
पुरस्कार विजेता लेखकों, प्रतिष्ठित इतिहासकारों, अग्रणी वैज्ञानिकों, सांस्कृतिक विचारकों और सार्वजनिक जीवन की प्रभावशाली हस्तियों सहित विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी शख्सियतें फेस्टिवल के इस विशेष संस्करण में शामिल होंगी
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र/ साहित्यिक खोज और सांस्कृतिक संवाद के दो दशक पूरे करने जा रहे वेदांता प्रस्तुत जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने अपने 20वें संस्करण के लिए वक्ताओं की दूसरी सूची जारी की है। फेस्टिवल का आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में किया जाएगा। इस सूची में विभिन्न विषयों, भौगोलिक क्षेत्रों और पीढ़ियों के बीच विमर्श को आकार देने वाले लेखक, इतिहासकार, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, पत्रकार, कलाकार और सार्वजनिक जीवन की प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।
पिछले दो दशकों में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल विचारों और कहानियों के आदान-प्रदान के एक वैश्विक मंच के रूप में उभरा है। इसने भारत और दुनिया भर के दर्शकों को प्रतिष्ठित लेखकों और उभरते विचारों से रूबरू होने का अवसर दिया है। वक्ताओं की दूसरी सूची में कथा साहित्य और कविता से लेकर साम्राज्यों और सभ्यताओं के इतिहास, पहचान और वैज्ञानिक खोजों, अंतरराष्ट्रीय मामलों, स्वास्थ्य एवं कल्याण, खानपान और कला जैसे विविध विषयों से जुड़ी हस्तियां शामिल हैं।
इस सूची में फलस्तीनी लेखिका अदानिया शिबली शामिल हैं, जिनके उपन्यास माइनर डिटेल को नेशनल बुक अवॉर्ड और इंटरनेशनल बुकर प्राइज के लिए नामांकित किया गया था। उनके साथ मानव विकास और पुरातत्व पर अपने काम के लिए जानी जाने वाली जैविक मानवविज्ञानी, लेखिका और प्रसारक एलिस रॉबर्ट्स तथा भारतीय बौद्धिक इतिहास और राजनीतिक चिंतन पर शोध करने वाली अनन्या वाजपेयी भी फेस्टिवल में शामिल होंगी। वक्ताओं की सूची में पुलित्जर पुरस्कार विजेता जीवनीकार और लेखक बेंजामिन मोजर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और पुलित्जर पुरस्कार विजेता इतिहासकार कैरोलीन एल्किंस, जिनका शोध ब्रिटिश ‘उदार साम्राज्यवाद’ की अवधारणा को चुनौती देता है, तथा पहचान, रिश्तों और समकालीन जीवन पर लेखन के लिए चर्चित उपन्यासकार क्लेयर मेसुड भी शामिल हैं।
फेस्टिवल में प्राचीन भूमध्यसागरीय क्षेत्र और निकट पूर्व के इतिहास पर शोध करने वाले पुरातत्वविद एवं इतिहासकार एरिक क्लाइन, संघर्ष समाधान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में काम करने वाली गैब्रिएल रिफकिंड तथा आदिवासी पहचान को अपने कथा साहित्य का विषय बनाने वाले लेखक हंसदा सोवेंद्र शेखर भी शामिल होंगे। मराठी नाटककार, उपन्यासकार और रंगमंच निर्देशक मकरंद साठे, शास्त्रीय साहित्य पर अकादमिक कार्य करने वाली मीरा सियो तथा पहचान, परिवार और अपनेपन जैसे विषयों पर लेखन करने वाली कवयित्री एवं उपन्यासकार मोना अर्शी भी वक्ताओं की सूची में हैं। प्रतिष्ठित कला इतिहासकार और ब्रिटिश म्यूजियम के पूर्व निदेशक नील मैकग्रेगर कला एवं सांस्कृतिक इतिहास पर अपने विचार साझा करेंगे। वहीं, प्रसिद्ध मलयालम लेखक और निबंधकार पॉल जकारिया भी फेस्टिवल में शामिल होंगे। उनके लेखन में सामाजिक टिप्पणी, व्यंग्य और दार्शनिक पड़ताल के साथ कथा साहित्य का मेल देखने को मिलता है।
नई सूची में शेफ और रेस्तरां व्यवसायी रितु डालमिया भी शामिल हैं, जो लोकप्रिय इटैलियन रेस्तरां दिवा की सह-मालकिन हैं। व्यक्तिगत विकास पर अपने काम के लिए जानी जाने वाली लेखिका और सेल्फ-डेवलपमेंट कोच रॉक्सी नफूसी तथा स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय कार्डियोवस्कुलर सर्जन श्रीराम नेने भी फेस्टिवल का हिस्सा होंगे। नोबेल पुरस्कार विजेता आनुवंशिकीविद और कोशिका जीवविज्ञानी सर पॉल नर्स विज्ञान के क्षेत्र में अपने अग्रणी विचार प्रस्तुत करेंगे। वहीं, कास्ट मैटर्स के लेखक सूरज येंगडे जाति, नस्ल और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर विचार रखेंगे।
पूंजीवाद और वैश्विक आर्थिक इतिहास पर अपने शोध के लिए जाने जाने वाले हार्वर्ड विश्वविद्यालय के इतिहासकार स्वेन बेकर्ट भी वक्ताओं की सूची में शामिल हैं। इनके साथ प्रवासन, पहचान और सांस्कृतिक मेलजोल जैसे विषयों पर लेखन करने वाले उपन्यासकार, कवि और आलोचक ताबिश खैर तथा लेखिका एवं भाषाविद थांगजाम हिंदुस्तानी देवी भी फेस्टिवल में शामिल होंगी।
