
(दिव्यराष्ट्र के लिए डॉ.वैभव माथुर कंसल्टेंट – न्यूरोलॉजी मूवमेंट डिसऑर्डर एंड डीबीएस स्पेशलिस्ट)
जयपुर, दिव्यराष्ट्र/ पार्किंसन रोग को एक जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारी के रूप में समझा जाता है, जिसमें समय के साथ लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं। इसमें हाथों का कांपना, मांसपेशियों में जकड़न, चलने में कठिनाई और संतुलन की समस्या शामिल होती है। शुरुआत में दवाओं के जरिए लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है, लेकिन लंबे समय के बाद दवाओं का असर सीमित होने लगता है।
ऐसे में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन यानी डीबीएस सर्जरी को एक उन्नत उपचार विकल्प के रूप में अपनाया जाता है। अब इस सर्जरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का उपयोग तेजी से बढ़ता देखा जाता है, जिससे इलाज और अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जाता है।
*क्या है डीबीएस और कैसे मदद करती है एआई*
डीबीएस सर्जरी में मस्तिष्क के उन हिस्सों को टारगेट किया जाता है, जो मूवमेंट को नियंत्रित करते हैं। इसमें इलेक्ट्रोड्स लगाए जाते हैं, जो असामान्य ब्रेन सिग्नल्स को संतुलित करने का काम करते हैं।
एआई तकनीक इस पूरी प्रक्रिया को और बेहतर बनाने में मदद करती है। एआई आधारित सॉफ्टवेयर मस्तिष्क की इमेजिंग को गहराई से विश्लेषण करता है और सर्जरी के लिए सबसे सटीक जगह की पहचान करता है। इससे सर्जरी की सटीकता बढ़ाई जाती है और जोखिम को कम किया जाता है।
*सर्जरी प्लानिंग में एआई की अहम भूमिका*
डीबीएस सर्जरी से पहले मस्तिष्क की विस्तृत स्कैनिंग की जाती है। इस दौरान एआई एल्गोरिदम इन स्कैन को तेजी और सटीकता से पढ़ता है। यह तकनीक डॉक्टरों को यह समझने में मदद करती है कि इलेक्ट्रोड्स को कहां और किस गहराई तक लगाया जाए।
इससे हर मरीज के लिए एक पर्सनलाइज्ड सर्जिकल प्लान तैयार किया जाता है। एआई की मदद से छोटी-छोटी गलतियों को भी कम किया जाता है, जिससे सर्जरी का परिणाम बेहतर होता है।
*स्मार्ट प्रोग्रामिंग और बेहतर रिजल्ट्स*
डीबीएस सर्जरी के बाद डिवाइस की प्रोग्रामिंग एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। पहले यह प्रक्रिया समय लेने वाली होती है, जिसमें कई बार सेटिंग्स बदलनी पड़ती हैं।
एआई इस प्रक्रिया को आसान बनाता है। यह मरीज के लक्षणों और रिस्पॉन्स को समझकर डिवाइस की सेटिंग्स को अपने आप एडजस्ट करने में मदद करता है। इससे मरीज को जल्दी राहत मिलती है और बार-बार अस्पताल जाने की जरूरत कम होती है।
*रियल टाइम मॉनिटरिंग से मिलती है बेहतर देखभाल*
एआई आधारित सिस्टम मरीज की गतिविधियों और लक्षणों पर लगातार नजर रखता है। यह डेटा डॉक्टरों तक पहुंचाया जाता है, जिससे इलाज में समय-समय पर बदलाव किया जाता है।
इससे मरीज की स्थिति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जाता है और अचानक होने वाले बदलावों को समय रहते संभाला जाता है। इस तरह इलाज अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जाता है।
*चुनौतियां और भविष्य की दिशा*
हालांकि एआई के उपयोग से डीबीएस सर्जरी में काफी सुधार देखा जाता है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आती हैं। हर अस्पताल में यह तकनीक उपलब्ध नहीं होती और इसकी लागत भी अधिक होती है। इसके अलावा, तकनीक को सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए विशेषज्ञों की ट्रेनिंग जरूरी होती है।
फिर भी, भविष्य में एआई को पार्किंसन के इलाज का एक अहम हिस्सा बनते हुए देखा जाता है। जैसे-जैसे तकनीक और बेहतर होती है, वैसे-वैसे सर्जरी के परिणाम और भी सटीक और सुरक्षित बनाए जाते हैं।
*समय के साथ स्मार्ट इलाज की ओर बढ़ता कदम*
पार्किंसन के इलाज में डीबीएस सर्जरी पहले से ही एक प्रभावी विकल्प मानी जाती है। अब एआई के जुड़ने से इसे और अधिक उन्नत और मरीज के अनुसार अनुकूल बनाया जाता है।
इस बदलाव के साथ इलाज की दिशा स्मार्ट और सटीक होती दिखाई देती है, जहां हर मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार बेहतर परिणाम दिया जाता है।





