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होम क्रेडिट इंडिया की ओर से किए गए “द ग्रेट इंडियन वॉलेट” अध्ययन से वित्तीय कल्याण में बढ़ते आत्मविश्वास का पता चलता है

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नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र/ अग्रणी ग्लोबल कंज़्यूमर फ़ाइनैंस प्रोवाडर की स्थानीय शाखा, होम क्रेडिट इंडिया ने अपने इन-हाउस वार्षिक कंज़्यूमर सर्वे – द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी: प्रमुख फ़ाइनैंशियल पहलुओं के प्रति कंज़्यूमर का व्यवहार का दूसरा संस्करण जारी किया।

“ग्रेट इंडियन वॉलेट” का अध्ययन दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे, लखनऊ, जयपुर, भोपाल, पटना, रांची, चंडीगढ़, देहरादून, लुधियाना और कोच्चि सहित 17 शहरों में किया गया था। सेंपल साइज़ 18 -55 वर्ष के आयुवर्ग में लगभग 2500 था, जिसकी वार्षिक आय 2 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक की थी।

इसके परिणामों पर बोलते हुए, होम क्रेडिट इंडिया के चीफ़ मार्केटिंग ऑफ़िसर, आशीष तिवारी ने कहा: “”ग्रेट इंडियन वॉलेट” अध्ययन हमारे लिए दिशादर्शक के रूप में काम करता है, जो हमें हर साल कंज़्यूमर के फ़ाइनैंशियल व्यवहार के जटिल परिदृश्य के ज़रिए मार्गदर्शन करता है।मूलभूत व्यवहार संबंधी रुझानों पर गौर करके, हम घरेलू फ़ाइनैंशियल स्थिरता और फ़ाइनैंशियल ट्रांज़ैक्शन में टेक्नॉलॉजी से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्राप्त करते हैं। इस साल का अध्ययन मज़बूत आर्थिक विकास के कारण शहरी और अर्ध-शहरी कंज़्यूमर्स के बीच समग्र वित्तीय कल्याण में उछाल को दिखाता है, जो कंज़्यूमर भावनाओं, खर्च के पैटर्न और विभिन्न जनसांख्यिकी और खंडों के बीच बचत की आदतों में स्पष्ट अंतर्दृष्टि देता है।”

“ग्रेट इंडियन वॉलेट” अध्ययन के अनुसार, वर्तमान स्थिति और भविष्य की धारणा दोनों के संदर्भ में शहरी और अर्ध-शहरी कंज़्यूमर्स के बीच वित्तीय कल्याण सूचकांक में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई है। 52% कंज़्यूमर्स ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में उनकी आय में वृद्धि हुई है, जबकि 74% कंज़्यूमर्स को उम्मीद है कि आने वाले वर्ष तक उनकी आय में वृद्धि होगी। लगभग दो-तिहाई दावा करते हैं कि वे आनेवाले वर्ष में अधिक (66%) बचाने और अधिक (66%) इंवेस्ट करने में सक्षम होंगे। कंज़्यूमर्स भावना में यह उछाल अर्थव्यवस्था में वृद्धि, कमाई की क्षमता में वृद्धि और आय वृद्धि की सकारात्मक धारणा से प्रेरित है।

क्षेत्रवार, जयपुर में 2024 में औसत व्यक्तिगत मासिक आय 34 हजार रुपये है, जो 2023 में 31 हजार रुपये थी, जबकि स्थिर मासिक खर्च 16 हजार रुपये से बढ़कर 20 हजार रुपये हो गया है। इन बढ़ते खर्चों के बावजूद, 2024 में 73% उत्तरदाताओं ने बचत करने में सफलता पाई, जो बेंगलुरु के बाद सबसे अधिक है। जयपुर में आवश्यक मासिक खर्च मुख्य रूप से किराने (29%), यात्रा (20%), किराया (15%), बच्चों की शिक्षा (15%), चिकित्सा (7%), बिजली (8%), खाना पकाने की गैस (3%), और मोबाइल बिल (2%) पर होता है। वैकल्पिक खर्च के रुझान स्थानीय यात्रा और दर्शनीय स्थल (34%), बाहर खाना (19%), सिनेमा (12%), फिटनेस (3%), और ओटीटी ऐप्स (1%) पर होते हैं।

पिछले छह महीनों में, 60% लोगों ने कपड़े और एक्सेसरीज पर, 37% ने बाहरी यात्रा पर, 29% ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर, 15% ने घरेलू उपकरणों पर, और 11% ने होम डेकोर पर खर्च किया। वित्तीय सुरक्षा चिंताएं महत्वपूर्ण हैं, 79% लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी के बारे में जानते हैं, 27% इसके शिकार हुए हैं, और 53% को धोखाधड़ी वाले संचार प्राप्त होते हैं। 57% उत्तरदाताओं ने ‘यूपीआई पर क्रेडिट’ में रुचि दिखाई है, और 34% यूपीआई लाइट में रुचि रखते हैं, हालांकि 72% यूपीआई सेवा चार्जेबल होने पर इसका उपयोग बंद कर देंगे।

इस बीच, राष्ट्रीय स्तर पर, इस अध्ययन से पता चलता है कि 2024 में व्यक्तिगत मासिक आय का औसत मेट्रो के लिए 35 हज़ार और टियर 1 और 2 शहरों के लिए 32 हज़ार है, जो 2023 में 33 हज़ार (मेट्रो), 30 हज़ार (टियर 1) और 27 हज़ार (टियर 2) से ज़्यादा है। मेट्रो और टियर 1 शहरों में, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे प्रमुख केंद्र के रूप में उभरे हैं, जो तरक्की चाहने वाले कंज़्यूमर्स के लिए नई और बेहतर संभावनाएँ मुहैया करवाते हैं। इन शहरों में आय के स्तर में वृद्धि देखी गई है,

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