
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ कोकून हॉस्पिटल, जयपुर ने एक हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में सफल इलाज का उदाहरण पेश करते हुए थायरॉइड और लिवर संबंधी समस्याओं से जूझ रही महिला की सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी कराई। प्रेग्नेंसी के दौरान महिला की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कई तरह की आशंकाएं थीं, लेकिन डॉक्टरों की लगातार निगरानी, नियमित जांच और सही उपचार के बाद मां ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। वर्तमान में मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
महिला मरीज ने प्रेग्नेंसी के दौरान कई हॉस्पिटल्स में परामर्श लिया था, लेकिन बदलते थायरॉइड स्तर और लिवर संबंधी समस्याओं के कारण वह और उनका परिवार काफी चिंतित था। कुछ जगहों पर प्रेग्नेंसी को जारी रखने को लेकर आशंका जताई गई, जबकि कुछ डॉक्टरों ने समय से पहले डिलीवरी की संभावना बताई थी। ऐसे समय में परिवार ने कोकून हॉस्पिटल में क्लिनिकल हेड एंड सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, डॉ. हिमानी शर्मा से संपर्क किया।
हॉस्पिटल में विस्तृत जांच के बाद मरीज की स्थिति का आकलन किया गया और उनके लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई। डॉ. हिमानी शर्मा की देखरेख में प्रेग्नेंसी के दौरान कई बार थायरॉइड की जांच की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार दवाओं में समय-समय पर बदलाव किया जाता रहा ताकि मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। इसके साथ ही उन्हें नियमित परामर्श और मानसिक सहयोग भी दिया गया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और वे पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान सकारात्मक बनी रहीं।
उपचार और देखभाल का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा। प्रेग्नेंसी के दौरान उनका वजन स्वस्थ तरीके से लगभग 8 किलोग्राम बढ़ा और सभी जरूरी जांचों की लगातार निगरानी की गई। तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 3.9 किलोग्राम वजन के स्वस्थ शिशु को नॉर्मल डिलीवरी के माध्यम से जन्म दिया।
इस बारे में जानकारी देते हुए डॉ. हिमानी शर्मा ने कहा, “प्रेग्नेंसी के दौरान थायरॉइड की समस्या का इलाज सामान्य मरीजों की तरह नहीं किया जा सकता। इस दौरान शरीर में हार्मोन संबंधी कई बदलाव होते हैं, इसलिए नियमित जांच और दवाओं की सही मात्रा तय करना बेहद जरूरी होता है। पारुल के मामले में लगातार फॉलो-अप, समय-समय पर जांच और परिवार का सहयोग बेहतर परिणाम का प्रमुख कारण रहा। सही निगरानी और समय पर इलाज से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में भी सुरक्षित डिलीवरी संभव है”
यह मामला बताता है कि जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद यदि प्रेग्नेंसी के दौरान सही डॉक्टरों की सलाह, नियमित जांच और सही उपचार मिलता रहे तो मां और बच्चे दोनों के लिए अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। पारुल और उनके परिवार के लिए यह सफर चिंता और अनिश्चितता से शुरू हुआ था, लेकिन स्वस्थ बच्चे के जन्म के साथ यह खुशी में बदल गया।




