
दोहरी उपलब्धि से बढ़ाया देश का मान
चंडीगड, दिव्यराष्ट्र:/ ग्लैमर, आत्मविश्वास और सामाजिक सरोकारों के संगम पर चंडीगढ़ की गीतांजलि अरोड़ा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी खास पहचान बनाई है। मिसेज इंटरनेशनल ग्लोबल 2026 में फर्स्ट रनर-अप का खिताब हासिल करने के साथ उन्हें ‘क्वीन ऑफ फिलैंथ्रॉपी 2026’ के सम्मान से भी नवाजा गया। उनकी इस दोहरी उपलब्धि ने न केवल चंडीगढ़, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
गीतांजलि की सफलता इस बात का उदाहरण है कि अगर हौसले बुलंद हों और अपने सपनों को साकार करने का जुनून हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। उनकी उपलब्धि उन महिलाओं के लिए खास मायने रखती है, जो परिवार और करियर की जिम्मेदारियों के बीच अपनी व्यक्तिगत पहचान बनाने का सपना देखती हैं।
इस सफलता के पीछे महिलाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे सही मंच तक पहुंचाने की सोच भी अहम है। डायडेम मिसेज इंडिया लिगेसी जैसे मंच महिलाओं को आत्मविश्वास बढ़ाने, अपनी क्षमताओं को निखारने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे मंच महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनकी छिपी प्रतिभा को सामने लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गीतांजलि को मिला ‘क्वीन ऑफ फिलैंथ्रॉपी 2026’ का सम्मान उनकी उपलब्धियों में एक अलग आयाम जोड़ता है। यह सम्मान सामाजिक सरोकारों और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता के महत्व को भी रेखांकित करता है।
गीतांजलि अरोड़ा की यह कामयाबी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहती हैं, लेकिन जिम्मेदारियों के चलते अक्सर अपने अरमान पीछे छोड़ देती हैं। उनकी उपलब्धि का संदेश साफ है—सफलता के लिए उम्र या पेशा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, निरंतर मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति मायने रखती है।




