टेक्सटाइल सेक्टर के लिए सरकार की नयी पॉलिसी शीघ्र
देश में 7-8 न्यू एज फाइबर पर शीघ्र काम शुरू होगा – गिरिराज सिंह
टेक्सटाइल कॉन्क्लेव में विजन-2047 के रोडमैप पर हुआ मंथन
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ टेक्सटाइल देश में सर्वाधिक रोजगार सृजन करने वाला उद्योग है। वर्ष 2014 में इस सेक्टर का आकार 138 मिलियन डॉलर का था जो मोदी सरकार के आने के बाद 190 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया जिसे वर्ष 2030 तक 350 मिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य बनाया गया है जिसमें 250 मिलियन डॉलर घरेलू स्तर पर और 100 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट शामिल है। ये कहना है केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह का। वे आज एमएसएमई सेक्टर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्यरत अखिल भारतीय संगठन लघु उद्योग भारती की ओर से दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘टेक्सटाइल कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
सिंह ने जानकारी दी कि दुनियाभर में टैरिफ वार से उपजे हालातों को देखते हुए भारत सरकार ने 40 नए देशों को चिन्हित किया है जिससे व्यापार को बढ़ाया जायेगा। उन्होंने बताया कि देश के 548 जिलों से हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट का एक्सपोर्ट 132 देशों को किया गया। उन्होंने कहा कि देश में करीब 7-8 न्यू एज फाइबर के उत्पादन पर शीघ्र काम शुरू होगा जिससे विदेशों पर हमारी निर्भरता ख़त्म की जा सके। उन्होंने बैम्बू, पाइनापल और केले के फाइबर जैसे अन्य वैकल्पिक उद्योगों के साथ स्वयं सहायता ग्रुप को जोड़ने पर बल दिया।
सिक्योरिटी, ग्लोबल मार्किट एक्सेस, एफटीए युटीलाइजेशन एवं ब्रांड इंडिया, रिसर्च एवं नवाचार पर एमएसएमई को विशेष सपोर्ट का आग्रह किया, जिस पर मंत्री ने आस्वस्थ किया कि इन सभी अधिकांश सुझावों को मान लिया जायेगा एवं भविष्य में भी एमएसएमई उद्योगों की समस्याओं को प्राथमिकता पर हल किया जायेगा।
MANTRA के निदेशक डॉ. पंकज गांधी ने टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, टेक्निकल टेक्सटाइल्स एवं एमएसएमई विषय पर बताया कि तकनीकी वस्त्रों का उपयोग अब पारंपरिक परिधानों तक सीमित न रहकर कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा, ऑटोमोबाइल, निर्माण, परिवहन और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। भारत विश्व के प्रमुख तकनीकी वस्त्र बाजारों में शामिल है और इस क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान, स्वदेशी उत्पादन तथा निर्यात विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं।
डॉ. गांधी ने तकनीकी वस्त्रों में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने के लिए उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों एवं अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रस्तुति में अत्याधुनिक तकनीक, नए उत्पादों के विकास, आयात प्रतिस्थापन और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष प्रकाश डाला गया।
उन्होंने उद्योग-अकादमिक सहयोग और CoE-TRA मॉडल के माध्यम से एमएसएमई को तकनीकी सहायता, परीक्षण सुविधा, उत्पाद विकास तथा व्यवसायीकरण के अवसर उपलब्ध कराने की रूपरेखा प्रस्तुत की।
राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पूर्व चीफ एनवायरनमेंट इंजीनियर डॉ. विजय सिंघल ने ग्रीन कंपनी रेटिंग सिस्टम फॉर एनवायर्नमेंटल सस्टेनेबिलिटी इन टेक्सटाइल सेक्टर और स्प्रे इंजीनियरिंग डिवाइसेस लिमिटेड के विवेक वर्मा ने टेक्सटाइल वेस्ट वाटर से जुड़े विषयों पर बात की।
एफटीए पर डॉ. विश्वजीत नाग एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन पर डीजीएफटी की अधिकारी आशिमा ने विस्तार से जानकारी दी। लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय महामंत्री ओमप्रकाश गुप्ता ने उद्योगों और उद्यमियों की मदद करने में संगठन की भूमिका और जमीनी स्तर पर इसके असर के बारे में जानकारी दी।उन्होंने पिछले 20-25 वर्षों में औद्योगिक और टेक्सटाइल इकोसिस्टम में आए बड़े बदलावों पर प्रकाश डाला और पहले की स्थिति की तुलना आज के हालात से की।
इससे पूर्व लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष मधुसूदन दादू ने लघु उद्योग भारती की तीन दशकों की यात्रा पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रकाशचंद्र जी, राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव नरेश पारीक, को-कन्वीनर कपिल गुप्ता, को-कन्वीनर पल्लवी लढ़ा और आउटरीच प्रभारी सीमा मिश्रा, एसजीसीसीआई, सूरत के अध्यक्ष अशोक जीरावला एवं इचलकरंजी विधायक राहुल प्रकाश अवाडे, अग्रणी वस्त्र उद्यमी रवि पोदार एवं अतुल मित्तल सहित बड़ी संख्या उद्यमीगण उपस्थित रहे।