
रंगों की वॉरंटी’, जो इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे रंग घरों की पहचान बन जाते हैं।
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ भारत में घर के पते और दिशा-निर्देश हमेशा गली के नाम या पिन कोड पर आधारित नहीं होते, बल्कि वे अक्सर हमारी याददाश्त पर निर्भर करते हैं, जैसे ‘नीले घर के बाद बाएं मुड़ें’ या ‘लाल घर जहां हर त्योहार पर मेहमान आते हैं’। एक ऐसे देश में जहां हर जगह रंग ही रंग है, यहां घर का मतलब सिर्फ़ रंगी हुई दीवारें नहीं हैं, बल्कि ये कुछ ऐसे जाने-पहचाने निशान बन जाते हैं, जिन्हें लोग पहचानते हैं और जुड़ाव महसूस करते हैं।
रंग ही असली पता है’ के आइडिया के आधार पर एशियन पेंट्स ने अपना नया कैंपेन ‘रंगों की वॉरंटी’ पेश किया है, जो पिछले साल शुरू किए गए ‘एशियन पेंट्स की वॉरंटी, भारत का हर दूसरा घर कहता है’ की सोच को आगे बढ़ाता है।
यह कैंपेन दर्शाता है कि एशियन पेंट्स के लिए ‘वॉरंटी’ का क्या अर्थ है। यह केवल ज़्यादा समय तक टिकनेवाले पेंट के बारे में नहीं है, बल्कि उस वादे के बारे में भी है जो दीवारों से जुड़ी यादों और आत्मीयता को संजोय रखने की बात करता है।
इस कैंपेन के बारे में बात करते हुए, एशियन पेंट्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमित सिंगल ने कहा, “आठ दशकों से भी अधिक समय से, एशियन पेंट्स भारतीय घरों में रंग भर रहा है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उनकी पहचान का एक अभिन्न अंग बन गया है। हमारा मानना है कि हमारी वॉरंटी का वादा उन दीवारों में झलकता है जो न केवल मजबूत बनी रहती हैं, बल्कि जीवंत भी रहती हैं – जिनमें अपनापन है, साझा रीति-रिवाज़ है और वो यादें हैं जो समय के साथ और अधिक मूल्यवान होती जाती हैं।





