
हर साल 16 मई को देश में राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के साथ ही मानसून के आगमन से पहले बचाव के कदम उठाने की शुरुआत हो जाती है।[i]यह दिवस सही समय पर इस बात की याद दिलाता है कि डेंगू से बचाव के लिए लोगों, परिवारों और समाज के स्तर पर लगातार प्रयास की जरूरत है। बढ़ते तापमान और जलवायु के बदलते पैटर्न को देखते हुए इस साल पूरे भारत में डेंगू का खतरा बढ़ा है। इसलिए यह रिमाइंडर इस बार और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अनुमान जताया है कि 2026 में देश के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान रहेगा और हीटवेव वाले दिनों की संख्या भी ज्यादा होगी। इस हिसाब से यह अबतक के दर्ज रिकॉर्ड में सबसे गर्म साल हो सकता है।[ii]दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने भी चेताया है कि अल नीनो जैसे क्लाइमेट पैटर्न से एक्सट्रीम वेदर की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इससे बीमारियों के फैलने का खतरा ज्यादा रहेगा।[iii]इस तरह की परिस्थितियों से डेंगू का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि ज्यादा तापमान होने से वेक्टर-जनित (मच्छरों एवं मक्खियों द्वारा फैलने वाली) बीमारियों के फैलने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। इसी कारण से बहुत से भारतीय शहर डेंगू के प्रसार के मामले में हॉटस्पॉट बनकर सामने आ रहे हैं।[iv]
डेंगू अब सिर्फ मानसून में फैलने वाली बीमारी नहीं रह गई है। प्रसार के पारंपरिक सीजन से परे भी जिस तरह इसके मामले सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए यह सालभर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन गया है।[v]तेजी से होते शहरीकरण, बढ़ते तापमान[vi]और बदलते क्लाइमेट पैटर्न से डेंगू का प्रसार बढ़ रहा है।[vii]इसके अतिरिक्त, ज्यादा जनसंख्या घनत्व, अनियोजित निर्माण की गतिविधियां[viii]और पानी स्टोर करके रखने की आदत[ix]जैसे फैक्टर भी मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श स्थिति प्रदान कर रहे हैं।
दुनियाभर में डेंगू के एक तिहाई मामले भारत में सामने आते हैं।[x]पिछले दो दशक में इसका प्रसार 11 गुना बढ़ गया है।[xi]भारत के कई क्षेत्रों में डेंगू एक महामारी की तरह है और हर साल इसका प्रकोप देखने को मिलता है। करीब हर क्षेत्र से इसके मामले सामने आते हैं।[xii]दक्षिणी एवं पश्चिमी भारत में यह पूरे साल फैलने वाली बीमारी बन गई है।[xiii]
अब मानसून के पारंपरिक महीनों के अलावा भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। यहां तक कि पहले कम संवदेनशील माने जाने वाले क्षेत्रों, जैसे हिमाचल प्रदेश जैसे ऊंचे इलाकों और पूर्वोत्तर के क्षेत्रों में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं।[xiv]उदाहरण के लिए, राजस्थान में डेंगू का मौसम एक साल छोड़कर आता है, जिसमें अगस्त से अक्टूबर तक का समय इसका सबसे अधिक प्रभाव वाला मौसम होता है।खतरा लगातार बढ़ने का अनुमान है। अनुमान है कि 2050 तक 1.5 अरब भारतीय डेंगू रिस्क जोन में रह रहे होंगे।[xv]
डेंगू हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ आयु वर्ग के लोगों में स्थिति गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। 15 साल से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी इसमें सबसे ज्यादा होती है और इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण इनमें स्थिति गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है।[xvi]डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मोटापा या दिल की बीमारियों आदि से जूझ रह वयस्क लोगों में भी स्थिति गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है।[xvii][xviii]इसके अतिरिक्त, भारत में डेंगू के सभी चार सीरोटाइप का संक्रमण होता है।[xix]इसका मतलब है कि एक व्यक्ति कई बार डेंगू का शिकार हो सकता है।[xx]दोबारा होने वाला संक्रमण आमतौर पर स्थिति को ज्यादा गंभीर बना देता है और अस्पताल में भर्ती होने की आशंका ज्यादा रहती है।[xxi]
