(दिव्यराष्ट्र के लिए प्रदीप एस मेहता द्वारा प्रस्तुत)
राजस्थान के 2025-26 के बजट में रोजगार सृजन प्रमुख प्राथमिकता है। अगले एक वर्ष में 1.25 लाख सरकारी और 1.5 लाख निजी नौकरियां देने के लिए राजस्थान रोजगार नीति 2025 और 500 करोड़ के विवेकानंद रोजगार सहायता कोष की घोषणा हुई है। पहली बार उद्यमी बनने वालों को सहयोग देने और 1,500 नए स्टार्टअप स्थापित करने के लिए योजना बनाई गई है। जुलाई 2023 से जून 2024 के लिए पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, राजस्थान की श्रम भागीदारी दर 64.8 प्रतिशत से 67.6 प्रतिशत हुई है। राज्य में सर्वाधिक रोजगार देने वाले क्षेत्र कृषि, वानिकी और मत्स्य, निर्माण और विनिर्माण हैं। हालांकि, नवीकरणीय ऊर्जा में 228 लाख करोड़ का निवेश हुआ है फिर भी रोजगार की संभावनाएं कम हैं। पर्यटन, एसएमई विनिर्माण, कृषि प्रसंस्करण, वस्त्र, रत्न आभूषण और खनन क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इसलिए बजट में पर्यटन अवसंरचना के विस्तार के लिए 2975 करोड़ दिए गए हैं, जिसमें 10 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों का विकास, शेखावटी हवेलियों का संरक्षण, 100 करोड़ का आदिवासी पर्यटन सर्किट और 220 करोड़ ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित किए गए हैं।
राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट से अपेक्षाएं बढ़ी हैं, लेकिन समझौतों के क्रियान्वयन का प्रतिशत बहुत कम है। रिसर्जेंट राजस्थान पार्टनरशिप समिट 2015 में 23.37 लाख करोड़ के एमओयू हुए थे, लेकिन केवल 10% ही क्रियान्वित हुए। इसी तरह, इन्वेस्ट राजस्थान समिट 2022 में 12.53 लाख करोड़ के समझौते हुए, लेकिन मात्र 2% ही अमल में आए। नीमराना के जापानी औद्योगिक क्षेत्र में कट्स द्वारा किए गए सर्वे में जल संकट, अनियमित विद्युत आपूर्ति और खराब अवसंरचना प्रबंधन जैसी समस्याएं निवेश में रुकावट पाई गईं।
प्रदेश में निवेश को कई कारक प्रभावित कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर भारत में निजी क्षेत्र का निवेश घट रहा है, कुछ कंपनियां विदेशों में स्थानांतरित हो रही हैं। बेहतर कारोबारी माहौल के कारण निवेशक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों को चुनते हैं। भारत में एफडीआई प्रवाह का स्तर भी गिर रहा है। सरकार निवेश व रोजगार को बढ़ाने के लिए 18 नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित कर रही है। व्यापारिक सुगमता के तहत सिंगल विंडो सिस्टम में ऑनलाइन प्रदर्शन डैशबोर्ड और वन स्टॉप शॉप की स्थापना से निवेशकों की रुझान लाने के लिए प्रशासनिक व विधिक प्रक्रिया में कमी आवश्यक है। निवेशकों के क्रियान्वयन में सुधार लाने के लिए भूमि अधिग्रहण में देरी, मंजूरी की सुस्त प्रक्रिया, अवसंरचना की खामियों का समाधान करना होगा। समझौतों को तेजी से ट्रैक करने (टी. टी. टी. मोड) में केंद्रित दृष्टिकोण और 1,000 करोड़ से अधिक के पूंजीगत निवेश के बड़े निवेश प्रस्तावों की निगरानी सुनिश्चित करने से निवेश प्रक्रिया पारदर्शी होगी।
नई ग्लोबल कनेक्टिविटी सेंटर नीति, सेवा क्षेत्र में रोजगार सृजन बढ़ाएगी, जबकि राजस्थान व्यापार संवर्धन नीति, एक व्यापक बाजार बुद्धिमत्ता तंत्र को मजबूत करेगी। क्षेत्रीय स्तर पर लाने के लिए व्यापार संगठन को चालान-1 रणनीति का लाभ उठाना चाहिए। भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट विदेशी निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं। राजस्थान-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी से इको-टूरिज्म और विरासत संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में अवसर खुल सकते हैं, जबकि यूएई के 52 बिलियन फूड कॉरिडोर से कृषि प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स में नए निवेश आ सकते हैं। आने वाले निवेशों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने 8 नए आईटीआई खोलने, 36 मौजूदा आईटीआई का आधुनिकीकरण करने और कोटा में विश्वकर्मा स्किल इंस्टीट्यूट की स्थापना की घोषणा की है।
औद्योगिक क्षेत्रों के पास किफायती आवास भी श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं। राजस्थान के ये लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं। लेकिन इनकी सफलता केवल कार्यान्वयन पर निर्भर है। उचित नीति समर्थन, बुनियादी ढांचे का विकास और नौकरशाही में सुधार सुधार करके राज्य वास्तव में निवेश को आर्थिक प्रगति में बदल सकता है।