
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ जयपुर की 13 वर्षीय नविका अग्रवाल की पहली पुस्तक दी मैप मेकर्स हार्ट का लोकार्पण सोमवार को एक गरिमामय समारोह में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लेखिका लक्ष्मी शर्मा, अंशु हर्ष, याशिका जैन तथा आर्किटेक्ट ध्रुव गुप्ता उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने नविका को उनकी पहली पुस्तक के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
नविका अग्रवाल को बचपन से ही पुस्तकों के प्रति गहरा लगाव रहा है। उनका कहना है कि पढ़ने के माध्यम से वे नई-नई दुनियाओं की खोज करती हैं और अक्सर उन्हें शांत पलों, संगीत तथा रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों से प्रेरणा मिलती है। दी मैप मेकर्स हार्ट उनका पहला उपन्यास है, जो साहस, खोने के दर्द और कल्पना की शक्ति पर आधारित एक संवेदनशील और रोचक कथा है। अपने लेखन के माध्यम से नविका पाठकों तक यह संदेश पहुँचाना चाहती हैं कि जीवन के अंधेरे क्षणों में भी कहीं न कहीं आशा और जादू की एक छोटी-सी किरण अवश्य मौजूद होती है।
इस पुस्तक की कहानी का मुख्य पात्र लियो डॉसन है, जो अपने स्कूल की लाइब्रेरी में एक रहस्यमयी नक्शा खोजता है। यह नक्शा उसे “असंभव स्थानों” की एक अद्भुत दुनिया में ले जाता है, जहाँ नदियाँ उलटी दिशा में बहती हैं, शहर आसमान में तैरते हैं और भय सजीव रूप में सामने आते हैं। अपने नए मित्रों आशा, क्विन और जैक्स के साथ लियो उस नक्शे के बिखरे हुए टुकड़ों को खोजने की रोमांचक यात्रा पर निकलता है, इससे पहले कि एक शक्तिशाली कार्टोग्राफर वास्तविकता को ही बदल दे। इस यात्रा के दौरान वह समझता है कि साहस, मित्रता और कल्पना की शक्ति किसी भी डर से अधिक प्रभावशाली होती है, और सबसे महान नक्शे वे होते हैं जो दिल से बनाए जाते हैं।
इस अवसर पर लेखिका लक्ष्मी शर्मा ने कहा कि यह फैंटेसी नॉवेला असंभव संसारों की रोमांचक यात्रा के साथ-साथ आशा, संतुलन और साहस का सशक्त रूपक प्रस्तुत करती है। उन्होंने नविका की भाषा पर पकड़ और कल्पना-शक्ति की सराहना करते हुए कहा कि यह रचना इस विश्वास को स्थापित करती है कि “असंभव” कोई स्थान नहीं, बल्कि एक चुनाव है।
आर्किटेक्ट ध्रुव गुप्ता ने कहा कि इतनी कम उम्र में उपन्यास लिखना अत्यंत साहस का कार्य है। आज जहाँ अधिकांश बच्चे खेलकूद और मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, वहीं नविका ने अपनी पुस्तक के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि उम्र नहीं, बल्कि सोच और जुनून ही व्यक्ति को अलग पहचान दिलाते हैं।
अंशु हर्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी कल्पना अद्भुत है। उन्होंने कहा कि नविका की लेखनी आने वाले समय में साहित्य जगत की एक सशक्त आवाज़ बन सकती है। उनके अनुसार, इस उम्र में उपन्यास लिखना केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है।
लेखिका एवं ज्वेलरी डिज़ाइनर याशिका जैन ने कहा कि यह अवसर उनके लिए विशेष है। एक साल पहले नविका ने उनकी किताब के लॉन्च में प्रेरणा ली और आज वो स्वयं अपनी किताब लिख चुकी है । नविका जैसे युवा लेखकों को देखकर यह विश्वास और मजबूत होता है कि आज की पीढ़ी अपने विचारों को अभिव्यक्त करने और सृजन करने की अद्भुत क्षमता रखती है।
कार्यक्रम के दौरान नविका ने बताया कि यह उनकी पहली पुस्तक है और पढ़ने के अपने शौक के कारण उन्होंने एक वर्ष में लगभग 85 पुस्तकें पढ़ी हैं, जिनमें जीवनी, साहित्य और विभिन्न विषयों की किताबें शामिल हैं। उनकी पसंदीदा लेखिका चित्रा बनर्जी हैं, जबकि उन्हें दी डायरी ऑफ़ ए यंग गर्ल विशेष रूप से प्रेरित करती है। इन्हीं पुस्तकों से मिली प्रेरणा ने उन्हें लेखन की ओर अग्रसर किया और उनकी पहली पुस्तक का सृजन संभव हुआ।
यह पुस्तक न केवल एक रोमांचक कल्पनालोक की यात्रा है, बल्कि यह युवा रचनात्मकता, साहस और सपनों को साकार करने की प्रेरणादायक मिसाल भी है।





