
इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दर्ज इस अनोखी प्रदर्शनी में जेईसीआरसी के छात्रों ने पेश किए 100 से अधिक मज़ेदार पन्स
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स 2025 में “पन पर आधारित भारत की एकमात्र और सबसे बड़ी प्रदर्शनी” के रूप में मान्यता प्राप्त किए, जेईसीआरसी युनिवर्सिटी के जयपुर स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन व पेंसिलबॉक्स डिज़ाइन के संस्थापक अनुराग एस. के संयुक्त प्रयास से “नयापन” के 5वें संस्करण, नयापन-चम का आयोजन किया जा रहा है।
जवाहर कला केंद्र की सुदर्शन आर्ट गैलरी में 29 मार्च तक लगने वाली यह प्रदर्शनी हास्य, बौद्धिकता और विज़ुअल आर्ट का एक अद्वितीय संगम है। जहाँ दर्शक “ग़ब्बार सिंह की लाइफ़” पर एक “डाकू’मेंटरी” से लेकर “जिम कॉर्बेट” में वर्कआउट करते बाघों को देख रहें है।
हास्य और रचनात्मकता से भरी इस प्रदर्शनी में कुल 100 से अधिक पन प्रदर्शित किए गए हैं जिनमें 16 बड़े आर्ट इंस्टॉलेशन्स (जो की जेईसीआरसी के छात्रों द्वारा निर्मित हैं), 6 फ्रेम्ड पन और 80 डिजिटल पन्स हैं। इस कार्यक्रम का उद्घाटन उर्वशी वार्मन (प्रिंसिपल, द पैलेस स्कूल) और मीनाक्षी सिंह (सह-संस्थापक, खाटू डिज़ाइन्स एवं अध्यक्ष, एडीआई जयपुर) द्वारा किया गया।
इन विज़ुअल मास्टरपीस की सराहना करते हुए जेईसीआरसी के जयपुर स्कूल ऑफ डिज़ाइन की डीन शिवानी कौशिक ने बताया कि छात्रों ने जिस शिल्प कौशल और सूक्ष्मता के साथ व्यंग्य व भाषाई बारीकियों को इन शानदार कलाकृतियों में पिरोया है वह उनके उन्नत डिज़ाइन दर्शन का उत्कृष्ट प्रमाण है।
इसी कड़ी में, दर्शकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदर्शनी में ‘अपनापन वॉल’ स्थापित की गई है, जहां आगंतुक अपने स्वरचित पन साझा कर सकते हैं। साथ ही वे अपने पसंदीदा पन को वोट भी कर सकते हैं।
प्रदर्शनी के कुछ प्रमुख पन्स की झलक*
अ बार्बर वांटेड टू ब्रैंड हिज़ शॉप, ही नेम्ड इट… नाइकी दुकान। – यहाँ मशहूर स्पोर्ट्स ब्रांड ‘नाइकी’ का उपयोग हिंदी के शब्दों ‘नाई की’ के रूप में किया गया है, जो इस वाक्य को एक बेहतरीन और हास्यपूर्ण ‘पन’ बनाता है।
वो इंजिनियरिंग करते-करते थक गया था। आज उसने घुटने बी.टेक दिए। – यहाँ हिंदी के मुहावरे ‘घुटने टेक दिए’ में ‘टेक’ की जगह इंजीनियरिंग की डिग्री ‘बी.टेक’ का बड़ी ही चतुराई से इस्तेमाल किया गया है, जो इंजीनियरिंग के छात्रों के संघर्ष को एक बेहद हास्यपूर्ण दृष्टिकोण देता है।



