
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बालोतरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड ( एचआरआरएल) के एकीकृत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को राष्ट्र को समर्पित कर दिया है। यह परियोजना न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देगी बल्कि पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर को औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विशाल रिफाइनरी आने वाले वर्षों में हजारों लोगों के लिए स्थायी रोजगार का माध्यम बनेगी और पूरे क्षेत्र के विकास की दिशा बदल देगी। उन्होंने इसे राजस्थान के युवाओं और देश की औद्योगिक प्रगति के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
रिफाइनरी के साथ विकसित किया गया एचआरआरएल टाउनशिप जिसे सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट्स (सीपीकेए) ने डिज़ाइन किया है इस औद्योगिक परियोजना को एक मानवीय और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप देता है। लगभग 248 एकड़ में फैला यह टाउनशिप केवल कर्मचारियों के रहने की जगह नहीं बल्कि रेगिस्तान की कठिन जलवायु में टिकाऊ और सामुदायिक जीवन का एक आधुनिक उदाहरण है।
50 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान, खारे पानी और सीमित भूजल जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए टाउनशिप की योजना पारंपरिक राजस्थानी जल संरक्षण प्रणाली ‘जोहड़’ से प्रेरित है। पूरे मास्टर प्लान में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और सामुदायिक जीवन को केंद्र में रखा गया है जिससे यह परियोजना आधुनिक तकनीक और स्थानीय परंपराओं का अनूठा संगम बन गई है।
इस टाउनशिप को राष्ट्रीय हुडको डिज़ाइन अवॉर्ड और गृह लार्ज डेवलपमेंट श्रेणी में 4-स्टार रेटिंग से सम्मानित किया जा चुका है। यहां 100 प्रतिशत रूफटॉप वर्षा जल संचयन, 2 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सोलर स्ट्रीट लाइटिंग, 12 रिचार्ज पिट, 5,000 से अधिक स्वदेशी पेड़ों का रोपण और जल की मांग में लगभग 45 प्रतिशत तक कमी लाने वाली व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। वहीं प्राकृतिक वेंटिलेशन, जालियां, झरोखे, आंगन और विशेष छत डिज़ाइन जैसी पारंपरिक तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा की खपत में भी उल्लेखनीय कमी लाई गई है।
टाउनशिप में आवासीय परिसर के साथ स्कूल, आंगनवाड़ी, क्लब, ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, शॉपिंग एरिया, कार्यालय और सुरक्षा सुविधाओं को पैदल चलने योग्य नेटवर्क से जोड़ा गया है। यहां 30 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र खुले सार्वजनिक स्थानों और हरित परिदृश्य के लिए सुरक्षित रखा गया है जिससे यह केवल एक आवासीय परिसर नहीं बल्कि एक जीवंत और आत्मनिर्भर सामाजिक इकोसिस्टम बनता है।
इस अवसर पर सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट्स के मैनेजिंग प्रिंसिपल दिक्षु सी. कुकरेजा ने कहा कि “बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं की सफलता केवल उनकी उत्पादन क्षमता या निवेश से नहीं आंकी जाती बल्कि उन लोगों के जीवन से तय होती है जो उनसे जुड़े होते हैं। बाड़मेर में हमारा प्रयास केवल एक टाउनशिप बनाने का नहीं था बल्कि ऐसा टिकाऊ और संवेदनशील शहरी तंत्र विकसित करने का था जो रेगिस्तान की प्रकृति को समझे और उसके साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़े। स्थानीय जल संरक्षण परंपराओं, निष्क्रिय डिजाइन और सामुदायिक नियोजन के माध्यम से हमने यह दिखाने का प्रयास किया है कि भारत के सबसे कठिन जलवायु वाले क्षेत्रों में भी पर्यावरण के अनुकूल और मानवीय विकास संभव है।”
एचआरआरएल रिफाइनरी और उससे जुड़ा यह आधुनिक टाउनशिप बाड़मेर को भारत के औद्योगिक विकास के अगले अध्याय का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह परियोजना केवल ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार नहीं बल्कि ऐसे विकास मॉडल की मिसाल है जिसमें उद्योग, पर्यावरण और समाज—तीनों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है।






