
(दिव्यराष्ट्र के लिए नरेंद्र सर्वोदयी)
जयपुर,/ प,.बंगाल मे पहले चरण की 152 सीट पर मतदान 93 प्रतिशत को क्रॉस कर गया। आजाद भारत के इतिहास मे इतनी वोटिंग किसी राज्य के विधान सभा या लोकसभा चुनाव मे हुई हो नही देखा है। पिछले विधानसभा चुनाव मे बंगाल मे 82 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। बंगाल के चुनाव मे मतदाता ध्रुवीकृत हो जाते हँ। यानि इस बार ग्यारह प्रतिशत अधिक मतदान हुआ है। ये अधिक मतदान ज्यादा हिंदू वोटर का हुआ है जिसका बड़ा हिस्सा बीजेपी को मिलता है। बंगाल मे करीब 28 परसेंट मुस्लिम वोटर हँ जबकि हिंदू वोटर 72 परसेंट हँ। वोटर ने 34 साल सरकार चलाने वाले वाम पंथी और 25 साल सरकार मे रहने वाली कांग्रेस को 2021 के चुनाव मे शून्य पर ला दिया है। वहीं कभी बंगाल मे तीन सीट वाली बीजेपी को 77 सीट पर पहुंचा दिया। मुस्लिम वोट एक मुश्त ममता की पार्टी टीएमसी को मिलता है उसमे विभाजन नही हुआ था। बीजेपी को केवल हिंदू वोट ही मिलते हँ। मुस्लिम बीजेपी के खिलाफ मजबूत प्रत्यासी को एकमुश्त वोट करता है। इस बार परिस्थिति बदली हुई हँ। मुस्लिम वोट मे भी कुछ विभाजन हो रहा है जिसका नुक्सान ममता को होगा। ओवेसी और हुमायु कबीर की पार्टी ममता को नुक्सान पहुंचा रही हँ। कांग्रेस भी सभी सीट पर चुनाव लड़ रही है और कुछ क्षेत्रों मे उसके उम्मीदवार दम खम से चुनाव लड़ रहे हँ खास कर मुस्लिम बहुल क्षेत्र मे। पहले चरण मे बीजेपी काफी मजबूत दिख रही है। अधिक मतदान सरकार विरोधी रुझान को भी दर्शा रहा है। हो सकता है sir के कारण भी अधिक मतदान हुआ हो लेकिन 2021 के मुकाबले 11 प्रतिशत अधिक वोटर का वोट देने निकलना ममता के लिए खतरे की घंटी माना जायेगा । यदि हम ये माने कि इसमें दो प्रतिशत मुस्लिम वोटर भी हो सकता है तब भी 9 प्रतिशत इसमें हिंदू वोटर है जो जीत हार मे बहुत अधिक होता है। फिर महिला सुरक्षा, हिंसा भ्रस्टाचार के मुद्दे हँ जो सरकार के गले की फांस बन गई हँ। ममता ने कुछ फ्री बीज की योजना चलाकर वोटर को लुभाने की कोशिश की है लेकिन सुरक्षा और हिंसा के मुद्दे भारी पड़ेंगे। लोग सोचते हँ कि पैसे तो जिंदा रहे तो कमा लेंगे लेकिन जब जिंदगी ही नही रही तो सारी धन संपदा रखी रह जायेगी। ममता सरकार मे हिंदुओ और उनके विरोधियों मे दहशत है। यही कारण है कि वोटर सरकार के खिलाफ बोलने से डरता है। कुछ राजनीतिक पंडित कहते हँ कि ममता के मुकाबले बीजेपी के पास कोई चेहरा नही है । यदि ममता इतनी बड़ी नेता हँ तो वो पिछली बार नंदी ग्राम मे सुवेंदु अधिकारी से खुद चुनाव कैसे हार गई। बंगाली वोटर को पता है कि बीजेपी जीती तो कोई बंगाली ही मुख्य मंत्री बनेगा मोदी नही। ये बात गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हँ। ममता का बाहरी और गुजराती का मुद्दा भी इस बार फुस्स हो गया है। शत्रुधन सिंहा, कीर्ति आजाद और युसुफ पठान को ममता ने सांसद का चुनाव लडाया है जो बंगाली नही हँ। युसुफ पठान को तो गुजरात से बुलाकर ममता ने सांसद का टिकट दिया है। कुल मिलकर अब दूसरे चरण की 148 सीट पर सबकी नजर है। ममता इस बार सबसे कठिन चुनावी लडाई लड़ रही हैं। अब सरकार कौन बनायेगा चार मई का इंतजार रहेगा।





