मुंबई, दिव्यराष्ट्र/ भारत में बिजली और इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी कंपनियों के शेयर अब प्रमुख सूचकांकों से अलग रुख दिखाने लगे हैं। यह संकेत देता है कि बाजार देश के ऊर्जा संक्रमण को लेकर अपनी धारणा बदल रहा है। जीनस पावर और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस जैसी कंपनियों ने मजबूत ऑर्डर बुक और ग्रिड आधुनिकीकरण से जुड़े लंबे समय के राजस्व मॉडल के दम पर लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।
इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण साफ है—बिजली वितरण प्रणाली की सबसे कमजोर कड़ी को ठीक करने की कोशिश की जा रही है। लंबे समय से एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीसीसी) लॉस और बिल भुगतान में देरी ने वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है।
इसे सुधारने के लिए सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्मार्ट मीटर बिलिंग की दक्षता बढ़ाते हैं और प्रीपेड सिस्टम के जरिए भुगतान अनुशासन लागू करने में मदद करते हैं।
स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अम्बरीश बालिगा के अनुसार, “भारत के पावर सेक्टर की सबसे बड़ी समस्याएं एटीसीसी लॉस और बकाया बिल थीं। इन्हें दूर करने के लिए आरडीएसएस योजना के तहत स्मार्ट मीटर लाए गए। प्रीपेड मॉडल से वितरण कंपनियां अपने देनदारों को सीमित रख सकती हैं।”
इसका सीधा असर पूरे पावर वैल्यू चेन पर पड़ता है। डिस्कॉम की नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) स्थिति सुधरने से बिजली उत्पादकों से लेकर उपकरण आपूर्तिकर्ताओं तक सभी को लाभ मिलता है।
हालांकि, इस योजना के क्रियान्वयन की रफ्तार अभी असमान है। मार्च 2026 तक 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का प्रारंभिक लक्ष्य अब बढ़ाकर मार्च 2028 कर दिया गया है। अब तक 15 करोड़ मीटर का टेंडर जारी हुआ है, जिनमें से लगभग 6.13 करोड़ मीटर लगाए जा चुके हैं। मौजूदा रफ्तार करीब 1.35 लाख मीटर प्रतिदिन है।
बालिगा के मुताबिक, लक्ष्य हासिल करने के लिए इस संख्या को लगभग दोगुना करना होगा और यह भी संभव है कि इसका कुछ हिस्सा वित्त वर्ष 2030 तक खिंच जाए। हालांकि बाजार के लिए यह अंतर चिंता का कारण नहीं बल्कि कमाई की दीर्घकालिक संभावना का संकेत है। स्मार्ट मीटर का लगातार विस्तार अगले कई वर्षों तक ऑर्डर पाइपलाइन बनाए रख सकता है, जिससे इस क्षेत्र में अगले चार वर्षों में लगभग 30% की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (सीएजीआर) देखने को मिल सकती है।
जीनस पावर इसका उदाहरण है, जिसके पास लगभग ₹27,000 करोड़ की ऑर्डर बुक है, जो करीब 4.5 करोड़ स्मार्ट मीटर के बराबर है। ये ऑर्डर आमतौर पर 8–10 वर्षों के कंसेशन एग्रीमेंट से जुड़े होते हैं।
मौका केवल बिजली तक सीमित नहीं है। बालिगा के अनुसार भविष्य में लगभग 12 करोड़ स्मार्ट गैस मीटर और इसी स्तर पर स्मार्ट वॉटर मीटरिंग की भी संभावना है। इससे साफ है कि भारत का यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर धीरे-धीरे डेटा आधारित उपभोग प्रबंधन की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि निकट अवधि में कुछ दबाव बने रह सकते हैं। भीषण गर्मी में बिजली की चरम मांग, अल नीनो की आशंका और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव आपूर्ति श्रृंखला और डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी व्यापक तस्वीर स्पष्ट है। भारत में इलेक्ट्रिफिकेशन पावर सिस्टम की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है और बाजार धीरे-धीरे इस बदलाव को अधिक भरोसे के साथ कीमतों में शामिल करने लगा है।