जयपुर के नियोक्लीनिक चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में नियोनेटोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. जय कृष्ण मित्तल ने कहा,“जब किसी बच्चे को डेंगू होता है, तो माता-पिता अक्सर बताते हैं कि उन्होंने अपने बच्चे को गंदी जगहों से दूर रखकर और घर के अंदर रखते हुए उसकी सुरक्षा के लिए क्या-क्या उपाय किए, क्योंकि उनका मानना होता है कि मच्छर केवल गंदे और प्रदूषित पानी में ही पनपते हैं।[xxii]स्वच्छता जरूरी तो है, लेकिन यह सोच भ्रमित भी कर सकती है। डेंगू फैलाने वाले मच्छर गंदे पानी पर निर्भर नहीं होते। ये मच्छर घरों के अंदर और आसपास साफ, स्थिर पानी में पनपते हैं, जैसे कूलर, गमले, बाल्टी, ओवरहेड टैंक और पानी के कंटेनरों में।[xxiii]इस बारे में गलतफहमी के कारण अक्सर इनके ऐसे स्रोतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो इनके पनपने के आम स्थान होते हैं।[xxiv]डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए, बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल सामान्य स्वच्छता बनाए रखना ही पर्याप्त नहीं है। रुके हुए पानी की नियमित रूप से जांच करना और उसे हटाना, बर्तनों को बार-बार साफ करना और पानी का उचित भंडारण सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”
डेंगू के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद शुरू होते हैं।[xxv]इन लक्षणों में तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और शरीर पर चकत्ते शामिल हैं।[xxvi]बहुत से मामलों में लक्षण हल्के रहते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बुखार कम होता है, कुछ चेतावनी भरे संकेत दिखाई देने लगते हैं। इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इन संकेतों में पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी होना, मसूड़ों या नाक से खून आना, बहुत ज्यादा थकान लगना, बेचैनी और उल्टी या मल में खून आना शामिल हैं।[xxvii]
अगर समय पर इलाज न मिले, तो गंभीर डेंगू 20 प्रतिशत तक मामलों में जानलेवा हो सकता है।[xxviii] गंभीर डेंगू की स्थिति में शरीर से फ्लूड लीकेज, डेंगू शॉक सिंड्रोम और कई अंगों के फेल होने जैसी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। इससे परिवारों और हेल्थकेयर सिस्टम पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।[xxix]
एडीस एजिप्टी मच्छरों से डेंगू फैलता है। ये मच्छर घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में खूब पनपते हैं। ये मच्छर घरों में साफ और रुके हुए पानी के छोटे-छोटे भराव में अंडे देते हैं, जैसे कि पानी की टंकियां, बाल्टियां, फूलों के गमले और फेंके हुए डिब्बे।[xxx] इसी वजह से, डेंगू अक्सर घरों और समाज में कई-कई लोगों में फैलता है। कुछ ही संक्रमित मच्छर इस वायरस को कई लोगों तक पहुंचा सकते हैं।[xxxi]संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए घरों, स्कूलों, मोहल्लों और दफ्तरों में नियमित निगरानी करना, रुके हुए पानी को हटाना, मच्छर भगाने वाले माध्यमों का इस्तेमाल करना, पूरी आस्तीन वाले कपड़े पहनना और कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।[xxxii] मौसम हमारे बस में नहीं है, लेकिन अपने घरों के अंदर और आस-पास पानी जमा होने से रोकना और अपने आसपास साफ-सफाई रखना जरूर हमारे बस में है। परिवारों, स्कूलों और समाज को बीमारी का संक्रमण फैलने से पहले ही कदम उठाने चाहिए। लोगों की कोशिशें, परिवार और समाज, दोनों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
सामुदायिक स्तर पररेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस, आस-पड़ोस के समूहों, स्कूलों एवं स्थानीय अधिकारियों को मिलकर काम करना चाहिए। इससे सार्वजनिक जगहों को साफ रखने, कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने और मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने में मदद मिलेगी।
मच्छरों को नियंत्रित करने के कदम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अपने आप में काफी नहीं हैं। डेंगू से बचाव के लिए डब्ल्यूएचओ ने इंटीग्रेटेड स्ट्रेटजी की सलाह दी है। इसमें मच्छरों पर नियंत्रण, व्यक्तिगत सुरक्षा, समाज की भागीदारी और डेंगू के ज्यादा प्रकोप वाले क्षेत्रों में टीकाकरण के कदम शामिल हैं।[xxxiii] डेंगू के लिए कोई विशेष एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है,[xxxiv]इसलिए इससे होने वाली गंभीरता और अस्पताल में भर्ती के मामलों को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका रोकथाम ही है। जब लोग लगातार व्यक्तिगत स्तर पर बचाव के उपाय करते हैं, तो इससे सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है। इससे संक्रमण की कड़ी (चेन ऑफ ट्रांसमिशन) को तोड़ने में मदद मिलती हैऔर छोटे-छोटे मामलों के बड़े प्रकोप में बदलने का खतरा कम हो जाता है।[xxxv][xxxvi]
