
15 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचा कार्यक्रम, 1,800 से ज्यादा आइडिया पर हुआ काम
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने विद्यार्थियों को नए विचार सोचने, अपने आसपास की समस्याओं को समझने, उनके समाधान खोजने और अपने आइडिया को आगे बढ़ाने का अवसर देने के लिए एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (ईडीपी) के लिए ₹2 करोड़ का प्रावधान किया है। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को अपना कारोबार शुरू करने के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसी सोच और कौशल देना है, जो पढ़ाई के बाद किसी भी क्षेत्र में उनके काम आए।
एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलता है कि किसी समस्या को कैसे पहचाना जाए, उसके लिए नया समाधान कैसे सोचा जाए और अपने विचार को लोगों के सामने कैसे रखा जाए। कार्यक्रम में समस्या समाधान, रचनात्मक सोच, निर्णय लेने, संवाद, टीम के साथ काम करने और जिम्मेदारी लेने जैसे कौशल पर भी ध्यान दिया जाता है।
सिर्फ कारोबार शुरू करना नहीं, समस्या का समाधान सीखना है
आमतौर पर उद्यमिता को अपना कारोबार या कंपनी शुरू करने से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी का एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम विद्यार्थियों को इससे आगे की सोच देता है।
विद्यार्थियों को सिखाया जाता है कि वे अपने आसपास की समस्याओं को पहचानें, उनके बारे में नए तरीके से सोचें और ऐसा समाधान खोजें, जो लोगों के लिए उपयोगी हो। अपनी बात को सही तरीके से रखना, टीम के साथ काम करना, निर्णय लेना और किसी काम की जिम्मेदारी लेना भी इसी सीख का हिस्सा है।
यह सोच केवल अपना कारोबार शुरू करने में ही काम नहीं आती। विद्यार्थी आगे चलकर किसी कंपनी में काम करें या किसी दूसरे क्षेत्र में जाएं, समस्या को समझकर उसका समाधान खोजने की क्षमता उनके लिए हमेशा उपयोगी रहती है।
हर विद्यार्थी की पढ़ाई का हिस्सा है ईडीपी
जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम केवल उन विद्यार्थियों के लिए नहीं है, जो आगे चलकर अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं। यह सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य क्रेडिट आधारित विषय है और विश्वविद्यालय के सभी 11 स्कूलों में लागू किया गया है।
इससे अलग-अलग विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को नए विचारों पर काम करने और अपनी सोच को सामने रखने का समान अवसर मिलता है।
किताबों से आगे, करके सीखने का मौका
एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम में केवल कक्षा की पढ़ाई और लिखित परीक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता। यहां विद्यार्थियों को खुद काम करके सीखने का अवसर मिलता है।
विद्यार्थी अपने आसपास की किसी समस्या को चुनते हैं। इसके बाद वे सोचते हैं कि इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है और उस समाधान को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है। इसके बाद वे अपने विचार को तैयार कर उसकी प्रस्तुति देते हैं।
कार्यक्रम में पारंपरिक लिखित परीक्षा नहीं होती। विद्यार्थियों के विचार, समस्या को समझने की क्षमता, समाधान की सोच और अपनी बात को प्रभावी तरीके से रखने की क्षमता को देखा जाता है।
इस तरह विद्यार्थियों को केवल आइडिया सोचने का नहीं, बल्कि उस पर काम करने और उसे लोगों के सामने रखने का भी अनुभव मिलता है।
450 से अधिक विशेषज्ञों से सीधे सीख रहे विद्यार्थी
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को उद्योग जगत के विशेषज्ञों से सीधे जुड़ने का अवसर भी मिलता है। अब तक 450 से अधिक विशेषज्ञ और अतिथि वक्ता विद्यार्थियों के साथ संवाद कर चुके हैं।
इनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, क्वालकॉम, लिंक्डइन, मेटा और रिलायंस जैसी प्रमुख कंपनियों से जुड़े विशेषज्ञों के साथ-साथ शार्क टैंक से जुड़े संस्थापक भी शामिल रहे हैं।
