
दिव्यराष्ट्र, जयपुर: राजस्थान में ऊर्जा परिवर्तन की तेज़ रफ्तार के बीच राजधानी जयपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में एक अलग ही तस्वीर उभर रही है। हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे खेती न केवल जारी है, बल्कि कई जगहों पर किसानों का भरोसा भी बढ़ा है। जो ढांचा कभी आशंका का कारण था, वही आज स्वच्छ ऊर्जा और कृषि के सहअस्तित्व का उदाहरण बनता दिख रहा है।
राज्य के पश्चिमी और उत्तरी जिलों में स्थापित सौर और पवन परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा जयपुर की ओर आने वाले ट्रांसमिशन कॉरिडोर से होकर गुजरता है। ये लाइनें शहरों और उद्योगों तक बिजली पहुंचाने के लिए जरूरी हैं और स्वाभाविक रूप से कृषि भूमि से होकर निकलती हैं। शुरुआती दौर में इससे खेतों की उत्पादकता को लेकर किसानों में चिंता थी।लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। ट्रांसमिशन परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण नहीं होता। बल्कि टावरों के बीच की पूरी जमीन खेती योग्य रहती है।जयपुर जिले के कई गांवों में किसान 400 केवी और 765 केवी लाइनों के नीचे बाजरा, सरसों, दलहन और चारा उगा रहे हैं।
ट्रांसमिशन से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि अब टावर डिजाइन और ऊंचाई स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार तय की जा रही है। ऊंचे कंडक्टर और लंबे स्पैन से खेतों में टावरों की संख्या कम होती है, जिससे बड़ी जमीन बिना रुकावट खेती के लिए बची रहती है। निर्माण के दौरान भी फसलों को नुकसान कम करने और ऊपर की उपजाऊ मिट्टी को सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसान उसी सीजन में दोबारा बुआई कर सकें।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ सद्दाफ आलम का कहना है कि ट्रांसमिशन लाइनें सड़क या औद्योगिक परियोजनाओं की तरह जमीन नहीं लेतीं। आधुनिक तकनीक के साथ 95 प्रतिशत से ज्यादा जमीन खेती योग्य रहती है। जब मुआवजा उचित हो और स्थानीय बिजली आपूर्ति बेहतर हो, तो किसानों के लिए यह फायदे का सौदा बनता है।उन्होंने बताया कि जयपुर के आसपास ट्रांसमिशन कॉरिडोर अब सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं हैं। चारा उत्पादन और पशु चराई पहले की तरह जारी है। कुछ किसानों ने ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे पौधशालाएं भी शुरू की हैं, जहां से बागवानी और वृक्षारोपण के लिए पौधे तैयार किए जा रहे हैं।
कृषि अर्थशास्त्री रमेश चंद कहते हैं कि आधुनिक खेती के लिए बिजली जरूरी है। सिंचाई से लेकर भंडारण तक बिजली अहम इनपुट है। यदि ट्रांसमिशन लाइनों की योजना जिम्मेदारी से बने, तो किसान बिना जमीन खोए बेहतर बिजली सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। जैसे-जैसे राजस्थान स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, जयपुर के आसपास का अनुभव यह दिखाता है कि सही योजना और संवाद के साथ बिजली का ढांचा और खेती साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।




