
दिव्यराष्ट्र, नई दिल्ली: भारत की जेन जेड पीढ़ी यात्रा के पारंपरिक तौर-तरीकों को बदल रही है। साल में एक लंबी छुट्टी के बजाय, अब यह पीढ़ी अपनी पसंद और अचानक बनने वाले प्लान के अनुसार यात्राओं को तरजीह दे रही है। एयरबीएनबी की नई रिपोर्ट “नेवर द सेम: द न्यू रूल्स ऑफ जेन जेड ट्रेवल इन इंडिया” के अनुसार, जेन जेड के लिए यात्रा केवल घूमने-फिरने का साधन नहीं, बल्कि अपनी पहचान और व्यक्तित्व को अभिव्यक्त करने का माध्यम बन चुकी है।
एयरबीएनबी के भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कंट्री हेड अमनप्रीत बजाज ने कहा, “जेन जेड के लिए यात्रा जितनी नई जगहों और अनुभवों को खोजने का माध्यम है, उतनी ही खुद को अभिव्यक्त करने का भी जरिया है। यही बात उन्हें सबसे अधिक सोच-समझकर और उद्देश्यपूर्ण तरीके से यात्रा करने वाला यात्री वर्ग बनाती है। इस पीढ़ी की खासियत यह नहीं है कि वे कितनी बार यात्रा करते हैं, बल्कि यह है कि वे यात्रा क्यों करते हैं ताकि वे खुद को और बेहतर ढंग से महसूस कर सकें। एयरबीएनबी पर हम देख रहे हैं कि इस पीढ़ी के लिए यात्रा उनके जीवन के सबसे व्यक्तिगत फैसलों में से एक बन गई है। वे कहां जाते हैं, किसके साथ जाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण, कहां ठहरते हैं, इन सभी विकल्पों के जरिए वे अपनी पहचान व्यक्त करते हैं। एयरबीएनबी इसी बदलती सोच और यात्रा शैली के अनुरूप बना है। यह बदलाव भारत को नए नजरिए से देखने, समझने और खोजने के अवसरों का एक नया अध्याय खोल रहा है।”
साल में एक लंबी छुट्टी का चलन पड़ रहा फीका
कई दशकों तक भारतीयों के लिए छुट्टियों का मतलब साल में एक बड़ी यात्रा हुआ करता था, जिसकी योजना महीनों पहले बनाई जाती थी और जिसके लिए पहले से बचत की जाती थी। लेकिन जेन जेड ने इस परंपरागत सोच को पूरी तरह बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 7 जेन जेड यात्री साल में एक लंबी छुट्टी की बजाय तीन छोटी यात्राएं करना पसंद करते हैं, जबकि 87% एक सप्ताह से कम अवधि की यात्राओं को प्राथमिकता देते हैं। एयरबीएनबी के आंकड़े भी युवा भारतीयों की यात्रा संबंधी बदलती पसंद को दर्शाते हैं। गर्मियों के दौरान भारतीय जेन जेड द्वारा की गई खोजों में साल-दर-साल 30% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, 2 से 6 रातों की छोटी यात्राएं सबसे तेजी से बढ़ने वाला ट्रैवल फॉर्मेट बनकर उभरी हैं, जिनमें घरेलू यात्राओं के लिए लगभग 80% की बढ़ोतरी देखी गई है।
यात्रा अब इस पीढ़ी के लिए कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं रह गई है जिसकी योजना महीनों पहले बनाई जाए। इसके बजाय, यह तनाव से राहत पाने, अचानक मिले खाली वीकेंड का लाभ उठाने या किसी दोस्त के एक साधारण “चलो घूमने चलते हैं” कहने पर लिया गया सहज फैसला बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 66% जेन जेड यात्री यात्रा से कुछ दिन या कुछ सप्ताह पहले ही अपनी बुकिंग करते हैं, जबकि 67% का कहना है कि उनकी कोई भी दो यात्राएं एक जैसी नहीं रही हैं। यानी, साल में एक बार होने वाली छुट्टी का चलन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब वह कई छोटी, विविध और अधिक जीवंत यात्राओं के रूप में बदल गया है, जो हर बार एक नया अनुभव लेकर आती हैं।
यात्रा बन गई है पहचान की अभिव्यक्ति
भारत की जेन जेड पीढ़ी के लिए यात्रा अब अपनी पहचान और व्यक्तित्व को व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 87% युवाओं का मानना है कि उनका यात्रा करने का तरीका उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है, जबकि 92% के लिए यह महत्वपूर्ण है कि उनका गंतव्य या ठहरने की जगह उनकी व्यक्तिगत पसंद के अनुरूप हो, न कि केवल एक लोकप्रिय विकल्प हो। इसके अलावा, 95% जेन जेड चाहते हैं कि उनकी यात्रा व्यक्तिगत और अनोखी महसूस हो, न कि सामान्य या पहले से तय कार्यक्रम वाली। वहीं, 90% ऐसे स्थानों की तलाश करना पसंद करते हैं जिन्हें सोशल मीडिया या इंटरनेट पर व्यापक रूप से प्रचारित या वायरल नहीं किया गया हो। यह सोच उनके यात्रा अनुभवों को जीने के तरीके में भी दिखाई देती है। 80% युवाओं का कहना है कि यात्रा के दौरान बिताए गए छोटे-छोटे पल उनके लिए प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से अधिक मायने रखते हैं। यही वजह है कि वे किसी मशहूर पर्यटन स्थल की तुलना में स्थानीय बाजारों, पड़ोस की दुकानों और स्थानीय जीवनशैली को करीब से जानने में अधिक रुचि दिखाते हैं।
ठहरने की जगह ही बन रही है यात्रा का गंतव्य
