
(दिव्यराष्ट्र के लिए डॉ हिमांशु शेखर, ग्रुप चीफ स्ट्रैटेजी-क्लीनिकल ऑफिसर, एएसजी आई हॉस्पिटल)
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र/ मेनोपॉज़ वो छिपी समस्याएं जिन्हें महिलाएं अक्सर अनदेखा कर देती हैं मेनोपॉज़ आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, जिससे सूखापन, दृष्टि में बदलाव और आंखों की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। समस्या गंभीर होने से पहले, सक्रिय कदम उठाकर देखभाल और जागरूकता दृष्टि को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है आईये जानते है डॉ हिमांशु शेखर, ग्रुप चीफ स्ट्रैटेजी और क्लीनिकल ऑफिसर, एएसजी आई हॉस्पिटल से रूबरू हुई बातचीत से।
मेनोपॉज़ के दौरान हॉट फ्लैशेस, मूड स्विंग्स हो सकते हैं और नींद पर असर पड़ सकता है यह तो अब लगभग सभी को पता है। हालांकि, एक और गंभीर बदलाव ऐसा भी है जिसे अक्सर तब तक नज़रअंदाज़ किया जाता है जब तक कि बहुत देर न हो जाए। मेनोपॉज़ के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव आपकी आंखों को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। मेनोपॉज़ हर महिला के जीवन का एक अहम पड़ाव है। स्वास्थ्य के लिए किए जाने वाले प्रयासों और चर्चाओं में अपनी आंखों को भी उतनी ही अहमियत दें यही छोटी सी जागरूकता आने वाले वर्षों में आपकी नज़र और ज़िंदगी की चमक बरकरार रखेगी।
हार्मोन और आँखों का संबंध – हार्मोन, खासकर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन, हमारी आंखों की सेहत के लिए बहुत ज़रूरी हैं। ये आंखों में नमी बनाए रखते हैं, नसों में खून का बहाव बढ़ाते हैं और आंखों के नाजुक हिस्सों की रक्षा करते हैं। मेनोपॉज़ के दौरान इन हार्मोन्स में कमी आने लगती है, जिसकी वजह से आंखों से जुड़ी कई परेशानियां शुरू हो सकती हैं।
मेनोपॉज़ के दौरान आंखों में सूखापन: एक आम लेकिन गंभीर समस्या – एस्ट्रोजन लेवल कम होना आंखों के सूखेपन की सबसे बड़ी वजह है, क्योंकि यही हार्मोन आंखों में आंसू बनाए रखता है। इसकी कमी से आंखों में सूखापन, खुजली और थकान रहने लगती है। अक्सर महिलाएं इसे सिर्फ स्क्रीन की थकान या बढ़ती उम्र का असर मानकर नज़रअंदाज़ कर देती हैं। लेकिन यह लापरवाही आपकी नज़र को कमज़ोर कर सकती है और आपकी रोज़ाना ज़िंदगी को मुश्किल बना सकती है।
मेनोपॉज़ और नज़र में बदलाव: क्यों बदलने लगता है चश्मे का नंबर? – मेनोपॉज़ के दौरान और उसके बाद कई महिलाओं के चश्मे का नंबर बार-बार बदलने लगता है। हार्मोन में उतार-चढ़ाव की वजह से आंखों की पुतली (कॉर्निया) का आकार बदल सकता है, जिससे पुराने चश्मे या लेंस से धुंधलापन और असहजता महसूस होने लगती है। यही वजह है कि इस समय कॉन्टैक्ट लेंस पहनना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि आंखों के सूखेपन के कारण लेंस आंखों में चुभने लगते हैं।
मेनोपॉज़ में बढ़ सकता है आंखों की इन गंभीर समस्याओं का खतरा – हालांकि छोटी-मोटी परेशानियां ज्यादा गंभीर नहीं लगतीं, लेकिन मेनोपॉज़ और उसके बाद महिलाओं में आंखों की कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। शोध बताते हैं कि एस्ट्रोजन की कमी से ग्लूकोमा (काला मोतिया) का जोखिम बढ़ सकता है, जो आंखों की नसों को नुकसान पहुंचाता है और समय पर इलाज न होने पर अंधापन भी पैदा कर सकता है। इसके अलावा, मैकुलर डिजनरेशन (जो बीच की नज़र को कमज़ोर करता है) और मोतियाबिंद (आंखों के लेंस में धुंधलापन) होने की संभावना भी मेनोपॉज़ के बाद बढ़ जाती है।
लाइफस्टाइल की ये आदतें बढ़ा सकती हैं आंखों की मुश्किलें – भले ही मेनोपॉज़ ही आंखों की समस्याओं की इकलौती वजह न हो, लेकिन हमारी कुछ गलत आदतें इसे और भी बिगाड़ देती हैं। जैसे- घंटों कंप्यूटर या फोन का इस्तेमाल, सिगरेट पीना, नींद पूरी न होना और खराब खान-पान ये सब मिलकर आंखों के खतरे को दोगुना कर देते हैं। साथ ही, मेनोपॉज़ के दौरान होने वाला तनाव आंखों पर दबाव बढ़ाता है, जिससे सिरदर्द की समस्या भी होने लगती है।
स्वस्थ आंखों के लिए कुछ ज़रूरी कदम – इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, मेनोपॉज़ से गुज़र रही महिलाओं के लिए आंखों की सेहत पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है। भले ही नज़र में कोई बदलाव न दिखे, फिर भी आंखों की नियमित जांच को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाना चाहिए। भरपूर पानी पीना, लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल, धूप का चश्मा पहनना और ओमेगा-3, ल्यूटिन व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर डाइट लेना आपकी आंखों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। अगर नज़र में अचानक कोई बदलाव महसूस हो, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से संपर्क करें।




