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जैन आचार्य लोकेशजी,आलोक कुमारजी, इंद्रेश कुमारजी ने ‘सीता संवाद’ संगोष्ठी को संबोधित किया

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हिन्दू धर्म के साथ जैन धर्म में भी माँ सीता महासती के रूप में पूजनीय – जैन आचार्य लोकेश

आरामायण पर शोध से संतुलित समाज निर्माण संभव – डॉ आलोक कुमार

प्राचीन युग में नारी का समाज कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान – इंद्रेश कुमार*

नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र/ रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा मालवीय स्मृति भवन में आयोजित ‘सीता संवाद’ संगोष्ठी को अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेशजी, विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आलोक कुमारजी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमारजी एवं अनेक दिग्गजों ने संबोधित किया।

अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश जी ने इस अवसर पर अपने दीक्षा प्रदाता जैनाचार्य आचार्य तुलसीजी का जिक्र करते हुये कहा कि उनके द्वारा रचित अग्निपरीक्षा ग्रंथ का आरंभ माँ सीता की आरती से होता है| उन्होने बताया कि नित्य आराधना में जैन श्रावक श्राविकाएं जैन स्तुति के साथ साथ 16 महासतियों की आराधना करते है जिसमे माँ सीता भी शामिल है। आचार्यश्री ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल एक अद्भुत कार्य कर रहा है, इस शोध से समाज निर्माण को नए आयाम मिलेंगे।

डॉ आलोक कुमार ने कहा कि रामायण पर शोध एवं उसकी शिक्षा से संतुलित समाज का निर्माण संभव है। बच्चों एवं युवाओं के संस्कार निर्माण मे रामायण एवं विभिन्न धार्मिक ग्रंथ एक सेतु का काम करेंगे। इंद्रेश कुमार ने कहा कि प्राचीन युग में नारी के सम्मान के साथ साथ उनका समाज कल्याण मे महत्वपूर्ण योगदान था। जिस समाज में नारी का विकास होता है वही समाज विकसित है।

इस अवसर पर उपस्थित अनेक संतों ने अपने विचार व्यक्त करते मॉ सीता की जन्मस्थली में भव्य प्रतिमा व मन्दिर के निर्माण में सहयोग का संकल्प व्यक्त किया। आयोजकों ने इस अवसर पर सभी अतिथियों का उत्तरीय एवं मोमेंटों भेंट कर स्वागत किया।

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