इसके अलावा, व्यापार, परोपकार और सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में अपने कार्यों के लिए जानी जाने वाली अक्षता मूर्ति, प्रतिष्ठित पत्रकार, प्रसारक और लेखिका मिशाल हुसैन तथा एशियाई कला, संग्रहालयों और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में काम करने वाली कला इतिहासकार विशाखा एन. देसाई भी वक्ताओं की दूसरी सूची में शामिल हैं।
टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजॉय के. रॉय ने कहा,”जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20वें संस्करण की ओर बढ़ते हुए हम उन विविध आवाजों, विचारों और दृष्टिकोणों पर विचार कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों में इस फेस्टिवल को आकार दिया है। साहित्य और इतिहास से लेकर विज्ञान, दर्शन, भू-राजनीति और कला तक, इन सभी विषयों ने जिज्ञासा और नई खोज की उस भावना को अभिव्यक्त किया है, जो जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के केंद्र में है। आज जब दुनिया को सार्थक संवाद के मंचों की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है, हम विभिन्न विषयों, संस्कृतियों और महाद्वीपों की सीमाओं से परे लोगों और विचारों को एक साथ लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा उद्देश्य ऐसे संवादों को बढ़ावा देना है, जो स्थापित धारणाओं को चुनौती दें, सोच का दायरा बढ़ाएं और हमें हमारी साझा मानवता की याद दिलाएं।”
इतिहासकार, लेखक और फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डेलरिम्पल ने कहा, “जब हमने पहली बार जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत की थी, तब शायद ही कल्पना की थी कि यह इतना बड़ा स्वरूप ले लेगा। भारत में कहानी कहने, बौद्धिक आदान-प्रदान और सार्वजनिक बहस की अत्यंत प्राचीन परंपरा रही है। मेरा मानना है कि इस फेस्टिवल ने उस परंपरा को दुनिया के व्यापक बौद्धिक विमर्श से जोड़ने में मदद की है। पिछले दो दशकों में भारत और दुनिया भर के लेखकों, इतिहासकारों और विचारकों को जयपुर में एक साथ आते देखना और दर्शकों को पुस्तकों तथा विचारों से इतने उत्साह के साथ जुड़ते देखना अद्भुत रहा है। अब जब हम अपने 20वें संस्करण की ओर बढ़ रहे हैं, तो सबसे रोमांचक बात यह है कि अभी भी अनगिनत कहानियां खोजी जानी हैं, इतिहास के कई पहलुओं को नए सिरे से समझना है और अनेक विचारों पर चर्चा तथा बहस होनी बाकी है।”
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की सह-संस्थापक, सह-निदेशक और लेखिका नमिता गोखले ने कहा, किताबें हमें अपनी विविध दुनिया से रूबरू कराने वाली खिड़कियां हैं। हमारा 20वां संस्करण बदलाव की नई हवाओं, नए विचारों, विकसित होती तकनीकों और दुनिया को देखने के नए नजरियों के लिए खुला है। साथ ही, यह शास्त्रीय और कालजयी परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। हमारे लेखक और वक्ता दुनिया भर के विविध सांस्कृतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। इस ऐतिहासिक संस्करण में भारत के बहुभाषी साहित्यिक परिदृश्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। देश की सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं के लेखक विभिन्न सत्रों, परिचर्चाओं और साहित्यिक पाठ कार्क्रमों में हिस्सा लेंगे।”
वक्ताओं की दूसरी सूची एक समावेशी और निरंतर विकसित होते साहित्यिक परिदृश्य के प्रति फेस्टिवल की प्रतिबद्धता को और रेखांकित करती है। यह ऐसा मंच है, जो स्थापित परंपराओं का सम्मान करने के साथ-साथ नए विचारों, अनसुनी कहानियों और दुनिया भर के विविध दृष्टिकोणों को भी स्थान देता है। फेस्टिवल के केंद्र में यह विश्वास है कि किताबें और विचार केवल पन्नों या व्याख्यान कक्षों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संवाद, बहस, जिज्ञासा और आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देने के सशक्त माध्यम हैं।
अपने 20वें संस्करण की ओर बढ़ रहा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल एक बार फिर विविध और स्वतंत्र विचारों से सजी साहित्यिक चर्चाओं की विस्तृत श्रृंखला प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। साहित्य, इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और समकालीन चिंतन के अनूठे संगम के साथ यह फेस्टिवल ऐसा मंच प्रदान करता रहेगा, जहां पाठक, लेखक और दर्शक अपने परिचित दृष्टिकोणों से आगे बढ़कर नए विचारों से रूबरू हो सकेंगे और ऐसी चर्चाओं में भाग ले सकेंगे, जिनकी गूंज सत्रों के समापन के लंबे समय बाद तक बनी रहेगी।





