डियोथोरेसिक एवं कंजेनिटल हार्ट सर्जरी डॉ. प्रदीप कुमार कौशिक, वरिष्ठ सलाहकार पीडियाट्रिक कार्डियक एनेस्थीसियोलॉजी डॉ. नंदिनी दवे तथा रेडियोलॉजी और पीडियाट्रिक कार्डियक इंटेंसिव केयर टीम ने मिलकर उपचार किया।
सर्जरी के दौरान पेक्टोरालिस मेजर मांसपेशियों, ऊपरी पसलियों और क्लैविकल की संरचना को सावधानीपूर्वक व्यवस्थित कर छाती का पुनर्निर्माण किया गया। इसके बाद स्टर्नम को स्टील वायर की सहायता से जोड़ा गया, जिससे हृदय को आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जा सके। संभावित आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन के दौरान कार्डियोपल्मोनरी बायपास मशीन भी स्टैंडबाय पर रखी गई थी।
सर्जरी के बाद जानकी को चार दिनों तक पीडियाट्रिक कार्डियक इंटेंसिव केयर यूनिट में निगरानी में रखा गया। उसकी रिकवरी अच्छी रही और किसी बड़ी जटिलता के बिना ऑपरेशन के आठ दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फॉलो-अप जांच में भी उसकी छाती सामान्य रूप से ठीक होती पाई गई।
डॉ. रसिकलाल शाह और डॉ. प्रदीप कुमार कौशिक ने बताया कि पार्शियल स्टर्नल क्लेफ्ट बेहद दुर्लभ जन्मजात विकृति है और ऐसे मामलों में समय पर पहचान, सटीक सर्जिकल प्लानिंग तथा विभिन्न विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है। आधुनिक पुनर्निर्माण तकनीकों और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम के प्रयास से जानकी को अब सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की उम्मीद मिली है।






