
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और भारत के 14वें राष्ट्रपति ने लंदन में ‘हार्टफुलनेस’ कार्यक्रम पर प्रकाश डाला
लंदन, दिव्यराष्ट्र/ हार्टफुलनेस यूके ने रविवार को ‘चर्च हाउस वेस्टमिंस्टर’ में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का एक ऐतिहासिक उत्सव आयोजित किया। इस भव्य समारोह में हॉल के भीतर 500 से अधिक अतिथि और ऑनलाइन माध्यम से हजारों लोग शामिल हुए। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आंतरिक सद्भाव, वैश्विक शांति और सार्वजनिक जीवन में चिंतनशील/ध्यान के अभ्यासों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करना था।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायोग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में यूनाइटेड किंगडम, भारत, राष्ट्रमंडल, राजनयिकों, संसद, धार्मिक समुदायों, नागरिक समाज और आम जनता के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प्रतिभागियों के साथ साझा किए गए एक संदेश में, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर ने आधुनिक जीवन में लोगों को रुकने, आत्म-मंथन करने और खुद से दोबारा जुड़ने में मदद करने के लिए हार्टफुलनेस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “तेजी से भागती इस दुनिया में, लोग लगातार ऐसे अवसरों की तलाश कर रहे हैं जहाँ वे कुछ पल रुक सकें, आत्म-मंथन कर सकें और इस बात पर विचार कर सकें कि वे तनाव तथा जिम्मेदारियों को कैसे संभालें।” उन्होंने आगे कहा, “ऐसे समय में जब समाज अक्सर विभाजित महसूस कर सकता है, लोगों को रुकने और विभिन्न पृष्ठभूमियों व दृष्टिकोणों के लोगों के साथ विचारपूर्वक जुड़ने के अवसर प्रदान करना बेहद मूल्यवान है।”
भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा कि इस कार्यक्रम के विषय का “गहरा अर्थ” है। उन्होंने आगे जोड़ा कि “आंतरिक सद्भाव वैश्विक शांति की पहली शर्त है” और “दुनिया में हर स्थायी बदलाव की शुरुआत मानव हृदय के परिवर्तन से होती है।” उन्होंने यह भी कहा, “वैश्विक शांति की यात्रा सम्मेलन कक्षों या सत्ता के गलियारों से शुरू नहीं होती। यह मानव हृदय से शुरू होती है।”
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ध्यान और आंतरिक रूपांतरण में योगदान के लिए हार्टफुलनेस की सराहना करते हुए कहा, “मैं इस अवसर पर आंतरिक सद्भाव को बढ़ावा देने में हार्टफुलनेस आंदोलन के असीम योगदान की सराहना करना चाहूँगा।”
भारत के आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि कार्यक्रम का विषय “हमारे समय के लिए बहुत प्रासंगिक संदेश देता है।” उन्होंने उल्लेख किया कि “जब हम आंतरिक सद्भाव विकसित करते हैं, तो हमारे भीतर अधिक स्पष्टता, करुणा और भावनात्मक लचीलापन विकसित होता है।” उन्होंने कल्याण और सद्भाव के एक साझा दृष्टिकोण के इर्द-गिर्द सरकार, कूटनीति, व्यवसाय, मीडिया और नागरिक समाज के नेताओं को एक साथ लाने के लिए हार्टफुलनेस की सराहना की।
हार्टफुलनेस के वैश्विक मार्गदर्शक दाजी ने कहा कि योग “केवल एक अभ्यास नहीं है। यह जीने का एक तरीका है, जीवन जीने की शैली है।” उन्होंने आंतरिक सद्भाव को व्यापक शांति की नींव बताते हुए कहा, “दुनिया में शांति तभी आ सकती है जब हममें से प्रत्येक के भीतर शांति हो।” उन्होंने आगे जोड़ा कि “व्यक्तिगत रूपांतरण ही सामूहिक उत्थान की ओर ले जाता है।”