रिपोर्ट के अनुसार, जेन जेड की यात्रा प्राथमिकताओं में सबसे बड़ा बदलाव ठहरने की जगह को लेकर देखने को मिला है। 63% जेन जेड यात्रियों ने किसी गंतव्य को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें वहां की ठहरने की जगह पसंद आई, न कि केवल उस गंतव्य की वजह से। इसके अलावा, 82% युवाओं का कहना है कि यात्रा की योजना बनाते समय ठहरने की जगह उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, जबकि 78% अपने कुल यात्रा समय का कम-से-कम आधा हिस्सा अपने ठहरने के स्थान पर बिताते हैं। आधे से अधिक यात्रियों का मानना है कि उनका ठहरने का अनुभव पूरी यात्रा को प्रभावित करता है या कई बार यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा बन जाता है। जेन जेड केवल पारंपरिक होटल सुविधाओं की सूची नहीं, बल्कि घर जैसा अनुभव तलाशती है। ऐसी छत जहां सुबह सुकून से बिताई जा सके, इतना स्थान जहां हर किसी को अपना निजी कोना मिल सके और ऐसा साझा स्पेस जहां दिनभर घूमने के बाद सभी साथ बैठकर वक्त बिता सकें। एयरबीएनबी के आंकड़े भी इस रुझान की पुष्टि करते हैं। हाल की यात्राओं की उनकी सबसे यादगार स्मृतियां किसी प्रसिद्ध पर्यटन स्थल से नहीं जुड़ी थीं, बल्कि घंटों चली बातचीत, सुकून भरी सुबहों और ठहरने की जगह पर मिलकर तैयार किए गए भोजन जैसे अनुभवों से जुड़ी थीं।
जेन जेड के लिए यात्रा: जुड़ाव और साथ बिताए समय का अनुभव
जेन जेड के लिए यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोगों के साथ जुड़ाव और रिश्तों को मजबूत करना है। उनके लिए गंतव्य महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्व उन लोगों का है जिनके साथ वे यात्रा करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 4 में से 3 जेन जेड यात्रियों का मानना है कि वे किसके साथ यात्रा कर रहे हैं, यह इस बात से अधिक महत्वपूर्ण है कि वे कहां जा रहे हैं। यात्रा की योजना बनाते समय उनके लिए सबसे पहले यात्रा साथी, फिर गंतव्य और उसके बाद अनुभव का स्थान आता है। दोस्तों के साथ यात्रा करना सबसे लोकप्रिय है, जबकि परिवार दूसरे स्थान पर है। समूह में यात्रा करने वाले आधे से अधिक युवा अलग-अलग होटल कमरों की बजाय एक साझा घर में ठहरना पसंद करते हैं। उनके लिए साझा रसोईघर, एक साथ बैठने का कमरा और वह छत या खुली जगह, जहां दिन के अंत में सभी फिर से एकत्रित होते हैं, यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से बन जाते हैं। यही वे स्थान हैं जहां असली यादें बनती हैं। यह बदलाव उनकी बुकिंग की आदतों में भी दिखाई देता है। एयरबीएनबी के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जेन जेड के बीच घरेलू समूह यात्राओं में साल-दर-साल लगभग 55% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो सबसे तेजी से बढ़ने वाली यात्रा श्रेणी है। समूह में यात्रा करने वाले युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता रोजमर्रा की भागदौड़ और व्यवधानों से दूर एक-दूसरे के साथ निर्बाध समय बिताना है। इसके बाद ऐसी यादें बनाना महत्वपूर्ण है, जिन्हें वे आने वाले वर्षों तक याद रखें और जिनके बारे में लंबे समय तक बातें करते रहें।
तय कार्यक्रम नहीं, सहज अनुभवों को तरजीह
जेन जेड यात्रियों के लिए कई बार कोई सख्त योजना न होना ही सबसे बड़ी योजना होती है। उनकी यात्राएं अब व्यस्त कार्यक्रमों और पहले से तय गतिविधियों से हटकर अधिक आरामदायक, खुली और स्वतःस्फूर्त अनुभवों की ओर बढ़ रही हैं, जहां आराम करने और नए अनुभवों को अपने तरीके से खोजने की पर्याप्त गुंजाइश हो। रिपोर्ट के अनुसार, 95% जेन जेड चाहते हैं कि उनकी यात्रा व्यक्तिगत और खास महसूस हो, जबकि 64% जानबूझकर अपनी यात्रा के कुछ हिस्सों को बिना योजना के छोड़ देते हैं ताकि वे नई चीजों को स्वयं खोज सकें। वहीं, हर तीन में से दो जेन जेड युवा केवल आराम करने, धीमी गति से समय बिताने या कहीं ठहरकर सुकून पाने के लिए भी यात्रा करते हैं। जहां तक यात्रा के दौरान पसंदीदा गतिविधियों का सवाल है, प्रकृति के करीब रहना और धीमी गति से यात्रा करना उनकी पहली पसंद है। इसके बाद स्थानीय भोजन और खानपान का अनुभव लेना तथा साहसिक गतिविधियां उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि 90% जेन जेड ऐसे स्थानों की तलाश करते हैं जो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हुए हों या जिन्हें ऑनलाइन व्यापक रूप से सुझाया न गया हो। यानी, उनके लिए एल्गोरिद्म नहीं, बल्कि अपनी जिज्ञासा और व्यक्तिगत रुचियां यात्रा का मार्गदर्शन करती हैं। जब उनसे पूछा गया कि एक अच्छी यात्रा उन्हें क्या देती है, तो जवाब बेहद सरल था—ऐसी यादें जो लंबे समय तक साथ रहें और पूरी आजादी का एहसास कराए।



