घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों के दोहन से बनेगा ‘विकसित भारत’: अनिल अग्रवाल
दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ ग्लोबल एनर्जी इंडिपेंडेंस डे के अवसर पर वेदांता ने घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि कंपनी 5 लाख बैरल ऑयल इक्विवेलेंट प्रतिदिन उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि भारत के पास करीब 300 अरब बैरल ऑयल इक्विवेलेंट हाइड्रोकार्बन संसाधनों की क्षमता है, जिनका जिम्मेदारीपूर्वक दोहन कर देश आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम कर सकता है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
वेदांता के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजारों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद देश अपनी तेल और गैस की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है। इससे देश वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बना रहता है। कंपनी का मानना है कि घरेलू स्तर पर तेल एवं गैस की खोज और उत्पादन को तेज़ कर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा, “ऊर्जा आत्मनिर्भरता भारत के लिए एक रणनीतिक आर्थिक आवश्यकता है। देश के भीतर उत्पादित तेल और गैस का प्रत्येक बैरल हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, आयात पर निर्भरता कम करता है और राष्ट्रीय लचीलापन बढ़ाता है। भारत के पास प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, विश्वस्तरीय तकनीकी प्रतिभा और उद्यमशीलता की क्षमता है। दुनिया के लगभग 10 प्रतिशत तेल और गैस पेशेवर भारतीय हैं और यह प्रतिभा, हमारे विशाल संसाधन आधार के साथ मिलकर, भारत के ऊर्जा भविष्य को बदलने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। यदि हम अपने हाइड्रोकार्बन संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक दोहन करें, तो ऊर्जा आत्मनिर्भरता आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और विकसित भारत की दिशा में एक शक्तिशाली प्रेरक शक्ति बन सकती है।”
कंपनी ने कहा कि भारत में अब भी कई संभावित तलछटी बेसिनों की व्यवस्थित खोज नहीं हुई है, जिससे घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। वेदांता ऑयल एंड गैस का कहना है कि वह उन्नत तकनीकों और बेहतर ऑयल रिकवरी के जरिए इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की दिशा में काम कर रही है।
कंपनी ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों (डीप और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक्स) को खोज के लिए खोलने जैसे कदम उठाए हैं। यह पहल प्रधानमंत्री के नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन ‘समुद्र मंथन’ के विजन के अनुरूप है। वेदांता का मानना है कि इस दशक के अंत तक भारत के ऊर्जा क्षेत्र में करीब 500 अरब डॉलर के निवेश की संभावनाएं हैं।
कंपनी के अनुसार, दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए उद्योग, उद्यमियों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक होगी। वेदांता का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्ण दोहन न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार सृजन, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
वेदांता ऑयल एंड गैस के पास वर्तमान में राजस्थान, गुजरात, असम और आंध्र प्रदेश में लगभग 47,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 44 ऑनशोर और ऑफशोर ब्लॉक्स का पोर्टफोलियो है। कंपनी का कहना है कि वह जिम्मेदार संचालन, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सतत विकास



