
जयपुर, 27 नवंबर:/ पूर्णिमा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में गुरुवार को ‘सतत विकास के लिए गणितीय जीव विज्ञान और पारिस्थितिकी’ विषय पर तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। एआईसीटीई-वाइब्रेंट एडवोकेसी फॉर एडवांसमेंट एंड न्यूचरिंग ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज इंस्टीट्यूशन (वाणी) प्रायोजित यह कॉन्फ्रेंस आनंद इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सहयोग से हिंदी भाषा में आयोजित की जा रही है।
डॉ. रितेश ऑर्थोपेडिक्स एंड ट्रॉमा सेंटर, जयपुर के निदेशक डॉ. रितेश अग्रवाल उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर सीएसआईआर–नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी, नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कांत सिंह और एमटीटीएफ के अध्यक्ष डॉ. मेहर चंद उपस्थित रहे। पूर्णिमा ग्रुप के डायरेक्टर आर्किटेक्ट राहुल सिंघी और मेजबान पीसीई के वाइस प्रिंसिपल डॉ. पंकज ढेमला ने सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया। कॉन्फ्रेंस की समन्वयक प्रो. शिल्पी जैन ने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस एआईसीटीई–वाणी पहल के तहत हिंदी भाषा में आयोजित की जा रही है। यह आयोजन शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने तथा उच्च शिक्षा के नए आयाम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
डॉ. अरुण कांत सिंह ने क्षेत्रीय भाषा में ऐसे शैक्षणिक आयोजनों को एआईसीटीई–वाणी की सराहनीय पहल बताया। डॉ. रितेश अग्रवाल ने शोध एवं तकनीकी उन्नति के लिए ऐसे कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान बीमारी के फैलाव को समझने, ट्रेंड्स का अनुमान लगाने और सोच-समझकर फैसले लेने में मैथमेटिकल मॉडलिंग ने अहम भूमिका निभाई थी।
डॉ. पंकज ढेमला ने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस गणितीय जीव विज्ञान और सतत विकास हेतु पारिस्थितिकी के क्षेत्र में इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों की समझ को विस्तार देने का महत्वपूर्ण प्रयास है।आर्किटेक्ट राहुल सिंघी ने रिसर्च व इनोवेशन को बढ़ावा देने में पूर्णिमा ग्रुप की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि एआईसीटीई–वाणी कॉन्फ्रेंस इसी विजन व मिशन का एक हिस्सा है। अंत में डॉ. मयंक गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।





