
दिव्यराष्ट्र, मुंबई: पीएल वेल्थ के नवीनतम बाजार परिदृश्य के अनुसार भारत की घरेलू आर्थिक विकास गति मजबूत बनी हुई है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की वापसी और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आय सत्र की सकारात्मक शुरुआत से बाजार को समर्थन मिल रहा है। हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अल नीनो की स्थिति मजबूत होने की आशंका और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकती है। ऐसे में इक्विटी में सोच-समझकर निवेश करने और नियमित आय अर्जित करने पर केंद्रित निश्चित आय वाली ऋण रणनीतियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
पीएल वेल्थ के सीईओ इंदरबीर जॉली ने आर्थिक परिदृश्य पर बात करते हुए कहा भारत की मजबूत आर्थिक विकास गति और विदेशी निवेशकों की वापसी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मानसून से जुड़े जोखिम और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निवेश के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। हमारा मानना है कि निवेशकों को सोच-समझकर विकल्प चुनने चाहिए गुणवत्तापूर्ण निवेश पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में चरणबद्ध तरीके से पूंजी आवंटित करनी चाहिए। भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर हमारा भरोसा कायम है। घरेलू पूंजीगत व्यय वित्तीय क्षेत्र का विस्तार अनुकूल जनसांख्यिकीय परिस्थितियां और संरचनात्मक विकास के अवसर इस भरोसे को मजबूती प्रदान करते हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7.8प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि को निवेश में आई तेजी से समर्थन मिला, क्योंकि सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 11.9प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.7प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। औद्योगिक गतिविधियां भी मजबूत रहीं। विनिर्माण क्षेत्र में 9.2प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 10.0प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, जुलाई 2026 तक गैर-खाद्य बैंक ऋण में साल-दर-साल 19.1प्रतिशत की वृद्धि हुई।
इसके बावजूद, मुद्रास्फीति चिंता का एक प्रमुख विषय बनी हुई है। जुलाई 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 4.45प्रतिशत रही, जबकि खाद्य मुद्रास्फीति 5.52प्रतिशत दर्ज की गई। मानसूनी बारिश में कमी और अल नीनो की स्थिति मजबूत होने की आशंका से मुद्रास्फीति अनुमान से अधिक बढ़ने का जोखिम भी है। 26 अगस्त 2026 तक देश में संचयी मानसूनी वर्षा सामान्य स्तर से 13प्रतिशत कम थी, जबकि खरीफ फसलों की बुवाई सामान्य स्तर से 2प्रतिशत पीछे थी। इसके अतिरिक्त, अगस्त 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 90–93 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रही। इन परिस्थितियों को देखते हुए, पीएल वेल्थ ने कच्चे तेल की कीमतों और मानसून की प्रगति के आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी या चौथी तिमाही में नीतिगत ब्याज दरों में 25 से 50 आधार अंकों की वृद्धि की संभावना की ओर संकेत किया है।





