कारों के ऊंचे दाम और महंगी गाड़ियों की चाहत से बड़े हो रहे ऑटो लोन
मुंबई, दिव्यराष्ट्र:/ ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट ‘शिफ्टिंग गियर्स 2026: क्रेडिट ड्राइव्स टुडेज मोबिलिटी’ के मुताबिक भारत में निजी वाहनों की फाइनेंसिंग का बाजार अब बढ़त के एक नए दौर में है। इसके तीन बड़े कारण हैं: लोगों में अपना वाहन खरीदने की बढ़ती चाहत, वाहन के लिए लोन लेने का बढ़ता चलन और नए उपभोक्ता वर्गों तक कर्ज की आसान पहुंच। रिपोर्ट में 2019 की पहली छमाही से 2026 की पहली छमाही तक निजी वाहनों की फाइनेंसिंग का अध्ययन किया गया है।
पैसेंजर व्हीकल लोन में प्रीमियम गाड़ियों की ओर साफ झुकाव दिख रहा है। इसकी वजह महंगी कारों की पसंद और बढ़ती कीमतें हैं। वहीं टू-व्हीलर लोन को आम तौर पर किसी व्यक्ति का पहला कर्ज माना जाता था, लेकिन अब इसे हर तरह के कर्जदार लेने लगे हैं।
पहले कर्ज से आगे: टू-व्हीलर लोन की बदलती तस्वीर
टू-व्हीलर लोन को पारंपरिक तौर पर औपचारिक कर्ज की दुनिया में पहला कदम माना जाता था, लेकिन अब इनकी भूमिका इससे कहीं आगे बढ़ चुकी है। 2026 की पहली छमाही में दिए गए टू-व्हीलर लोन में पहली बार कर्ज लेने वालों की हिस्सेदारी 39% रही, जो 2019 के मुकाबले 19 प्रतिशत अंक कम है। महामारी से पहले के समय से ही इनकी हिस्सेदारी घट रही है। दूसरी ओर, लोन लेते समय दो साल से ज्यादा की क्रेडिट हिस्ट्री रखने वाले कर्जदारों की हिस्सेदारी 43% रही, जो 2019 से 16 प्रतिशत अंक ज्यादा है। यह बदलाव बताता है कि टू-व्हीलर लोन बाजार में कर्ज का अनुभव रखने वाले उपभोक्ताओं की भागीदारी बढ़ रही है।
कर्जदारों की प्रोफाइल में आए इस बदलाव के साथ टू-व्हीलर कर्ज का दायरा भी बढ़ा है। जून 2026 तक बकाया टू-व्हीलर कर्ज 1.76 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो जून 2019 के स्तर का 3.2 गुना है। सक्रिय कर्जदारों की संख्या भी जून 2019 के 1.7 करोड़ से बढ़कर 3.3 करोड़ हो गई। इस दौरान पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। कुल बकाया कर्ज में ऐसे कर्ज का हिस्सा घटकर 1.4% रह गया, जिसकी किस्त 90 दिन से ज्यादा समय से नहीं चुकाई गई है। यह जून 2019 के बाद का सबसे निचला स्तर है। जून 2019 में यह 2.7% था।
चार्ट 1: टू-व्हीलर के ज्यादातर नए कर्जदारों के पास अब पहले से कर्ज का अनुभव*
टू-व्हीलर कर्ज की धुरी बने हुए हैं युवा और छोटे शहरों-गांवों के कर्जदार
टू-व्हीलर फाइनेंस भारत के एक बड़े वर्ग की आवाजाही को सहारा दे रहा है। 2026 की पहली छमाही में 64% कर्जदार अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों से थे, और 43% की उम्र 30 साल या उससे कम थी। इनके कर्ज का दायरा भी बढ़ रहा है। टू-व्हीलर लोन लेने वाले 32% उपभोक्ताओं के पास पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे खर्च से जुड़े कर्ज भी हैं। 2019 की पहली छमाही में यह आंकड़ा 22% था, यानी इसमें 10 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।
वाहन खरीदने के बाद भी कर्ज का सिलसिला अक्सर जारी रहता है। 2022 की दूसरी छमाही में टू-व्हीलर लोन लेने वाले उपभोक्ताओं में से 68% ने अगले तीन साल के भीतर कोई और कर्ज भी लिया। पहली बार टू-व्हीलर लोन लेने वाले जिन लोगों के पास पहले से कम से कम दो साल की क्रेडिट हिस्ट्री थी, उनमें यह आंकड़ा 84% तक पहुंच गया। ऐसे कर्जदार 12 से 18 महीनों के भीतर पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड से लेकर ऑटो और होम लोन तक कई तरह के कर्ज ले सकते हैं।
चार्ट 2: टू-व्हीलर लोन ग्राहकों के साथ रिश्ता गहरा करने का मौका
ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने कहा, “टू-व्हीलर का युवा भारत के पढ़ने, काम करने और कमाने के तरीके से गहरा नाता है। कॉलेज जाने वाले छात्र, दफ्तर आने-जाने वाले युवा प्रोफेशनल, गिग इकोनॉमी से कमाई करने वाले या अपना कारोबार शुरू करने वाले लोगों के लिए अपना वाहन संभावनाओं के कई नए दरवाजे खोल सकता है। टू-व्हीलर लोन लेने वाले कर्जदार की तस्वीर भी बदल रही है। अब ज्यादा लोगों के पास लोन लेते समय पहले से क्रेडिट हिस्ट्री होती है, और वाहन खरीदने के बाद भी बहुत से लोग दूसरे कर्ज लेते रहते हैं। टू-व्हीलर लोन अब अक्सर ग्राहक और कर्जदाता के लंबे रिश्ते की शुरुआत बन रहा है, और यह रिश्ता वाहन खरीदने के बाद भी आगे बढ़ता है।”
