जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ राजस्थान में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से नाबार्ड ने डिजिटल कृषि, सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण और कृषि विपणन को नई दिशा देने की योजना बनाई है। इस संबंध में नाबार्ड अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. और राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी।
बैठक में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, एग्रीस्टैक, डिजिटल फसल सर्वेक्षण तथा यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि इससे किसानों विशेषकर छोटे एवं सीमांत किसानों को त्वरित और पारदर्शी ऋण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
नाबार्ड ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) एवं अन्य सहकारी संस्थाओं को केवल ऋण प्रदान करने वाली इकाइयों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ग्रामीण उद्यमों के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई। ये संस्थाएं कृषि आदान आपूर्ति, भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण खुदरा कारोबार जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
बैठक में ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) की प्रगति की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बाजार एकीकरण, डिजिटल लेनदेन, पारदर्शी मूल्य खोज तथा किसानों, एफपीओ और खरीदारों के बीच बेहतर संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। नाबार्ड विपणन महासंघों को कृषि उपज के संग्रहण, मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार के लिए सहयोग प्रदान करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि विपणन और ऋण प्रणाली के डिजिटलीकरण से किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी।

