
भारत के एल्कोबेव मार्केट के 6.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) की आर्थिक रिपोर्ट 2026 में अनुमान जताया गया है कि भारत का एल्कोहलिक बेवरेज उद्योग देश की आर्थिक गतिविधि, सार्वजनिक वित्त एवं रोजगार सृजन के मामले में प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2025 में इस बाजार का अनुमानित आकार 6.2 लाख करोड़ रुपये था, जो भारत की नॉमिनल जीडीपी के करीब 1.8 प्रतिशत के बराबर है।
इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) के सीईओ संजीत पाधी ने कहा, ‘भारत में एल्कोहलिक बेवरेज उद्योग का आकार बड़ा है और अब इसकी वैल्यू भी लगातार बढ़ रही है। आगे प्रीमियम सेगमेंट को बढ़ाने, वैल्यू को चेन को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय कंपनियों को तैयार करने की दिशा में व्यापक अवसर हैं।’
रिपोर्ट में बताया गया है कि 28 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों के अपने कर राजस्व में एल्कोहल से संबंधित राजस्व का करीब 19 प्रतिशत योगदान है। कई बड़े राज्य अपने कुल कर राजस्व के 20 प्रतिशत से अधिक का राजस्व इसी सेक्टर से संग्रहित करते हैं। इससे सरकारों की राजकोषीय स्थिति सुदृढ़ होती है और सरकार को इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामाजिक कल्याण समेत विभिन्न क्षेत्रों में खर्च करने में मदद मिलती है।
वित्त आयोग के पूर्व सचिव अरविंद मेहता ने कहा, ‘आंकड़ों से मजबूत तस्वीर सामने आती है। 6.2 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक मूल्य, 4 लाख करोड़ रुपये का टैक्स और लाखों लोगों की आजीविका में योगदान से इस सेक्टर की मजबूत तस्वीर दिखती है। भारत की आर्थिक कहानी में एल्कोहलिक बेवरेज उद्योग एक प्रमुख योगदानकर्ता है।’
किसी उपभोक्ता तक बोतल पहुंचने से बहुत पहले ही इस सेक्टर का आर्थिक प्रभाव पड़ने लगता है। एल्कोहलिक बेवरेज के उत्पादन से अनाज, गन्ना, शीरा, जौ और अंगूर जैसे बहुत से कृषि उत्पादों की लगातार मांग बनी रहती है। इससे किसानों के लिए अवसर बढ़ते हैं और एग्री-प्रोसेसिंग वैल्यू चेन मजबूत होती है।