प्रीमियम गाड़ियों का बढ़ता चलन बदल रहा है कार लोन का बाजार
कार लोन के आंकड़ों में महंगी गाड़ियों की ओर बढ़ता झुकाव साफ नजर आता है। एसयूवी और ज्यादा फीचर्स वाली गाड़ियां लोगों की पसंद बन रही हैं। इससे गाड़ियों की कीमतें ऊपर गई हैं, प्रीमियम सेगमेंट मजबूत हुआ है और कार खरीदने में लोन की भूमिका पहले से ज्यादा अहम हो गई है। 2026 की पहली छमाही में पैसेंजर व्हीकल लोन की औसत रकम 8.2 लाख रुपये पर पहुंच गई, जो 2019 की पहली छमाही से 49% ज्यादा है। कर्ज चुकाने की औसत अवधि भी पांच महीने बढ़कर 62 महीने हो गई।
चार्ट 3: प्रीमियम गाड़ियों की वजह से लोन की रकम भी बढ़ी और अवधि भी*
पैसेंजर व्हीकल लोन में 37% हिस्सेदारी के साथ नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (एनबीएफसी) सबसे आगे बनी हुई हैं। इसके बाद 26% हिस्सेदारी के साथ प्राइवेट बैंक हैं, और 2019 से 2026 के बीच हिस्सेदारी में 4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। जून 2026 तक पैसेंजर व्हीकल लोन के सक्रिय कर्जदारों की संख्या 2.5 करोड़ पर पहुंच गई, जो जून 2019 के स्तर का 1.7 गुना है। इसी अवधि में पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। 90 दिन से ज्यादा समय से न चुकाई गई किस्तों वाले कर्ज का हिस्सा 95 बेसिस पॉइंट घटकर 0.5% रह गया।
कार खरीदने के अलग-अलग रास्ते
उपभोक्ता अलग-अलग रास्तों से कार खरीद रहे हैं। पहली बार कार खरीदने वालों और टू-व्हीलर से कार की ओर बढ़ने वालों में जेन जी और कम उम्र के मिलेनियल्स ज्यादा नजर आ रहे हैं। वहीं दोबारा कार खरीदने वालों और महंगी गाड़ियों के लिए फाइनेंस लेने वालों में बीच की उम्र के और बड़ी उम्र के मिलेनियल्स की हिस्सेदारी बढ़ रही है।
यह बदलाव अब छोटे शहरों और गांवों तक भी पहुंच रहा है। टू-व्हीलर से कार की ओर बढ़ने वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं के नए लोन 2019 से हर साल औसतन 15% (सीएजीआर) की दर से बढ़े हैं, जबकि कुल ऑटो लोन में यह दर 8% रही। यानी ग्रामीण इलाकों में यह रफ्तार लगभग दोगुनी है। प्रीमियम गाड़ियों का चलन भी अब महानगरों से आगे पहुंच रहा है। 2026 की पहली छमाही में एक और महंगी कार (हाई-वैल्यू कार) के लिए लोन लेने वाले 51% कर्जदार अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों से थे, और 2019 से यह हिस्सेदारी छह प्रतिशत अंक बढ़ी है।
चार्ट 4: कार खरीदने के रास्ते*
भावेश जैन ने आगे कहा, “कार खरीदने के फैसले अब चाहत और खर्च उठाने की क्षमता, दोनों से तय हो रहे हैं। उपभोक्ता महंगी और ज्यादा फीचर्स वाली गाड़ियां चुन रहे हैं, और बड़ी रकम वाले लंबी अवधि के लोन से यह खरीद जेब पर भारी नहीं पड़ती। प्रीमियम गाड़ियों की चाहत अब बड़े शहरों से आगे भी पहुंच रही है। इससे पता चलता है कि देश भर में गाड़ी को लेकर लोगों की ख्वाहिशें बदल रही हैं। पहली बार कार खरीदने वाले, टू-व्हीलर से कार पर आने वाले, दोबारा कार खरीदने वाले और महंगी गाड़ी पर अपग्रेड करने वाले, इन सभी ग्राहकों की क्रेडिट हिस्ट्री और वित्तीय स्थिति एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हो सकती है। क्रेडिट जानकारी की मदद से इन ग्राहकों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है, और कर्ज देने के फैसले ज्यादा सोच-समझकर और जिम्मेदारी से लिए जा सकते हैं।”
भारत में वाहनों के लिए कर्ज का बाजार परिपक्व हो रहा है। टू-व्हीलर लोन लेने वाले कर्ज के दूसरे प्रोडक्ट्स भी अपना रहे हैं, और पैसेंजर व्हीकल खरीदार महंगी गाड़ियों की ओर बढ़ रहे हैं। युवा कर्जदारों की बढ़ती संख्या, छोटे शहरों और गांवों तक बढ़ती पहुंच और वाहन खरीदने के अलग-अलग रास्ते इस बाजार का दायरा बढ़ा रहे हैं। इससे देश भर में लोगों के लिए अपना वाहन खरीदना आसान बनाने में औपचारिक कर्ज की भूमिका भी मजबूत हो रही है।




