
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ शिक्षा, ज्ञान प्रबंधन, अकादमिक संचार एवं संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. लता सुरेश को प्रतिष्ठित “आईपी टू आईपीओ अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान “आईपी टू आईपीओ – बुक लॉन्च, पैनल डिस्कशन एंड अवॉर्ड रिकॉग्निशन कॉन्क्लेव 2026” के दौरान 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में प्रदान किया गया।
इस प्रतिष्ठित समारोह में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तित्वों, नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों, शिक्षाविदों तथा बौद्धिक संपदा (आईपी) विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत में नवाचार, बौद्धिक संपदा और उद्यमिता के सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ आईपी से आईपीओ तक की यात्रा को गति प्रदान करना था।
इस अवसर पर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी , इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशी तथा आईपी से आईपीओ की यात्रा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, विकसित भारत 2047 के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के संदर्भ में ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
डॉ. लता सुरेश ने सम्मान प्राप्त करने पर आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार का सम्मान उनके लिए गौरव के साथ-साथ भविष्य में और अधिक सार्थक कार्य करने की प्रेरणा भी है। उन्होंने कहा कि ज्ञान, नवाचार और बौद्धिक संपदा को समाज एवं राष्ट्र की प्रगति से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
डॉ. सुरेश ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे मंच विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं को एक साथ लाकर विचारों के आदान-प्रदान और सहयोग के नए अवसर प्रदान करते हैं।
आईपी टू आई पीओ अवार्ड 2026 डॉ. लता सुरेश की व्यावसायिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह शिक्षा, ज्ञान, नवाचार एवं संस्थागत विकास के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान की सराहना को दर्शाता है।
डॉ. लता सुरेश के बारे में
डॉ. लता सुरेश शिक्षा एवं ज्ञान प्रबंधन के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाली शिक्षाविद एवं ज्ञान-संसाधन विशेषज्ञ हैं। वे शैक्षणिक संचार, ज्ञान प्रबंधन, संस्थागत विकास, अनुसंधान एवं नवाचार से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं। उनके प्रयासों का प्रमुख उद्देश्य ज्ञान के प्रभावी प्रसार, शिक्षार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए बेहतर ज्ञान-संसाधन उपलब्ध कराने तथा अकादमिक एवं संस्थागत सहयोग को मजबूत करना रहा है।