इन संवादों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का मौका मिलता है कि कंपनियां कैसे काम करती हैं, नए उत्पाद और सेवाएं कैसे तैयार होती हैं, कारोबार को कैसे आगे बढ़ाया जाता है और उद्योग जगत युवा प्रतिभाओं से क्या उम्मीद करता है।
तीन साल में 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचा कार्यक्रम
एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम ने पिछले तीन वर्षों में 15,000 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई है। इस दौरान विद्यार्थियों ने 1,800 से अधिक आइडिया तैयार किए हैं।
अलग-अलग विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों ने अपने आसपास की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के बारे में सोचा और अपने विचार सामने रखे। इससे विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी भी अच्छे विचार की शुरुआत एक छोटी-सी समस्या को पहचानने से हो सकती है।
अच्छे आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए जेईसीआरसी इनक्यूबेशन सेंटर का साथ
विद्यार्थियों के अच्छे आइडिया केवल कक्षा या प्रस्तुति तक सीमित न रहें, इसके लिए जेईसीआरसी इनक्यूबेशन सेंटर उन्हें आगे बढ़ाने में सहयोग करता है।
जेईसीआरसी इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से अब तक 108 स्टार्टअप को इनक्यूबेट किया जा चुका है। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत स्टार्टअप राजस्व अर्जित कर रहे हैं।
जेईसीआरसी के व्यापक स्टार्टअप इकोसिस्टम को ₹27 करोड़ से अधिक की ग्रांट और फंडिंग प्राप्त हो चुकी है।
इसके अलावा विद्यार्थियों के अच्छे आइडिया को शुरुआती स्तर पर मदद देने के लिए ₹10 लाख का आंतरिक फंड भी बनाया गया है। पिछले तीन वर्षों में एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के अलग-अलग चरणों से चुने गए बेहतर आइडिया को इस फंड के माध्यम से सहयोग दिया गया है।
धीमंत अग्रवाल: हर विद्यार्थी की सोच को सही मंच देना जरूरी
धीमंत अग्रवाल, हेड–डिजिटल स्ट्रेटेजीज, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने कहा, “हम चाहते हैं कि विद्यार्थियों के लिए एंटरप्रेन्योरशिप केवल एक विषय न रहे, बल्कि उनकी सोच का हिस्सा बने। हर विद्यार्थी के पास कोई न कोई नया विचार होता है। एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम उन्हें उस विचार को पहचानने, उस पर काम करने और उसे लोगों के सामने रखने का अवसर देता है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी केवल नौकरी के लिए तैयार न हों, बल्कि समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने की क्षमता भी विकसित करें। एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए ₹2 करोड़ का प्रावधान इसी सोच को और मजबूत करेगा।”
कोमल जोशी: अच्छे आइडिया को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए
कोमल जोशी, हेड–जेईसीआरसी इनक्यूबेशन सेंटर ने कहा, “किसी विद्यार्थी का अच्छा आइडिया केवल कक्षा या प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमारा प्रयास है कि सही आइडिया को आगे बढ़ने के लिए जरूरी मार्गदर्शन, सहयोग और अवसर मिले। एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम से सामने आने वाले बेहतर विचारों को जेईसीआरसी इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है। हमारा लक्ष्य है कि विद्यार्थी अपने विचार को एक वास्तविक समाधान और आगे चलकर एक सफल कारोबार में बदलने की दिशा में कदम बढ़ा सकें।”
एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी का प्रयास है कि विद्यार्थी केवल पढ़ाई पूरी करके नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि समस्याओं को पहचानें, नए विचार सोचें, समाधान तैयार करें और अपने विचारों को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास विकसित करें। यही सोच उन्हें भविष्य के लिए अधिक तैयार और सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






