जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ प्रेग्नेंसी के दौरान करवा चौथ का व्रत रखने से पहले महिला को अपनी और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत का ध्यान रखना चाहिए। डॉ. मितुल गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट – आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी कोकून हॉस्पिटल, जयपुर ने बताया कि इस दौरान लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर उन महिलाओं के लिए बिना पानी पिए व्रत रखना अधिक परेशानी पैदा कर सकता है, जिन्हें पहले से खून की कमी, डायबिटीज, हाई या लो ब्लड प्रेशर अथवा दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हैं। प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में उल्टी और जी मिचलाने की समस्या होने पर खाली पेट रहने से परेशानी बढ़ सकती है, जबकि आखिरी महीनों में शरीर को पर्याप्त पोषण और पानी की जरूरत होती है।
लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से मां की सेहत प्रभावित हो सकती है और गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में बच्चे की सेहत पर भी असर पड़ने का खतरा रहता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। यदि महिला व्रत रखना चाहती है, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार फैसला करे। डॉक्टर की अनुमति मिलने पर भी शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज न करें और पर्याप्त पानी, पौष्टिक भोजन तथा आराम को प्राथमिकता दें। व्रत के दौरान चक्कर, बहुत ज्यादा कमजोरी, घबराहट या बेहोशी जैसा महसूस होने पर तुरंत व्रत तोड़कर चिकित्सकीय सहायता लें। यह समझना जरूरी है कि मां और बच्चे की सेहत सबसे पहले है। धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए भी प्रेग्नेंसी में ऐसा कोई जोखिम नहीं लेना चाहिए, जिससे मां या गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत प्रभावित हो।