[i] https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2032129®=3&lang=2
[ii] https://www.thestatesman.com/india/india-braces-for-hotter-summer-imd-forecasts-above-normal-temperatures-and-more-heatwaves-1503576332.html
[iii] https://indianexpress.com/article/explained/explained-climate/heatwave-in-india-imd-el-nino-impact-10660882/
[iv]https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC8389710/
[v]https://www.nature.com/articles/s41598-022-12164-x
[vi] https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S0048969720338584
[vii] https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC11040117/
[viii]https://www.researchgate.net/publication/400034623_Understanding_Dengue_Risk_in_Bangladesh_and_One_Health_Strategies_for_Sustainable_Public_Health_Control –
[ix]https://www.researchgate.net/publication/400034623_Understanding_Dengue_Risk_in_Bangladesh_and_One_Health_Strategies_for_Sustainable_Public_Health_Control
[ix]https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S0048969720338584
[x]Dengue dynamics, predictions, and future increase under changing monsoon climate in India | Scientific Reports
[xi](PDF) DENGUE IN INDIA: TEMPORAL AND SPATIAL EXPANSION IN LAST TWO DECADES
[xii]Dengue outbreak of 2023 in the state of Uttar Pradesh, North India: lesson learnt and way forwards | International Journal Of Community Medicine And Public Health
[xiii]https://ncvbdc.mohfw.gov.in/Doc/National%20Guideline%20for%20Dengue%20case%20management%20during%20COVID-19%20pandemic.pdf
[xiv]Dengue dynamics, predictions, and future increase under changing monsoon climate in India | Scientific Reports
[xv]https://agupubs.onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1029/2025EF006154?af=R
[xvi]Epidemiological and clinical trends in pediatric dengue: A six-year retrospective hospital-based study on pre-vs pandemic patterns in Puducherry, India – ScienceDirect
[xvii]Chronic and reactivated dengue infection in an immunocompromised host: insights from a case report – PMC
[xviii]Dengue among immunocompromised patients: a systematic review and meta-analysis | Journal of Travel Medicine | Oxford Academic
[xix]https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10101646/ –
[xx]Interactions between serotypes of dengue highlight epidemiological impact of cross-immunity | Journal of The Royal Society Interface | The Royal Society
[xxi]https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1684118224001166
[xxii]https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC11860606/
[xxiii]Is Dengue Vector Control Deficient in Effectiveness or Evidence?: Systematic Review and Meta-analysis – PMC
[xxiv]https://www.ijcmph.com/index.php/ijcmph/article/view/2252
[xxv] https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dengue-and-severe-dengue
[xxvi] https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dengue-and-severe-dengue
[xxvii] https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dengue-and-severe-dengue
[xxviii]https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1876034125003314
[xxix]https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S1876034125003314
[xxx]Is Dengue Vector Control Deficient in Effectiveness or Evidence?: Systematic Review and Meta-analysis – PMC
[xxxi]https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9198086/
[xxxii] https://www.unicef.org/bangladesh/en/stories/dengue-how-keep-children-safe
[xxxiii]Immunization, Vaccines and Biologicals
[xxxiv]Immunization, Vaccines and Biologicals



