1 जून से सोलर पैनल होंगे महंगे, सप्लाई संकट और रोजगार पर भी मंडरा रहा खतरा: अजय यादव
जयपुर। दिव्यराष्ट्र:/ एएलएमएम -II लागू होने के साथ ही देश के सोलर सेक्टर में चिंता बढ़ गई है। राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी एसोसिएशन (रेरा) के अध्यक्ष अजय यादव का कहना है कि इसका असर केवल उपभोक्ताओं और सोलर विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सोलर मॉड्यूल निर्माताओं पर भी पड़ेगा जो पैनल तो बनाते हैं लेकिन स्वयं सोलर सेल का निर्माण नहीं करते।
अजय यादव के अनुसार, एएलएमएम -II लागू होने के बाद ऐसे मॉड्यूल निर्माताओं को भारतीय सोलर सेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सीमित सेल उपलब्धता के कारण कई निर्माताओं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे अनेक फैक्ट्रियां आंशिक या पूर्ण रूप से बंद होने की स्थिति में पहुंच सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इससे केवल उद्योग ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि हजारों लोगों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है। “यदि मॉड्यूल निर्माताओं को पर्याप्त मात्रा में सेल उपलब्ध नहीं होते हैं, तो उत्पादन घटेगा, ऑर्डर प्रभावित होंगे और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।”
अजय यादव का कहना है कि एएलएमएम -II के लागू होने से सोलर सिस्टम की लागत में प्रति किलोवाट 10,000 से 12,000 रुपये तक की वृद्धि होने की आशंका है। साथ ही एएलएमएम -II अनुपालक मॉड्यूल्स की कमी के कारण बाजार में सप्लाई संकट भी उत्पन्न हो सकता है, जिससे रूफटॉप सोलर और नेट मीटरिंग परियोजनाएं प्रभावित होंगी।
उन्होंने केंद्र सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि देश में सोलर सेल निर्माण क्षमता अभी मांग के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। ऐसे में एएलएमएम -II को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में सोलर सेल उपलब्ध हों।
अजय यादव ने कहा, “हम आत्मनिर्भर भारत और घरेलू विनिर्माण के पूरी तरह पक्षधर हैं, लेकिन जब तक देश में पर्याप्त मात्रा में सोलर सेल निर्माण क्षमता विकसित नहीं हो जाती, तब तक एएलएमएम -II को लागू नहीं किया जाना चाहिए। अन्यथा इसका असर उपभोक्ताओं, विक्रेताओं, निर्माताओं और रोजगार—सभी पर पड़ेगा तथा भारत की सोलर क्रांति की गति धीमी हो सकती है।”
उन्होंने सरकार से एएलएमएम -II के क्रियान्वयन को फिलहाल स्थगित कर उद्योग, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा करने तथा एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने की मांग की है।


