
नई दिल्ली, दिव्यराष्ट्र*/ भारत के सबसे बड़े पूरी तरह डिजिटल-असिस्टेड वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म्स में से एक, एसेटप्लस को नेक्सस वेंचर पार्टनर्स के नेतृत्व में 175 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली है। यह फंडिंग भारत में मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले, डिस्ट्रीब्यूटर-आधारित वेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम को बनाने के कंपनी के लक्ष्य की दिशा में एक अहम् कदम है। एसेटप्लस को एट रोड्स वेंचर्स, नितिन कामथ के रेनमैटर फंड और भूपिंदर सिंह का भी समर्थन हासिल है।
एसेटप्लस की स्थापना इस विचार के साथ की गई थी कि धन सृजन सिर्फ लेन-देन या टूल्स तक सीमित नहीं हो सकता, ऐसे में कंपनी एक ऐसा संपूर्ण और सहयोगी वेल्थ मैनेजमेंट इकोसिस्टम तैयार कर रही है, जहाँ टेक्नोलॉजी इंसानी सलाह को और मजबूत बनाती है, बजाए उसकी जगह लेने के। कंपनी का फोकस भरोसेमंद और प्रमाणित डिस्ट्रीब्यूटर्स को सक्षम बनाना है, ताकि वे भारतीय परिवारों को बेहतर, लगातार और व्यापक स्तर पर सेवा दे सकें।
एसेटप्लस के को-फाउंडर और सीईओ विश्रांत सुरेश ने कहा, “हमारा उद्देश्य कभी-भी सिर्फ एक और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म बनाना नहीं रहा। हम ऐसा वेल्थ मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं, जहाँ इंसानी सलाह और टेक्नोलॉजी की ताकत साथ मिलकर काम करे। यह निवेश हमें उन निवेशकों के साथ इस विचार को और तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा, जो भारत के वेल्थ इकोसिस्टम को लंबे समय के लिए मजबूत करना चाहते हैं।”
नया निवेश एसेटप्लस की तकनीक को और मजबूत बनाने, नए प्रोडक्ट जोड़ने और समग्र वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़ी पहलों को सशक्त करने में उपयोग किया जाएगा। हालाँकि म्यूचुअल फंड इस प्लेटफॉर्म का मुख्य आधार बने रहेंगे, लेकिन एसेटप्लस पर अब हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर एक ही प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों को संपूर्ण वित्तीय समाधान दे सकें।
भारत में निवेश का माहौल तेजी से बदल रहा है। निवेश करने वालों की संख्या बढ़ी है, लोगों में जागरूकता आई है और लाखों नए निवेशक पहली बार बाजार से जुड़ रहे हैं। लेकिन, साथ ही यह भी स्पष्ट हो रहा है कि सिर्फ ‘खुद निवेश करने’ वाली एप्रोच ही हर किसी के लिए काफी नहीं है। बाजार की उठापटक, भावनाओं में लिए गए फैसले, बिखरे हुए वित्तीय विकल्प और लंबी अवधि की योजना की कमी यह बताती है कि सिर्फ पहुँच होना ही काफी नहीं है। आज निवेशकों को सही मार्गदर्शन, सही संदर्भ और लगातार साथ निभाने वाली सलाह की जरूरत ज्यादा है।
एसेटप्लस का मानना है कि भारत में वेल्थ क्रिएशन का अगला दौर ऐसे असिस्टेड मॉडल्स से आगे बढ़ेगा, जहाँ टेक्नोलॉजी डिस्ट्रीब्यूटर्स को मजबूत बनाकर जोखिम के हिसाब से और लक्ष्य आधारित निवेश सलाह देने में मदद करेगी। यहाँ सिर्फ प्रोडक्ट्स बेचने पर जोर देने के बजाए, जीवन के अलग-अलग चरणों के हिसाब से वित्त संबंधी सही फैसले लेने में साथ दिया जाता है। ऐसे में, सलाह, कंप्लायंस, ऑपरेशंस और अलग-अलग वित्तीय विकल्पों को एक ही प्लेटफॉर्म पर सरल और सहज अनुभव के साथ जोड़ा गया है।
एसेटप्लस के को-फाउंडर और सीटीओ अवनीश राज ने कहा, “फंड का बड़े स्तर पर प्रबंधन भरोसे और स्थिरता पर टिका होता है। हम ऐसे सिस्टम बना रहे हैं, जो डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए काम को आसान करें, ताकि वे अपना ज्यादा समय ग्राहकों के साथ बिता सकें। यह फंडिंग हमें मजबूत और भविष्य के लिए तैयार टेक्नोलॉजी में निवेश करने का मौका देगी, साथ ही तेजी और अनुशासन दोनों बनाए रखने में मदद करेगी।”
म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स इस पूरे मॉडल के केंद्र में हैं। एसेटप्लस उन्हें सिर्फ बिचौलिया नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों के लंबे समय के वेल्थ पार्टनर के रूप में देखता है। प्लेटफॉर्म डिस्ट्रीब्यूटर्स को ग्राहकों का पूरा काम एक ही जगह संभालने में सक्षम बनाता है और बैकएंड में ऑपरेशनल व कंप्लायंस की जटिलताओं को खुद संभाल लेता है। इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स भरोसा बनाने, ग्राहकों की जरूरत समझने और समय के साथ बेहतर वित्तीय फैसलों की दिशा दिखाने पर फोकस कर पाते हैं।
