
स्ट्रेचर पर आई थीं, चलकर घर लौटीं
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ नारायणा हॉस्पिटल में 90 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला की जटिल दूरबीन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। महिला लंबे समय से पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं। उम्र और संकोच के कारण उन्होंने लंबे समय तक इलाज नहीं करवाया, जिससे उनकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि बच्चेदानी के साथ ब्लैडर और अन्य पेल्विक अंग भी अपनी सामान्य स्थिति से बाहर आ गए। इसका उनकी किडनी पर गंभीर असर पड़ा।
मरीज का सीरम क्रिएटिनिन 4.5 एमजी/डीएल तक पहुंच गया था और उन्हें एक्यूट – ऑन- क्रोनिक किडनी डिजीज के साथ यूरोसेप्सिस हो गया था। उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें डायलिसिस करना पड़ा और एक अन्य अस्पताल में डबल जे स्टेंट भी डाला गया, लेकिन इससे उनकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। संक्रमण लगातार बढ़ता गया और अंततः उन्हें आईसीयू से स्ट्रेचर पर नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर लाया गया।
जांच के दौरान डॉ. इंदिरा सरीन ने बीमारी की मूल वजह का पता लगाया। जांच में सामने आया कि गंभीर प्रोलैप्स के कारण यूरेटर पर दबाव पड़ रहा था, जिससे ऑब्स्ट्रक्टिव यूरोपैथी हो गई थी। मरीज की उम्र, खराब किडनी फंक्शन, गंभीर संक्रमण और थायरॉयड की समस्या के कारण सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। इसके बावजूद, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर की कंसल्टेंट यूरोगायनोकोलॉजिस्ट डॉ. इंदिरा सरीन और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक जटिल दूरबीन सर्जरी की। इस सर्जरी में जाली लगाकर निकले हुए अंगों को ऊपर टांका गया।
सर्जरी के बाद मरीज की किडनी की कार्यक्षमता में तेजी से सुधार हुआ। क्रिएटिनिन अगले ही दिन 2 एमजी/डीएल पर आ गया। डीजे स्टेंट भी निकाल दिया गया और यूरोसेप्सिस की स्थिति नियंत्रित होने लगी। मरीज स्वस्थ होकर अपने घर गईं और आज सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।
डॉ. इंदिरा सरीन, कंसल्टेंट यूरोगायनोकोलॉजिस्ट, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर ने कहा, “कई महिलाएं बच्चेदानी के खिसकने की समस्या को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह किडनी और शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। सही समय पर जांच और उपचार से ऐसी गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है। यह हर उस महिला के लिए एक संदेश है जो पेल्विक फ्लोर संबंधी समस्याओं को इग्नोर कर देती है, जबकि इन्हें पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।”
उन्होंने बताया कि पेल्विक फ्लोर की समस्याओं, बार-बार पेशाब आने, पेशाब रुकने, पेशाब पर नियंत्रण न रहने या गर्भाशय के बाहर आने (प्रोलैप्स) जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर यूरोगायनोकोलॉजिस्ट से परामर्श लेने से इन समस्याओं का प्रभावी उपचार संभव है। कई मामलों में देर होने पर मूत्र मार्ग में रुकावट के कारण किडनी पर भी असर पड़ सकता है और स्थिति गंभीर होने पर डायलिसिस की आवश्यकता तक पड़ सकती है।
बलविंदर सिंह वालिया, डायरेक्टर, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर ने कहा, “जटिल मामलों में सही समय पर बीमारी की पहचान और विभिन्न विशेषज्ञों के समन्वित उपचार से बेहतर परिणाम संभव होते हैं। नारायणा हॉस्पिटल जयपुर में आधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों की टीम ऐसे चुनौतीपूर्ण मामलों का सफल इलाज कर रही है।”
डॉ. प्रदीप कुमार गोयल, क्लिनिकल डायरेक्टर, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर ने कहा, “हर किडनी की समस्या की वजह केवल किडनी की बीमारी नहीं होती। कई बार इसके पीछे कोई दूसरी गंभीर समस्या होती है। इसलिए सही समय पर विशेषज्ञ से जांच और इलाज बेहद जरूरी है।”






