
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/परशुराम कुंड (अरुणाचल प्रदेश)। रैवासा-मलूक पीठ वृंदावन के आग्रदेवाचार्य राजेंद्रदास महाराज ने पूर्वोत्तर भारत के अपने प्रवास के दौरान ऐतिहासिक परशुराम कुंड पहुंचकर भगवान परशुराम की 54 फीट ऊँची प्रतिमा का अवलोकन किया। प्रतिमा स्थापना के भव्य स्वरूप को देखकर उन्होंने इसे वर्षों पुराने एक संकल्प की सिद्धि बताया।
परशुराम कुंड पहुंचने पर विप्र फाउंडेशन की तिनसुकिया इकाई की और से संजय त्रिवेदी, रमेश शास्त्री आदि ने महाराज श्री का स्वागत किया। परशुराम तीर्थ के संयोजक परमेश्वर शर्मा ने बताया कि विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा के विशेष आग्रह पर आचार्य राजेंद्रदास जी महाराज संतों के एक दल के साथ तीर्थ स्थल पहुंचे।
इस अवसर पर महाराज श्री ने कहा कि वर्ष 2013 में साधु-संतों के साथ परशुराम कुंड में स्नान के दौरान उनके मन में यह भाव उत्पन्न हुआ था कि इस पवित्र स्थल पर भगवान परशुराम की एक भव्य प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए। आज 54 फीट ऊँची प्रतिमा को साकार रूप में देखकर उन्हें अत्यंत संतोष और आध्यात्मिक प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्थापत्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और भगवान परशुराम के आदर्शों का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने परशुराम तीर्थ के विकास एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि आचार्य राजेंद्रदास जी महाराज ने प्रतिमा स्थापना परियोजना के लिए पूर्व में 1,11,111 रुपये का आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया था। उन्होंने इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सनातन चेतना को सुदृढ़ करने वाला महत्वपूर्ण अभियान बताते हुए विप्र फाउंडेशन की भूरी भूरी प्रंशसा की




