
उदयपुर, दिव्यराष्ट्र/ राजस्थान में बाल अधिकारों की सुरक्षा व बाल विवाहों की रोकथाम के लिए कार्यरत नागरिक समाज संगठन गायत्री सेवा संस्थान ने प्रशासन के सहयोग से अक्षय तृतीया के मौके पर होने जा रहे 13 बाल विवाह रुकवाए। इनमें से उदयपुर जिले में नौ, प्रतापगढ़ जिले में दो और सीकर जिले में दो बाल विवाह रोके गए।
बाल कल्याण समिति, उदयपुर की कार्यकारी अध्यक्ष यशोदा पणिया ने बताया कि संस्थान की सूचना के बाद प्रशासन एवं उदयपुर की डबोक थाना पुलिस ने एक गांव में छह बाल विवाह रुकवाए। साथ ही पटवारी, ग्राम सचिव व सरपंच को थाने में बुलाकर उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के बारे में जानकारी दी गई। हाई कोर्ट ने बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए काम कर रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसले में किसी भी गांव में बाल विवाह को रोकथाम में विफलता के लिए ग्राम पंचायतों की जवाबदेही तय करते हुए कहा था कि इसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा। संगठन ने सुरक्षा के दृष्टिगत एक बालक व बालिका को आश्रय गृह भी भेजा।
इस मौके पर बाल कल्याण समिति के साथ उदयपुर में गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक नितिन पालीवाल,काउंसलर पायल कनेरिया, चाइल्ड हेल्प लाइन से शंकर भोई, डबोक पुलिस थाने से बाल कल्याण अधिकारी मुकेश खटीक, प्रतापगढ़ में संस्थान के रामचंद्र मेघवाल व सीकर जिले में नरेश सैनी पूरी टीम के साथ मौजूद थे।
गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने बताया कि संस्थान ने प्रदेश के पांच जिलों में अक्षय तृतीया पर बाल विवाहों के बारे में सूचना देने वाले को 1100 रुपए का पुरस्कार देने का एलान किया था। साथ ही कहा था कि सूचना देने वाले की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा। संस्थान ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्प लाइन के साथ मिलकर पूरे एक महीने तक यह अभियान चलायाl संस्थान ने बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सूचना देने वालों के लिए एक नंबर भी जारी किया था।
उन्होंने बताया कि गायत्री सेवा संस्थान बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील अक्षय तृतीया जैसे विशेष रूप से संवेदनशील मौकों पर प्रशासन व सरकार के सहयोग से इसकी रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाता रहा है। साथ ही, संगठन ने भारत सरकार के “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान में सहयोग देने के लिए “बाल विवाह मुक्ति रथ” भी निकाला था। इस रथ ने पांच जिलों में हजारों किलोमीटर की यात्रा की और आम जन तक बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इन अभियानों से जागरूकता बढ़ी है और हालात बदले हैं। अब लोग बाल विवाहों की सूचना दे रहे हैं और प्रशासन तुरंत इसकी रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रहा है।
गायत्री सेवा संस्थान, उदयपुर देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। इसने हाल ही में अदालती लड़ाई के बाद दो बाल विवाह खारिज करवाए हैंl डॉ. पंड्या ने बताया कि उनके प्रयासों से जनजातीय अंचल में बाल विवाह की रोकथाम के लिए राज्य में पहली बार अदालत से निषेधाज्ञा भी जारी करवाई गई। साथ ही संस्थान जिला प्रशासन, पंचायतों, स्कूलों और धर्मगुरुओं के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है और जिले में हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है।





