जयपुर , दिव्यराष्ट्र:/ अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया अब भी भारत से विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले अधिकांश छात्रों की पहली पसंद बने हुए हैं। हालांकि, बढ़ती शिक्षा लागत और सख्त वीजा नियमों के कारण यह पारंपरिक रुझान अब बदलने लगा है। भारतीय छात्रों का रुझान अब आयरलैंड, फ्रांस, नीदरलैंड और जर्मनी जैसे उभरते शिक्षा गंतव्यों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
पिछले पांच सालों में जर्मनी में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2020 मे 28,905 से बढ़कर शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में 59,419 हो गई है। इसके साथ ही भारत, चीन को पीछे छोड़कर जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत देश बन गया है, जबकि तुर्की तीसरे स्थान पर है।
ऑक्सिलो फिनसर्व की चीफ बिजनेस ऑफिसर (ग्लोबलएड) श्वेता गुरु ने बताया, “इंस्टीट्यूट फॉर एम्प्लॉयमेंट रिसर्च के अनुसार, वर्ष 2035 तक जर्मनी को लगभग 70 लाख (7 मिलियन) स्किल्ड कर्मचारियों कीआवश्यकता होगी।”
भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी का सबसे बड़ा आकर्षण कम लागत वाली शिक्षा है। लीप स्कॉलर द्वारा साल 2025 में तीन मिलियन से अधिक छात्र इंटरैक्शन पर किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत छात्रों ने शिक्षा की लागत और वहनीयता को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया। इसके बाद 70 प्रतिशत छात्रों ने छात्रवृत्ति और 58 प्रतिशत ने बेहतर करियर अवसरों को प्राथमिकता दी। दिलचस्प बात यह है कि विश्वविद्यालयों की रैंकिंग शीर्ष पांच प्राथमिकताओं में भी शामिल नहीं थी।