पटाखों से घायल बच्चों को मिलेगी तुरंत मदद एएसजी हॉस्पिटल
मुंबई, दिव्यराष्ट्र: एएसजी हॉस्पिटल लिमिटेड ने त्योहारी सीजन के लिए बच्चों की आंखों की सुरक्षा से जुड़ी एक पहल ‘सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दिवाली ‘ शुरू की है। इस पहल के तहत, पटाखों से संबंधित आंखों की चोटों से पीड़ित 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कंपनी के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के अंतर्गत एएसजी आई हॉस्पिटल में इलाज मिलेगा। यह पहल 4 नवंबर 2026 से 14 नवंबर 2026 तक 95+ शहरों में 200+ एएसजी आई हॉस्पिटल केंद्रों पर चलेगी। इस अभियान का एक सरल संदेश है – ज़िम्मेदारी से जश्न मनाएं और हर बच्चे की आँखों की चमक को सुरक्षित रखें। इस पहल के तहत मिलने वाले इलाज में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), आँखों की आपातकालीन देखभाल, दवाइयाँ और ज़रूरत पड़ने पर सर्जरी शामिल है। परिवार वाले मार्गदर्शन पाने और अपने नजदीकी केंद्र की जानकारी लेने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 1211 804 पर कॉल कर सकते हैं।
हर दिवाली पर पटाखों के कारण आंखों में लगने वाली चोट के मामले बढ़ जाते हैं, और इन मामलों में बच्चों की हिस्सेदारी बहुत बड़ी होती है। कॉर्निया यानी आंख की पुतली और आंख के सामने के अन्य हिस्सों में चोट लगना सबसे आम समस्याओं में से है, और यदि किसी नेत्र विशेषज्ञ द्वारा इसका तुरंत इलाज न किया जाए, तो इनमें से कुछ चोटें दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं। चोट लगने के बाद के शुरुआती कुछ घंटे अक्सर यह तय करते हैं कि आंख कितनी अच्छी तरह ठीक हो पाएगी। पिछले साल दिवाली के दौरान, एएसजी केंद्रों पर पटाखों से आंख झुलसने वाले 500 से अधिक बच्चों का इलाज किया गया था।
एएसजी आई हॉस्पिटल के ग्रुप सीओओ, डॉ. विकास जैन ने कहा, “बच्चों में पटाखों से होने वाली आंखों की ज्यादातर चोटों से बचाव संभव है। लेकिन अगर ऐसी कोई घटना होती है, तो बच्चे को कितनी जल्दी विशेषज्ञ के पास पहुंचाया जाता है, यह बहुत मायने रखता है। त्योहारों के इस व्यस्त समय में देश भर में हमारे सेंटर्स पर आंखों की चोट से जुड़े मामलों के इलाज के लिए जरूरी व्यवस्था की गई है। हम परिवारों से अपील करते हैं कि वे घरेलू उपचार न करें और बच्चे की आंख में चोट लगने पर तुरंत हमारी हेल्पलाइन पर संपर्क करें।”
दिवाली में परिवारों को पांच सरल सावधानियों का पालन करें*
1. सुरक्षित दूरी बनाए रखें: पटाखों को हाथ की पूरी दूरी से जलाएं, इसके लिए लंबी अगरबत्ती का उपयोग करना बेहतर रहेगा, और पटाखे जलाते ही तुरंत पीछे हट जाएं। 2. सुरक्षात्मक चश्मा पहनें: बच्चों और पटाखे जलाने वाले वयस्कों को सुरक्षात्मक चश्मा (आईवियर) जरूर पहनना चाहिए। 3. बच्चों पर निगरानी रखें: बच्चों को केवल किसी वयस्क की देखरेख में ही पटाखे जलाने चाहिए। 4. पटाखों के ऊपर कभी न झुकें: पटाखा जलाते समय उसके ऊपर न झुकें और जो पटाखा न चला हो, उसके पास कभी वापस न जाएं। 5. चोटिल आंख को कभी न रगड़ें: आंख रगड़ने से बारीक कण अंदर धंस सकते हैं और चोट अधिक गंभीर हो सकती है।
चोट लगने की स्थिति में, बच्चे को शांत रखें और दोनों आंखों को जितना हो सके स्थिर रखें। आंख को रगड़ें या दबाएं नहीं और न ही उसमें फंसी किसी चीज को निकालने का प्रयास करें। आंख को पानी की तेज धार से न धोएं, और न ही काजल, मलहम, ड्रॉप्स या कोई घरेलू उपाय आज़माएं। बिना कोई दबाव डाले आंख को किसी साफ शील्ड से हल्के से ढकें। हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें और बच्चे को तुरंत निकटतम एएसजी आई हॉस्पिटल केंद्र या आई इमरजेंसी सर्विस में ले जाएं।