
कोलकाता, दिव्यराष्ट्र:/ कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने एसएचई कांथा के साथ मिलकर बंगाल की कांथा कढ़ाई से जुड़ी करीब 100 महिला कारीगरों को मंच प्रदान किया। कोलकाता के इंडियन म्यूजियम में पहली बार आयोजित दुर्गा पूजा पंडाल के तहत हुई इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक हस्तकला को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ाना था।
कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने बंगाल की पारंपरिक कांथा कढ़ाई कला को बढ़ावा देने और महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से एसएचई कांथा के साथ साझेदारी की। इस सहयोग के तहत कोलकाता स्थित इंडियन म्यूजियम में ‘देवी दुर्गा : थ्रेड्स ऑफ डिविनिटी’ शीर्षक से दुर्गा पूजा आयोजन किया गया। इसमें बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तकला और महिलाओं की आजीविका के अवसरों को प्रमुखता दी गई।
इंडियन म्यूजियम ने संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से पहली बार अपने परिसर में दुर्गा पूजा पंडाल स्थापित किया। 11 अक्टूबर को श्रीमती अग्निमित्रा पॉल ने इसका उद्घाटन किया। आयोजन में दुर्गा पूजा, कांथा कढ़ाई और इंडियन म्यूजियम की विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। केकेआर की विशेष प्रदर्शनी में कांथा कारीगरों के काम को प्रदर्शित किया गया, जबकि एक विशेष गैलरी के माध्यम से एसएचई कांथा की चार दशक की यात्रा और इस पारंपरिक कला के संरक्षण एवं नए प्रयोगों को दर्शाया गया।
केकेआर के लिए यह पहल केवल बंगाल की सांस्कृतिक विरासत के उत्सव तक सीमित नहीं रही। इसका उद्देश्य खेल की लोकप्रियता के माध्यम से महिला कारीगरों के कौशल को पहचान दिलाना, उनके काम को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसरों को मजबूत करना भी था।
कोलकाता नाइट राइडर्स की मुख्य विपणन अधिकारी बिंदा डे ने कहा कि बंगाल से गहराई से जुड़ी संस्था होने के नाते केकेआर की जिम्मेदारी क्रिकेट के मैदान से आगे तक जाती है। उन्होंने कहा कि यह पहल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और महिलाओं के लिए अवसर तैयार करने के प्रयासों को जोड़ती है। कांथा कला को पीढ़ियों से सहेजने वाली महिला कारीगरों से लेकर अपने लिए नए अवसर तलाश रहीं शाहोशी रानियों तक, केकेआर ऐसी पहल को बढ़ावा देना चाहता है, जिनसे महिलाओं की प्रतिभा को पहचान मिले और उनके कौशल को आर्थिक स्वतंत्रता में बदलने के अवसर उपलब्ध हों।
इस पहल में केकेआर के ‘शाहोशी रानी’ कार्यक्रम को भी प्रमुखता दी गई। यह कार्यक्रम वंचित समुदायों की महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। उद्घाटन समारोह में केकेआर समर्थित कलकत्ता फाउंडेशन से जुड़ी शाहोशी रानियों ने धुनुची नृत्य की विशेष प्रस्तुति देकर मां दुर्गा का स्वागत किया।
17 अक्टूबर को सप्तमी के अवसर पर केकेआर के खिलाड़ी राहुल त्रिपाठी और सौरभ दुबे भी पूजा पंडाल पहुंचे। उन्होंने कांथा कारीगरों और शाहोशी रानियों से बातचीत की तथा उनकी कला, कौशल और योगदान को सराहा।
इसी दिन आयोजित ‘केकेआर मेला’ में करीब 100 कांथा कारीगरों, केकेआर के फैन क्लबों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने हिस्सा लिया। मेले में लाइव कढ़ाई प्रदर्शन, संवादात्मक कार्यशालाओं तथा उद्यमिता और कहानी-कथन से जुड़े सत्र आयोजित किए गए। इन गतिविधियों के जरिए कारीगरों को अपनी कला प्रदर्शित करने, नए लोगों से जुड़ने और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने के संभावित रास्ते तलाशने का अवसर मिला।
केकेआर और एसएचई कांथा की इस संयुक्त पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत, सामुदायिक भागीदारी और महिला सशक्तीकरण को एक मंच पर लाना था। केकेआर के अनुसार, खेल फ्रेंचाइजी की भूमिका केवल मैदान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे स्थानीय पहचान को बढ़ावा देने, समुदायों से जुड़ने और उनके विकास में योगदान देने की दिशा में भी काम करना चाहिए।



