
जयपुर क्रिटिकॉन 2026 में सेप्सिस की समय पर पहचान और उपचार पर विशेषज्ञों ने दिया जोर
300 से अधिक प्रतिभागी और 40 से अधिक फैकल्टी शामिल, क्रिटिकल केयर के 10 प्रमुख राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
दिव्य राष्ट्र, जयपुर, 31 अक्टूबर 2026। जयपुर क्रिटिकॉन 2026 का शुभारंभ आज राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी), जयपुर में हुआ। सुबह 8:30 बजे से शुरू हुए वैज्ञानिक सत्रों में देश-विदेश से आए ख्यातिप्राप्त क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए, सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन 11 बजे आयोजित किया गया। ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. मोहित के. रॉय, ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. निखिल अजमेरा एवं कोषाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश से 300 से अधिक प्रतिभागी और 40 से अधिक फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। इनमें क्रिटिकल केयर चिकित्सा के 10 प्रमुख राष्ट्रीय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। “सेप्सिस स्टूअर्डशिप” थीम पर आयोजित सम्मेलन में सेप्सिस की शीघ्र पहचान, प्रभावी उपचार तथा गंभीर मरीजों की बेहतर देखभाल पर विशेष चर्चा की गई।
विशेषज्ञों जैसे कोलकाता से डॉ. सुभाष के. टोडी; नई दिल्ली से डॉ. राजेश पांडे, डॉ. अनिर्बान होम चौधरी और डॉ. कपिल देव सोनी; तथा गुरुग्राम से डॉ. नेहा गुप्ता ने समझाया कि सामान्य संक्रमण होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली उससे लड़कर उसे नियंत्रित करने का प्रयास करती है। लेकिन सेप्सिस में संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया अनियंत्रित हो जाती है और अपने ही ऊतकों तथा अंगों को नुकसान पहुँचाने लगती है। इससे किडनी, फेफड़े, लिवर, हृदय और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए सेप्सिस एक जानलेवा चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जिसमें तुरंत उपचार आवश्यक है। फेफड़ों का संक्रमण, विशेषकर न्यूमोनिया, मूत्र मार्ग, पेट, त्वचा एवं घाव तथा रक्तप्रवाह के संक्रमण सेप्सिस का कारण बन सकते हैं। टीबी सहित अन्य गंभीर संक्रमणों में भी सेप्सिस विकसित हो सकता है। हालांकि हर संक्रमण सेप्सिस में नहीं बदलता, लेकिन संक्रमण के साथ मरीज की हालत बिगड़ने को गंभीरता से लेना चाहिए।
सेप्सिस किसी को भी हो सकता है, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, कैंसर का उपचार करा रहे मरीजों तथा किसी भी कारण से कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इसका खतरा अधिक होता है। पहले से गंभीर या पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों में भी विशेष सतर्कता आवश्यक है। आम जनता को संदेश दिया गया कि संक्रमण के साथ तेज या कठिन साँस, भ्रम या असामान्य सुस्ती, पेशाब कम होना, तेज धड़कन तथा बुखार या शरीर का तापमान असामान्य रूप से कम होना जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल पहुँचें। बच्चों में दूध या भोजन न लेना, अत्यधिक सुस्ती और जगाने में कठिनाई भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं।
आयोजकों ने आम जनता से अपील की कि परिवार में बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों के संक्रमण तथा बिगड़ते लक्षणों पर विशेष ध्यान दें और डॉक्टर से परामर्श लेने में देरी न करें। संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत एवं आसपास की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। खाना बनाने और खाने से पहले, खाने के बाद तथा शौच से पहले और बाद में साबुन एवं पानी से हाथ अच्छी तरह धोएँ। स्वच्छ भोजन और सुरक्षित पेयजल का उपयोग करें। समय पर पहचान, उचित उपचार और स्वच्छता के प्रति जागरूकता से सेप्सिस के गंभीर परिणामों का जोखिम कम किया जा सकता है।




