
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, मानद विश्वविद्यालय, जयपुर के सुश्रुत भवन स्थित शल्य विभाग में सुश्रुत जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम एवं शल्य तंत्र विभाग द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के कुलपति प्रो.संजीव शर्मा मुख्य अतिथि रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो.संजीव शर्मा ने कहा कि आचार्य सुश्रुत भारतीय चिकित्सा परंपरा के ऐसे महान आचार्य हैं, जिन्होंने शल्य चिकित्सा को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि सुश्रुत संहिता में वर्णित शल्य सिद्धांत, शल्य उपकरणों का विस्तृत विवरण तथा प्रशिक्षण की वैज्ञानिक पद्धति आज भी चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणास्रोत है। आचार्य सुश्रुत के सिद्धांत आधुनिक शल्य चिकित्सा की आधारशिला माने जाते हैं और आयुर्वेद के वैश्विक महत्व को स्थापित करते हैं।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद शल्य चिकित्सा के विकास में आचार्य सुश्रुत का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। आचार्य सुश्रुत को ‘शल्य चिकित्सा का पितामह’ कहा जाता है। उनके आदर्श आज भी चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों को उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा अनुसंधान के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में शल्य तंत्र विभाग से डॉ. अशोक कुमार, डॉ. सुमन शर्मा, डॉ. नरिंदर सिंह, डॉ. लोकेंद्र पहाड़िया डाॅ स्वराज पाल मेहरवाल, बी स्वप्ना, मनोरमा सिंह और राहुल शर्मा सहित शल्य तंत्र विभाग के सभी चिकित्सक, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने आचार्य सुश्रुत के आदर्शों का अनुसरण करते हुए उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा, अनुसंधान एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति समर्पित रहने का संकल्प लिया।





