
शुरुआत में सामान्य लगने वाला कोई संक्रमण कुछ ही घंटों में जानलेवा आपात स्थिति का रूप ले सकता है। विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि मरीज की स्थिति में अचानक होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें। सेप्सिस संक्रमण के प्रति शरीर की अत्यधिक और अनियंत्रित प्रतिक्रिया है, और यह भारत में सबसे अधिक नजरअंदाज की जाने वाली गंभीर चिकित्सीय आपात स्थितियों में से एक है।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के *सीनियर कंसल्टेंट – क्रिटिकल केयर मेडिसिन, डॉ. वैभव भार्गव* ने कहा, “सेप्सिस तेजी से बढ़ सकता है और इसके शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य संक्रमण जैसे दिखाई दे सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है मरीज की स्थिति में अचानक गिरावट को पहचानना। तेज सांस चलना, अचानक भ्रम की स्थिति, रक्तचाप का गिरना, पेशाब की मात्रा कम होना या अत्यधिक कमजोरी ऐसे गंभीर चेतावनी संकेत हैं, जिनमें तत्काल चिकित्सकीय उपचार आवश्यक है। समय पर निदान और उपचार मरीज के स्वस्थ होने तथा जानलेवा अंग विफलता के बीच महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर सकता है।”
खामोशी से तेजी से बढ़ता खतरा
सेप्सिस तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली किसी संक्रमण के प्रति अत्यधिक प्रतिक्रिया करने लगती है। यह संक्रमण बैक्टीरियल, वायरल या फंगल हो सकता है। संक्रमण से लड़ने के बजाय शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अपने ही स्वस्थ ऊतकों और महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है। यदि समय पर उपचार न मिले, तो सेप्सिस तेजी से सेप्टिक शॉक और कई अंगों के फेल होने की स्थिति में बदल सकता है, जिसके लिए अत्याधुनिक इंटेंसिव केयर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ सकती है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर की सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में संक्रामक रोगों की रोकथाम, निगरानी और प्रभावी प्रतिक्रिया पर लगातार जोर दिया जा रहा है। भारत में संक्रमण के प्रकोप से निपटने की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ-साथ एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि जीवन रक्षक एंटीबायोटिक्स प्रभावी बने रहें। राजस्थान में भी राज्य स्तर पर AMR की निगरानी से संबंधित विशेष पहल सक्रिय रूप से संचालित की जा रही हैं।
महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत
डॉक्टरों के अनुसार, किसी बीमारी या संक्रमण के दौरान मरीज और देखभाल करने वालों को निम्नलिखित अचानक दिखाई देने वाले लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
तेजी से, उथली या कठिनाई से सांस लेना।
सामान्य से बहुत तेज हृदय गति।
भ्रम, अत्यधिक नींद आना, दिशाभ्रम या बोलने में अस्पष्टता।
बहुत तेज बुखार, तेज कंपकंपी या शरीर का असामान्य रूप से कम तापमान (हाइपोथर्मिया)।
पेशाब की मात्रा में अचानक और काफी कमी, अत्यधिक सुस्ती या रक्तचाप में अचानक गिरावट।
बचाव के उपाय एवं जन-जागरूकता संदेश
डॉक्टरों ने संक्रमण से जुड़े जोखिम को कम करने और गंभीर जटिलताओं से बचने के लिए रोजमर्रा की सावधानियों पर जोर दिया है:
ऐसे घाव, यूरिनरी इंफेक्शन या सांस संबंधी संक्रमण को कभी नजरअंदाज न करें, जिनकी स्थिति अचानक बिगड़ रही हो।
बची हुई या बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स का सेवन न करें। एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक या अत्यधिक उपयोग दवा-प्रतिरोधी “सुपरबग्स” को बढ़ावा देता है।
पंजीकृत चिकित्सक द्वारा निर्धारित एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स अवश्य पूरा करें।
कट या घाव को साफ रखें, नियमित रूप से हाथ धोएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक टीकाकरण समय पर करवाएं।



