
130 से अधिक डॉक्टर और विशेषज्ञ हुए शामिल
ग्रेटर नोएडा, दिव्यराष्ट्र:/ नोएडा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (निम्स) कॉलेज एंड हॉस्पिटल ने थल केयर समिट 2026 सीएमई का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का विषय था “थैलेसीमिया: पहचान और इलाज में चुनौतियां”। इस सम्मेलन में देशभर से 130 से अधिक डॉक्टर, मेडिकल विशेषज्ञ, शिक्षक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य थैलेसीमिया के बारे में जागरूकता बढ़ाना, बीमारी की सही पहचान और इलाज के नए तरीकों पर चर्चा करना था।
यह कार्यक्रम निम्स के बाल रोग विभाग और पैथोलॉजी विभाग द्वारा मिलकर आयोजित किया गया। आयोजन समिति में डॉ. (कर्नल) अरुण चौधरी और डॉ. अमित मोदी आयोजन अध्यक्ष रहे, जबकि डॉ. वर्तिका गुप्ता और डॉ. अविनाश झा आयोजन सचिव की भूमिका में रहे।
इस सम्मेलन का आयोजन नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. देवेश कुमार सिंह, चांसलर डॉ. विक्रम सिंह और निम्स के डायरेक्टर डॉ. एस. एन. गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. (ब्रिगेडियर) रंजीत घुलियानी (मेडिकल सुपरिटेंडेंट) और डॉ. मनीषा जिंदल (डीन) रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. (कर्नल) अरुण चौधरी के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी की समय पर पहचान और सही इलाज के महत्व पर जोर दिया। वहीं डॉ. अमित मोदी ने चिकित्सा शिक्षा, रिसर्च और डॉक्टरों के बीच सहयोग को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी बताया।
डॉ. अविनाश झा ने बताया कि यह थल केयर समिट का पहला संस्करण था, जिसमें 130 से अधिक डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में 5 विशेषज्ञ सत्र और 2 पैनल चर्चा आयोजित की गईं, जिनमें थैलेसीमिया की जांच, इलाज और देखभाल से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा हुई। जागरूकता बढ़ाने के लिए क्विज, रील मेकिंग, रंगोली और पोस्टर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आर. के. गुप्ता, प्रोफेसर एवं डायरेक्टर, गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में थैलेसीमिया जैसे विषय पर इस तरह का कार्यक्रम बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों और फैकल्टी द्वारा विश्व थैलेसीमिया दिवस पर दी गई विशेष प्रस्तुति की भी प्रशंसा की।
इस अवसर पर डॉ. विक्रम सिंह ने कहा कि एनआईयू और निम्स चिकित्सा शिक्षा, रिसर्च और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार ऐसे मंच तैयार कर रहे हैं, जिससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सीखने और विचार साझा करने का मौका मिले।
डॉ. एस. एन. गुप्ता ने कहा कि थैलेसीमिया आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है और ऐसे कार्यक्रमों से बीमारी की जल्दी पहचान और बेहतर इलाज को बढ़ावा मिलेगा।
सम्मेलन में डॉ. नीता राधाकृष्णन, डॉ. ज्योत्सना मदान, डॉ. मुकेश ढांकर और डॉ. (कर्नल) ज्योति कोटवाल समेत कई प्रसिद्ध विशेषज्ञ शामिल हुए।
साथ ही, निम्स ने हाल ही में थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिन संबंधी बीमारियों की जांच के लिए आधुनिक एचपीएलसी मशीन भी शुरू की है, जिससे मरीजों की स्क्रीनिंग, जल्दी पहचान और बेहतर इलाज में मदद मिलेगी।





