
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र:/ लंबे समय तक काम करना, नींद पूरी न होना, लगातार स्क्रीन देखना और रोजमर्रा का तनाव सिर्फ थकान नहीं बढ़ाता, बल्कि इसका असर त्वचा पर भी दिखाई दे सकता है। हालांकि, त्वचा पर दिखने वाले बदलावों को केवल तनाव या बर्नआउट का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।
निम्स मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के डर्मेटोलॉजी डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मेहक गुप्ता के अनुसार, तनाव, नींद और रोजमर्रा की आदतों में बदलाव का असर त्वचा पर दिखाई दे सकता है। इनमें त्वचा का बेजान या रूखा दिखना, आंखों के नीचे काले घेरे, थकान, मुंहासे और त्वचा में ज्यादा संवेदनशीलता शामिल हो सकती है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि लंबे समय तक तनाव शरीर में हार्मोन, नींद और सूजन से जुड़े बदलावों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, पर्याप्त नींद न मिलने से त्वचा की प्राकृतिक रिकवरी प्रभावित हो सकती है और त्वचा रूखी या थकी हुई नजर आ सकती है। लगातार तनाव पहले से मौजूद मुंहासे या एक्जिमा जैसी त्वचा की समस्याओं को भी बढ़ा सकता है।
आंखों के आसपास की त्वचा काफी पतली होती है। नींद की कमी और पानी रुकने के कारण यहां सूजन या पफीनेस दिखाई दे सकती है। तनाव के दौरान चेहरे के बार-बार बदलते भाव भी समय के साथ एक्सप्रेशन लाइन्स को ज्यादा स्पष्ट कर सकते हैं।
कब सावधान होने की जरूरत?*
अगर कुछ दिनों की खराब नींद के बाद त्वचा में बदलाव आराम और बेहतर दिनचर्या से ठीक हो जाएं, तो आमतौर पर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर कई हफ्तों तक मुंहासे, रूखापन, काले घेरे या त्वचा में अन्य बदलाव बने रहें, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, केवल स्किनकेयर या कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। पूरी नींद, संतुलित खान-पान, पर्याप्त पानी, धूप से बचाव, शारीरिक गतिविधि और सही स्किनकेयर त्वचा को स्वस्थ रखने की बुनियाद हैं। जरूरत पड़ने पर इसके बाद डर्मेटोलॉजिकल ट्रीटमेंट लिया जा सकता है।