नेक्सस वेंचर पार्टनर्स के पार्टनर आनंद दत्ता ने कहा,”हमें एसेटप्लस का स्पष्ट विचार और उसे जमीनी स्तर पर सार्थक बनाने की क्षमता सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। कंपनी असिस्टेड वेल्थ मैनेजमेंट के लिए लंबे समय का इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही है, जो भारत के वित्तीय भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट्स और क्षमताओं को एक साथ जोड़ने का इनका तरीका लंबे समय तक प्रभावकारी साबित होगा।”
वर्ष 2016 में शुरुआत के बाद से ही, एसेटप्लस का फोकस ऐसी डिजिटल व्यवस्था बनाने पर रहा है, जिससे असिस्टेड वेल्थ मैनेजमेंट को बड़े स्तर पर नियमों के अनुरूप और लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके। आज यह प्लेटफॉर्म देशभर में 18,000 से ज्यादा म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स (एमएफडी) के साथ काम करता है। ये सभी मिलकर 7,000 करोड़ रुपए से अधिक की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) संभाल रहे हैं, 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की मासिक एसआईपी बुक चला रहे हैं और 1.5 लाख से अधिक निवेशकों को सेवाएँ दे रहे हैं। ये आँकड़ें यह स्पष्ट करते हैं कि भारत में निवेश का रुझान अब बिखरे और लेन-देन आधारित मॉडल से हटकर, मजबूत सिस्टम के साथ सलाह आधारित निवेश की ओर बढ़ रहा है।
लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप पर टिप्पणी करते हुए एट रोड्स वेंचर्स की सीनियर पार्टनर श्वेता भाटिया ने कहा, “भारत में बचत को निवेश में बदलने की प्रक्रिया एक अहम मोड़ पर है और अब यह अपने अगले चरण में प्रवेश कर रही है। इस बदलाव को आगे बढ़ाने में म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। एसेटप्लस ने एक मजबूत और एकीकृत प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिस पर म्यूच्यूअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स का गहरा भरोसा बना है। इससे वे ग्राहकों को तेजी से जोड़ पाते हैं और निवेशकों को लक्ष्य आधारित, दीर्घकालिक निवेश में बड़े स्तर पर सहयोग कर सकते हैं। दोबारा निवेश करने का हमारा फैसला असिस्टेड वेल्थ मैनेजमेंट मॉडल पर हमारे विश्वास और भारत के वेल्थ इकोसिस्टम के लिए एसेटप्लस के एक अहम आधार बनने की क्षमता को दर्शाता है।”
टेक्नोलॉजी एसेटप्लस की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। कंपनी ऐसे सिस्टम तैयार कर रही है, जो डिस्ट्रीब्यूटर्स के काम को आसान बनाएँ, रेगुलेटरी कंप्लायंस को मजबूत करें और सलाह की गुणवत्ता बेहतर करें, वह भी बिना किसी अतिरिक्त झंझट के। इसके साथ ही, वर्कफ्लो, जोखिम आकलन और ग्राहक जुड़ाव को बेहतर बनाने के लिए एआई आधारित फीचर्स पर भी काम किया जा रहा है।
फंडरेज़िंग पर बोलते हुए रेनमैटर बाय जिरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ ने कहा, “जैसे-जैसे भारत में नए निवेशकों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह भी ज़रूरी है कि उन्हें निवेश से जुड़े सही फैसले लेने में मदद मिले। यह जागरूकता, शिक्षा और सही मार्गदर्शन से ही संभव है। एसेटप्लस की टीम ने हमेशा म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स को सही तरीके से सशक्त बनाने पर ध्यान दिया है। वे लंबे समय की सोच रखते हैं, और हमारे इकोसिस्टम को भी इसी सोच की ज़रूरत है। यह भी साफ है कि वे निवेशकों के हित में और बेहतर तरीके खोज रहे हैं। इसी वजह से हम एसेटप्लस के शुरुआती निवेशकों में से एक रहे हैं और रेनमैटर के ज़रिए पिछले कुछ वर्षों से उनका समर्थन करते आए हैं। अब एक बार फिर उन्हें सपोर्ट करने को लेकर हम उत्साहित हैं।”
क्षमता निर्माण एसेटप्लस की लंबी रणनीति का एक अहम् हिस्सा है। एसेटप्लस एकेडमी के जरिए कंपनी डिस्ट्रीब्यूटर्स की प्रोफेशनल ट्रेनिंग पर काम कर रही है, जिसमें सर्टिफिकेशन सपोर्ट, नियमों की समझ और वास्तविक सलाह देने की स्किल्स को जोड़ा गया है। इसी दिशा में, सुंदरम म्यूचुअल फंड्स के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील सुब्रमण्यम को स्ट्रैटेजिक एडवाइज़र के तौर पर जोड़ा गया है, ताकि भविष्य के ज्यादा जटिल और रेगुलेटेड माहौल के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।
भविष्य में, एसेटप्लस 10 करोड़ भारतीय परिवारों तक पहुँचने के अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। टेक्नोलॉजी, प्रशिक्षण और एक सच्चे समग्र वेल्थ मैनेजमेंट इकोसिस्टम के जरिए नई पीढ़ी के डिस्ट्रीब्यूटर्स को सशक्त बनाकर, कंपनी का उद्देश्य भारत में वित्तीय समावेशन और घरेलू संपत्ति निर्माण के अगले चरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है।