इस कार्यक्रम में चेयर योग, निर्देशित ध्यान योग का लाइव प्रदर्शन, योग की विरासत पर एक गहन प्रदर्शनी और रूपा पनेसर द्वारा शास्त्रीय सितार वादन शामिल था। इस पूरे कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया था कि प्राचीन ज्ञान को सुलभ, समावेशी और समकालीन जीवन के लिए प्रासंगिक बनाया जा सके।
बैरोनेस उषा पराशर ने कहा कि योग का प्राचीन ज्ञान “सरहदों के पार जाता है” और “लोगों को जोड़ता है।” वहीं, लॉर्ड कृष रावल ने कहा कि योग का अर्थ “मिलन” है और यह “शरीर और मन, आंतरिक जीवन और बाहरी क्रियाओं, व्यक्तिगत कल्याण और सामूहिक भलाई के एकीकरण की बात करता है।”
इस सभा में राजदूत तन्मय लाल (राष्ट्रमंडल के उप महासचिव), भारत के उप उच्चायुक्त कार्तिक पांडे, विभिन्न देशों के राजदूत, राष्ट्रमंडल देशों के उच्चायुक्त, ब्रिटेन के सांसद, मेयर, डिप्टी मेयर, स्थानीय सरकार के पार्षद, धार्मिक नेता और प्रमुख योग व सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के विशेष संदेश और भारत व ब्रिटेन के वरिष्ठ नेताओं की टिप्पणियों ने योग और ध्यान को न केवल व्यक्तिगत अनुशासन के रूप में, बल्कि कल्याण, लचीलेपन और सामाजिक एकजुटता के व्यावहारिक उपकरण के रूप में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाया।
हार्टफुलनेस ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों के लिए ‘हार्टफुलनेस मैगजीन’ के एक विशेष संस्करण के साथ-साथ यूके में “दा ऑथेंटिक योगा और “दा हार्टफुलनेस वे 2” को लॉन्च करने की भी घोषणा की।
संस्था की ओर से कहा गया, “एक व्यक्ति के रूप में, जब हम वह जागरूकता पैदा करते हैं, तो हम स्वयं शांति बन जाते हैं। और जब हम योग और ध्यान के माध्यम से सामूहिक रूप से वह जागरूकता पैदा करते हैं, तो हम एक एकीकृत मानवता बन सकते हैं। यही अहिंसा है। और यही हार्टफुलनेस के मार्ग की शुरुआत है।”
*हार्टफुलनेस के बारे में**
हार्टफुलनेस ध्यान के अभ्यासों और जीवनशैली में बदलावों का एक सरल संग्रह प्रदान करता है, जिसे पहली बार बीसवीं सदी की शुरुआत में विकसित किया गया था और 1945 में भारत में ‘श्री राम चंद्र मिशन’ के माध्यम से शिक्षण के रूप में औपचारिक रूप दिया गया था। इसका उद्देश्य हर एक दिल में शांति, खुशी और ज्ञान लाना है। ये अभ्यास योग का एक आधुनिक रूप हैं जिन्हें एक उद्देश्यपूर्ण जीवन की दिशा में पहले कदम के रूप में संतोष, आंतरिक शांति, स्थिरता, करुणा, साहस और विचारों की स्पष्टता का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये सरल हैं, आसानी से अपनाए जा सकते हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों, संस्कृतियों, धार्मिक मान्यताओं और आर्थिक स्थितियों से जुड़े 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए उपयुक्त हैं। हार्टफुलनेस प्रथाओं का निरंतर प्रशिक्षण हजारों स्कूलों और कॉलेजों में जारी है, और दुनिया भर में कॉर्पोरेट्स, गैर-सरकारी और सरकारी निकायों में 1,00,000 से अधिक पेशेवर ध्यान लगा रहे हैं। 160 देशों में हजारों प्रमाणित स्वयंसेवक प्रशिक्षकों और लाखों अभ्यासकर्ताओं द्वारा 5,000 से अधिक हार्टफुलनेस केंद्रों को संचालित किया जा रहा है।






