
– लाख के जरिए विभिन्न पारंपरिक कलाओं को प्रदान किया आधुनिक स्वरूप
जयपुर, दिव्य राष्ट्र/ जवाहर कला केंद्र की परिजात आर्ट गैलरी में गुरुवार को लाख आर्टिस्ट द्रोपदी मीना द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की दो दिवसीय कला प्रदर्शनी द पावर 2.0 की शुरुआत हुई। इसमें करीब 100 खूबसूरत रचनाएं प्रदर्शित की जा रही हैं। फिक्की फ्लो, जयपुर चैप्टर की फाउंडर चेयरपर्सन श्रीमती नीता बूचरा ने मुख्य अतिथि के तौर पर रिबन काटकर व द्वीप प्रज्ज्वलन कर एग्जीबिशन का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद मुख्य अतिथि नीता बूचरा ने आर्टिस्ट द्रोपदी मीना की रचनाओं व इनके पीछे के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति व कला को संजोकर रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। हम द्रोपदी मीना जैसे कलाकारों को प्रोत्साहित कर प्राचीन कला को विलुप्त होने बचाने की दिशा में अपना योगदान दे सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि द्रोपदी मीना भारत की पहली लाख आर्टिस्ट हैं, जो लाख को पेंटिंग, मूर्तियों व अन्य माध्यमों के जरिए विभिन्न रूप प्रदान करती हैं। उन्होंने पारंपरिक लाख कला को आधुनिक स्वरूप प्रदान करते हुए कैनवास पर कई अनोखी कलाकृतियां बनाई है। सुहागिनों के लिए चूड़ी बनाने में उपयोग किए जाने वाले लाख को विशेष तकनी से पिघलाकर एवं मोल्ड कर ये खूबसूरत पेंटिंग्स तैयार की गई हैं। जेकेके में लगाई गई इस प्रदर्शनी में उन्होंने लाख पेंटिंग के जरिए भगवान कृष्ण के विविध स्वरूपों को बखूबी प्रदर्शित किया है।
लगन चौक कलाकृति के माध्यम से आर्टिस्ट ने बताया कि शादियों के दौरान घरों की दीवारों पर लगन चौक बनाया जाता है। द्रोपदी ने दीवारों को लाल करके लाख से इसे बनाया है। देवी के आशीर्वाद की प्रतीक इस रचना में पालघाट देवी का चित्र है। इसी प्रकार विवाह व अनुष्ठानों के समय बनाए जाने वाले देव चौक की लाख कलाकृति में पालघाट देवी के साथ—साथ घोड़े व योद्धा भी बनाए गए हैं। नव विवाह जोड़ी की सुरक्षा व बुरी नजर से बचाने के लिए और यह ब्रह्मांड के संतुलन को दर्शाता है। इनके अलावा मातृत्व, राजस्थानी संस्कृति, प्रकृति, महापुरुषों, धार्मिंक व ऐतिहासिक स्थलों तथा समाज में महिलाओं की भूमिका पर आधारित पेंटिंग्स को भी कलाप्रेमियों द्वारा काफी सराहा गया। द्रोपदी ने लाख के जरिए गोंड, मधुबनी, वर्ली एवं मंडला का शैलियों को कैनवास पर आधुनिक रूप में प्रस्तुत कर इन्हें नई पहचान देने का प्रयास किया है।






