सतत व्यावसायिक प्रथाएं, तय ईएसजी मानकों और वाहनों के लोन पर अनुकूल ब्याज दरों के जरिए महिंद्रा के डीलरशिप नेटवर्क की मदद करेंगी।
मुंबई, दिव्यराष्ट्र:/ भारत की अग्रणी ऑटोमोटिव कंपनियों में से एक, महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड ने भारत के पहले सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड डीलर फाइनेंसिंग प्रोग्राम को शुरू करने के लिए डीबीएस बैंक इंडिया के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का मकसद अधिकृत एम एंड एम डीलरों को यात्री और वाणिज्यिक वाहनों की खरीद के लिए लोन पर अनुकूल ब्याज दरें देकर टिकाऊ व्यावसायिक प्रथाएं अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में अपनी तरह का यह पहला कार्यक्रम पर्यावरणीय प्रदर्शन के मानकों को साफ तौर पर तय करता है। यह एम एंड एम के ग्रीन डीलरशिप प्रोग्राम की जरूरतों के मुताबिक अलग-अलग मानकों के आधार पर डीलरशिप के कामकाज का मूल्यांकन करने में मदद करता है। इनमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और पानी की खपत की निगरानी, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संचयन की व्यवस्था, जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन, सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता और यहां तक कि डीलरशिप द्वारा बेची जाने वाली ई-एसयूवी की संख्या भी शामिल है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के ऑटोमोटिव डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नलिनीकांत गोलागुंटा ने कहा, “डीबीएस बैंक इंडिया के साथ हमारे सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड डीलर फाइनेंसिंग प्रोग्राम की शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब भारत अपनी स्थिरता यात्रा के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। स्थिरता के प्रति लंबे समय की प्रतिबद्धता वाली कंपनी के रूप में, हम भारत की स्थिरता से जुड़ी आकांक्षाओं का समर्थन करना अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। इस फाइनेंसिंग प्रोग्राम की शुरुआत हमें अपने डीकार्बनाइजेशन प्रयासों का दायरा बढ़ाने, अपने डीलरशिप नेटवर्क को इसमें शामिल करने और स्कोप 3 उत्सर्जन में कमी लाने में मदद करेगी।”
डीबीएस बैंक इंडिया के प्रबंध निदेशक और कंट्री हेड, ग्लोबल ट्रांजैक्शन सर्विसेज, कॉर्पोरेट बैंकिंग, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस एंड एसएमई, दिव्येश दलाल ने कहा, “महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ साझेदारी कर और उनकी हरित आकांक्षाओं को वास्तविकता में बदलने में मदद करके डीबीएस को गर्व महसूस हो रहा है। हमारा यह नया फाइनेंसिंग प्रोग्राम सिर्फ बैलेंस शीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके डीलरशिप नेटवर्क को बड़े पैमाने पर डीकार्बनाइज करने के लिए जरूरी व्यावहारिक उपकरण भी देता है। हमने इस इनोवेटिव सॉल्यूशन को तैयार करने के लिए अपनी क्रॉस-बॉर्डर विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया है, जो हमारे क्लाइंट की प्रगति का समर्थन करने के साथ-साथ नेट-जीरो भविष्य की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को भी गति देता है।”
डीबीएस बैंक के प्रबंध निदेशक और ग्रुप हेड, कॉर्पोरेट सेल्स एंड सॉल्यूशनिंग, ग्लोबल ट्रांजैक्शन सर्विसेज, टेरेंस यू टिक योंग ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा, “अपने डीलरों के बीच ईएसजी के महत्व को बढ़ावा देने के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ साझेदारी करने पर डीबीएस को गर्व है। डीबीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा के डीलरशिप नेटवर्क को समाज में ईवी अपनाने को बढ़ावा देने और संचालन व निवेश के उच्च ईएसजी मानकों को सक्षम करने के लिए प्रोत्साहित करके उनका समर्थन कर रहा है। जलवायु अनुकूलन की कमान संभालने के लिए, महिंद्रा एंड महिंद्रा के विभिन्न संगठनात्मक विभागों, प्रोडक्शन से लेकर सस्टेनेबिलिटी तक और चैनल्स से लेकर फाइनेंस तक, के बीच का सक्रिय सहयोग हमारे लिए प्रेरणादायक है।”
एम एंड एम के अधिकृत डीलरशिप आमतौर पर ग्राहकों को वाहन बेचने से पहले उन्हें मैन्युफैक्चरर से खरीदते हैं। डीबीएस फाइनेंसिंग प्रोग्राम के इस नए ढांचे के तहत, डीलरशिप को विस्तृत ईएसजी मानकों के मुकाबले उनके स्कोर के आधार पर रैंक किया जा सकता है, जिसमें ईएसजी मानकों और बिक्री लक्ष्यों पर प्रगति करने वाले डीलरों को व्यावसायिक लाभ दिए जाएंगे। इन मानकों को एम एंड एम और फाइनेंसिंग पार्टनर डीबीएस बैंक इंडिया ने मिलकर तैयार किया था।
यह पहल एम एंड एम के व्यापक डीकार्बनाइजेशन प्रयासों के अनुरूप है, जिसके तहत कंपनी ने 2026 के डीजेएसआई, एसएंडपी ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ईयरबुक में शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की अपनी पेरिस समझौते की प्रतिबद्धता के तहत, ज्यादा कड़े राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्यों को पेश करने के सरकार के हालिया कदम के भी अनुकूल है।
जलवायु अनुकूलन और शमन डीबीएस के लिए प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं, जिसे 2024 में ग्लोबल फाइनेंस द्वारा बेस्ट बैंक फॉर सस्टेनेबल फाइनेंस – इंडिया से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, डीबीएस बैंक इंडिया को क्रिसिल कोएलिशन ग्रीनविच द्वारा लगातार 2025 और 2026 दोनों वर्षों में बेस्ट बैंक फॉर कॉर्पोरेट बैंकिंग इन इंडिया के रूप में मान्यता दी गई थी, जो व्यावसायिक उत्कृष्टता के प्रति इसके ग्राहक-प्रथम दृष्टिकोण को और मजबूत करता है




