9 स्वर्ण पदक, 16748 छात्र एवं 8510 छात्राओं सहित कुल 25258 विद्यार्थियों को हुआ डिग्रियों का वितरण-राज्यपाल ने डिग्रीयों को डिजीलॉकर पर अपलोड कर किया शुभारम्भ
विधि शिक्षा न्याय और मानवता की सेवा का सशक्त माध्यम हरिभाऊ बागडे,
जयपुर, दिव्यराष्ट्र:/ राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे की अध्यक्षता में डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर का तृतीय दीक्षांत समारोह राजस्थान इन्टरनेशनल सेंटर जयपुर में सम्पन्न हुआ। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में अर्जुन राम मेघवाल, केन्द्रीय राज्य मंत्री विधि एवं न्याय (स्वतंत्र प्रभार) एवं विशिष्ठ अतिथि के रूप में डॉ. प्रेम चंद बैरवा माननीय उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री राजस्थान सरकार उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के स्नातक, स्नातकोत्तर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उनकी शैक्षिक उपलब्धियों के लिए माननीय राज्यपाल द्वारा उपाधियों, वरीयता प्रमाण पत्रों एवं स्वर्ण पदको का वितरण किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. निष्ठा जसवाल भी उपस्थित थी जिन्होंने स्वागत उद्बोधन दिया एवं कुलसचिव वीरेन्द्र वर्मा (आरएएस) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
दीक्षांत समारोह के दौरान 9 स्वर्ण पदक, 16748 छात्र एवं 8510 छात्राओं सहित कुल 25258 विद्यार्थियों को डिग्रियों का वितरण किया गया। इसी दिन माननीय राज्यपाल हरिभाऊ बागडे द्वारा द्वारा दीक्षांत समारोह के दौरान ही डिजीलॉकर पर सभी 25258 डिग्रियां भी अपलोड की गई। वर्षों की मेहनत और समर्पण का प्रतिफल डिग्री के रूप में हाथों में आते ही विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। दीक्षांत समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं विधि विषयों की डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपना दीक्षांत उद्बोधन प्रदान करते हुए सभी विद्यार्थियों के शुभकामनाएं प्रदान की, उन्होंने कहा कि विधि व्यवसाय केवल तर्क का नहीं, बल्कि संवेदना का भी क्षेत्र है। एक अच्छे अधिवक्ता या न्यायविद के भीतर मानवता, धैर्य और नैतिकता का होना आवश्यक है।आप जहाँ भी जाएँ न्याय को अपना धर्म सत्य को अपना मार्ग और संविधान को अपनी प्रेरणा बनाइए। संविधान की पालना के लिए सभी को जागरूक करते हुए, देश में कानून एवं न्याय व्यवस्था के प्रति आस्थावान बनाए रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी विद्यार्थियों की है। विद्यार्थी संविधान और उसके आदर्शों के साथ सभी स्तरों पर कानून एवं न्याय प्रणाली के उच्च आदर्शों हेतु संविधान की गरिमा बनाए रखने के लिए कार्य करें।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने डॉ भीमराव अम्बेडकर एक कुशल रणनीतिकार एवं योजनाकार होने के साथ प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय से अपील की की डॉ भीमराव अंबेडकर के विभिन्न पहलुओं के साथ निरंतर विभिन्न विषयों पर व्याख्यानमाला का आयोजन करें। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा केवल पेशेवर सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना का सशक्त आधार है। विशिष्ठ अतिथि उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि आज डॉ. भीमराव आम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय का यह तृतीय दीक्षांत समारोह भारत के न्याय पथ पर नए प्रहरियों को उतारने का एक महापर्व है। आपकी असली परीक्षा समाज के सबसे पीड़ित, वंचित और शोषित व्यक्ति को न्याय दिलाने की आपकी क्षमता पर होगी। डॉ. भीमराव अम्बेडकर एक ऐसा नाम जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के संविधान का शिल्पकार है। बाबासाहेब मानते थे कि कानून सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा औजार है।
कुलगुरु प्रो. (डॉ.) निष्ठा जसवाल ने स्वागत उद्बोधन और विश्वविद्यालय प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय ने विगत वर्षों में विधि शिक्षा, संवैधानिक चेतना तथा समकालीन विधिक विमर्श के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। यह सभी उपलब्धियाँ इस तथ्य की साक्षी हैं कि हमारा विश्वविद्यालय केवल विधि की शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं मानवीय न्याय की भावना को भी निरंतर सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दीक्षार्थियों से कहा कि वह केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि आने वाले समय में समाज के जिम्मेदार नागरिक और न्याय के प्रहरी के रूप में अपनी पहचान बनाएंगे।




