गहलोत के विश्वस्त डांगी, संसद में सोनिया, राहुल और खड़गे के भी नजदीक
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ कांग्रेस ने अपनी संसदीय रणनीति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यसभा सांसद नीरज डांगी को राज्यसभा में पार्टी का सचेतक (व्हिप) नियुक्त किया है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर डांगी को संसद में बेहतर समन्वय और रणनीतिक प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। नई जिम्मेदारी के तहत नीरज डांगी राज्यसभा में कांग्रेस सांसदों के बीच तालमेल बनाए रखने, सदन में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने और पार्टी की रणनीति के अनुसार मतदान कराने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही वह राज्यसभा में पार्टी से जुड़े विभिन्न संसदीय कार्यों के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। डांगी ने इस नई जिम्मेदारी के लिए कांग्रेस नेतृत्व का आभार जताया है।
क्यों बनाया गया राज्यसभा में कांग्रेस का व्हिप?*
राजस्थान कांग्रेस में नीरज डांगी को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सबसे भरोसेमंद और करीबी सहयोगियों में गिना जाता है। नई दिल्ली में डांगी अब राहुल गांधी एवं सोनिया गांधी सहित कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के के भी बेहद करीबी हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि लंबे समय से कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहते हुए डांगी ने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, इसीलिए उन पर पार्टी ने इतना बड़ा भरोसा किया है। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि पार्टी संगठन में सांसद नीरज डांगी की सक्रिय भूमिका और नेतृत्व क्षमता के चलते उन्हें पहले भी कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं, लेकिन लगातार दूसरी बार राज्यसभा में भेजा जाना नेतृत्व के उन पर भरोसे का परिणाम है। परिहार कहते हैं कि अब उन्हें राज्यसभा में कांग्रेस का व्हिप भी बनाया गया है, जिससे संसद में पार्टी की रणनीति को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कांग्रेस मामलों के जानकार वरिष्ठ राजनीतिक पर्यवेक्षक संदीप सोनवलकर कहते हैं कि युवाओं को कांग्रेस में जिम्मेदारियों से जोड़ने और संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने में डांगी की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। कांग्रेस संसदीय दल की ओर से जारी आदेश में 6 अगस्त को डांगी की यह नियुक्ति की गई है।
राजस्थान युवा कांग्रेस में क्या भूमिका निभाई?*
जयपुर में 4 नवंबर 1970 को जन्मे नीरज डांगी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता स्वर्गीय दिनेश राय डांगी राजस्थान सरकार में मंत्री रहे और पाली जिले के देसुरी से विधायक रहते हुए विकास के लिए उनके योगदान को याद किया जाता है। पिता से प्रेरणा लेकर नीरज डांगी ने छात्र जीवन से ही सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। पढ़ाई में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी), कर्नाटक के सुरथकल परिसर से सिविल इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री विशिष्ट योग्यता के साथ हासिल की। उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद, उन्होंने निजी क्षेत्र की बजाय राजनीति को अपना करियर चुना। वर्ष 2004 से 2009 तक युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने का काम किया।
कैसा रहा नीरज डांगी का राजनीतिक सफर?*
नीरज डांगी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। कांग्रेस ने उन्हें 2003 में देसूरी विधानसभा सीट और 2008 तथा 2018 में रेवदर सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और बेहद कम अंतर से मिली हार के कारण वह विधानसभा चुनाव नहीं जीत सके। लगातार तीन चुनावी हार के बावजूद उन्होंने कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा, अशोक गहलोत के साथ रहे और पूरी निष्ठा से काम करते रहे। उनकी इसी वफादारी और लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए कांग्रेस ने वर्ष 2020 में पहली बार उन्हें राज्यसभा भेजा था। इसी साल जून में उनको कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार राज्यसभा में भेजा। राजस्थान में कांग्रेस से लगातार दूसरी बार राज्यसभा जाने वाले डांगी पहले युवा नेता हैं।