
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ भारत में सिंगल माल्ट व्हिस्की का सफ़र एक मूक क्रांति जैसा रहा है। अमृत, पॉल जॉन, रामपुर, इंद्री और गोदावन जैसे ब्रांड्स ने पिछले दो दशकों में विश्व स्तर पर पहचान बनाई है, अवॉर्ड जीते हैं और धीरे-धीरे लोगों की सोच बदली है। अभी हाल ही तक, इस तरक्की को आगे बढ़ाने के लिए किसी औपचारिक संस्थागत आवाज़ की कमी थी।
इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन (आईएमडब्ल्यूए) की स्थापना जुलाई 2024 में हुई और 20 मार्च 2025 को नई दिल्ली में आधिकारिक तौर पर इसका लॉन्च हुआ। इसका उद्देश्य भारतीय माल्ट व्हिस्की के लिए एक जैसे मानक तय करना है। यह भारत को स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन, आयरिश व्हिस्की एसोसिएशन और जापानी स्पिरिट्स एंड लिकर व्हिस्की एसोसिएशन जैसे ग्लोबल व्हिस्की एसोसिएशन के समकक्ष लाता है। यह तुलना देश में इस कैटेगरी की परिपक्वता को दर्शाती है जिसे अब संस्थागत ढांचे की ज़रूरत है।
इंडियन सिंगल माल्ट और प्योर माल्ट व्हिस्की बनाने वालों की एकमात्र प्रतिनिधि संस्था के रूप में आईएमडब्ल्यूए का उद्देश्य इंडियन माल्ट व्हिस्की उद्योग की सुरक्षा, को सुनिश्चित करना और उसे बढ़ावा देना है। जैसे गलत जानकारी देने वालों और धोखेबाज़ ऑपरेटरों से सुरक्षा करना; इंडियन सिंगल माल्ट व्हिस्की कैटेगरी की विरासत, और प्रतिष्ठा को बरक़रार रखना; और इंडियन माल्ट व्हिस्की उद्योग की भारतीय कारीगरी, विरासत और “मेड इन इंडिया” ब्रांड्स को देश और दुनिया भर में बढ़ावा देना। यह सब निष्पक्ष, पारदर्शी और नैतिक विनियामक ढांचे, कानूनों और सर्वोच्च तकनीकी मानकों के द्वारा गुणवत्ता सुनिश्चित करके ही किया जा सकता है। ऐसा करने से कारोबार आसान होगा, दुनिया भर में उद्योग जगत की विश्वसनीयता बढ़ेगी और सभी हितधारकों, विनियामों, उद्योग जगत को लाभ होगा।
आईएमडब्ल्यूए एकजुट आवाज़ के रूप में काम करती है ताकि भारतीय माल्ट व्हिस्की को दुनिया भर में बेहतरीन गुणवत्ता और असली माल्ट व्हिस्की के रूप में पहचाना जाए। इसकी सदस्य कंपनियों में अमृत डिस्टिलरीज, जॉन डिस्टिलरीज, रैडिको खेतान, पिकाडिली एग्रो, डियाजियो और एल्कोब्रू शामिल हैं, जो एक साथ मिलकर भारत के माल्ट व्हिस्की रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा बनाती हैं।
आईएमडब्ल्यूए के नियमों के तहत इंडियन सिंगल माल्ट कहलाने के लिए, व्हिस्की को 100 फीसदी माल्टेड जौ, पानी और यीस्ट से बनाया जाना चाहिए; इसे एक ही भारतीय डिस्टिलरी में कॉपर पॉट स्टिल्स का इस्तेमाल करके मैश और डिस्टिल किया जाना चाहिए; और इसे अधिकतम 700 लीटर ओक के पीपों में कम से कम तीन साल तक मैच्योर (परिपक्व) किया जाना चाहिए। कॉलम स्टिल्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह मनमानी परिभाषा नहीं बल्कि वे नियम हैं जो व्हिस्की की गुणवत्ता बनाए रखते हैं।
उद्योग जगत की स्थितियों को देखते हुए आईएमडब्ल्यूए बिल्कुल सही समय पर आया है। यह उस विश्वसनीयता को सुनिश्चित करता है, जो इंडियन सिंगल माल्ट को दुनिया की बेहतरीन ड्रिंक्स स्थापित करने के लिए ज़रूरी है।




