
जेईसीआरसी फाउंडेशन, जयपुर बना संस्कृति और नवाचार का केंद्र – रेनेसाँ प्रथम दिवस
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ रेनेसाँ 2026 के प्रथम दिवस की शुरुआत अत्यंत उत्साह और ऊर्जा के साथ भव्य उद्घाटन समारोह से हुई। उद्घाटन समारोह में राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता मनमोहक कालबेलिया प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित सभी दर्शकों का मन मोह लिया। इस वर्ष रेनेसां की थीम “देसी पॉप” रही, जिसमें ‘देसी’ की झलक पारंपरिक लोक नृत्य के माध्यम से दिखाई दी, वहीं ‘इंडी पॉप’ की ऊर्जा को दर्शाने के लिए बुलिट्स बैंड ने शानदार प्रस्तुति दी।
ढोल-नगाड़ों की गूंज और उत्साहित विद्यार्थियों के जोशपूर्ण नृत्य ने वातावरण को और भी जीवंत बना दिया। पूरे परिसर में उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिला। रेनेसां के पहले दिन का यह शुभारंभ सभी के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
रेनेसाँ के प्रथम दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यशालाओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मोलेला टेराकोटा में ललित जी ने पारंपरिक मिट्टी कला का अनुभव साझा किया, जबकि राजस्थानी पगड़ी सत्र में मोहम्मद शकील साहब ने अपनी पीढ़ियों से चली आ रही विरासत की जानकारी दी। रावणहत्था प्रस्तुति में मोहन जी, पवन जी और रामजी लाल जी ने लोक संगीत से वातावरण को सुरमय बनाया और अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों का उल्लेख किया। साथ ही फड़ चित्रकला में पाबूजी राठौर व देव नारायण जी की जीवनगाथा दर्शाई गई, तथा कठपुतली मेकिंग में मनोज जी ने अपने खानदानी हुनर और विदेशों में किए गए शो साझा किए। इन सभी सत्रों ने मिलकर रेनेसाँ के प्रथम दिवस को सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बना दिया।
प्रथम दिवस पर तकनीकी उत्साह भी देखने को मिला, जब हमारे कॉलेज के क्लब आईईईई द्वारा आईईईई नेशनल प्रोजेक्ट एग्ज़ीबिशन का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में अनेक नवाचारपूर्ण हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता और रचनात्मक सोच को प्रदर्शित किया।
इस आयोजन में विभिन्न राज्यों से टीमें सम्मिलित हुईं, जिनमें लुधियाना और मध्य प्रदेश से आई टीमें भी शामिल थीं। प्रदर्शित प्रमुख परियोजनाओं में एयर रेवोल्यूशनरीज, आरगोस तथा काइनेटिक्स विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इन परियोजनाओं में सेंसर आधारित हैंड वर्किंग सिस्टम का प्रदर्शन किया गया, जिसमें हाथों की गतिविधियों को सेंसर की सहायता से नियंत्रित एवं संचालित किया जाता है।
इस प्रदर्शनी ने तकनीक और नवाचार के प्रति विद्यार्थियों की रुचि को बढ़ावा दिया तथा यह सिद्ध किया कि रेनेसां केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि तकनीकी प्रतिभाओं का भी सशक्त मंच है।
इसके साथ ही सोमवार से तीन दिनों तक कॉलेज परिसर में अतरंगी चौक का भी आयोजन किया गया। इस विशेष चौक को अतरंगी क्लब के सदस्यों द्वारा सजाया और संचालित किया गया, जहाँ उन्होंने अपनी मेहनत और रचनात्मकता से तैयार की गई हैंडमेड वस्तुएँ प्रदर्शित एवं विक्रय हेतु रखीं। इन वस्तुओं में की-चेन, फ्रिज मैग्नेट, बुकमार्क्स, ईयररिंग्स और ब्रेसलेट्स जैसी आकर्षक एवं रंग-बिरंगी कलाकृतियाँ शामिल थीं।
स्टॉल्स पर सजी इन सुंदर हस्तनिर्मित वस्तुओं ने विद्यार्थियों और आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। अतरंगी क्लब के सदस्यों के प्रयासों और सृजनात्मकता ने इस चौक को रेनेसां के प्रथम दिवस का एक जीवंत और रंगीन आकर्षण बना दिया।
रेनेसाँ के प्रथम दिवस की शुरुआत प्रातः 9 बजे ए-ब्लॉक में भव्य उद्घाटन समारोह के साथ हुई।
दिनभर विभिन्न प्रतियोगिताएँ और गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें सिचुएशनल क्यू, फिल्म फ्लिक, बीट द बीट्स, 3-डी मेनिया, टेकप्रोब, स्प्रिंट, प्रोग्रामर्स प्लेग्राउंड, गली क्रिकेट, स्टेज प्ले, टग ऑफ वॉर, चेस, लैन गेमिंग, रोबो वॉर तथा नेशनल प्रोजेक्ट एक्सपो प्रमुख रहीं।
सिचुएशनल क्यू में प्रतिभागियों की त्वरित सोच और निर्णय क्षमता की परीक्षा हुई, वहीं फिल्म फ्लिक में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता को शोर्ट फिल्मों के माध्यम से प्रस्तुत किया। बीट द बीट्स ने संगीत प्रेमियों को मंच प्रदान किया, जबकि 3-डी मेनिया और टेकप्रोब में तकनीकी कौशल और नवाचार की झलक देखने को मिली।
प्रोग्रामर्स प्लेग्राउंड और लैन गेमिंग ने टेक-एंथुज़ियास्ट्स के बीच रोमांचक प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाया, वहीं रोबो वॉर में रोबोटिक्स की शक्ति और रणनीति का शानदार प्रदर्शन हुआ।
खेल गतिविधियों में स्प्रिंट, गली क्रिकेट, टग ऑफ वॉर और चेस ने जोश और खेलभावना को बढ़ावा दिया, जबकि स्टेज प्ले ने दर्शकों को अभिनय और अभिव्यक्ति का प्रभावशाली अनुभव कराया।
संगीत प्रतियोगिता रॉकाथॉन के निर्णायक प्रसिद्ध गायक जयेश शर्मा और आर्यन शर्मा रहे। वहीं डीजे वॉर में युवाओं की ऊर्जा चरम पर रही, जिसके जज डीजे आर. आई. बी रहे।
इस प्रकार रेनेसाँ का प्रथम दिवस सांस्कृतिक, तकनीकी और खेल गतिविधियों के अद्भुत संगम के साथ उत्साह, रचनात्मकता और प्रतिस्पर्धा से परिपूर्ण रहा।





