
मुंबई दिव्यराष्ट्र:/ राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर दिवस उन लोगों के साहस, संघर्ष और जिजीविषा को सम्मान देने का अवसर है जिन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का डटकर सामना किया है। डॉ. प्रीति मेहता, वरिष्ठ सलाहकार पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी, हीमेटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट, नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, मुंबई ने 17 वर्षीय हादी अंसारी की प्रेरक कहानी साझा की। 14 वर्ष की आयु में हादी को बार-बार नाक से खून आने और खून की उल्टियों की शिकायत हुई। जांच में उसे एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया नामक रक्त कैंसर का पता चला। कीमोथेरेपी के बाद जब परिवार को राहत की उम्मीद थी, तब तीन महीने बाद कैंसर दोबारा लौट आया। इसके बाद हादी को पुनः उपचार और बोन मैरो ट्रांसप्लांट से गुजरना पड़ा। कठिन चुनौतियों के बावजूद उसने हार नहीं मानी। आज हादी स्वस्थ जीवन जी रहा है और हाल ही में 10वीं की परीक्षा 62 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण कर चुका है। डॉ. मेहता के अनुसार, उसकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि समय पर निदान, सही उपचार, परिवार का सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ कैंसर को हराया जा सकता है। उन्होंने मरीजों और परिवारों से उम्मीद बनाए रखने तथा उपचार पर भरोसा रखने का संदेश दिया।





