
डॉ. मोहन’स डायबिटीज स्पेशियलिटीज सेंटर, MDRF और हिंदुजा फाउंडेशन की संयुक्त पहल
मुंबई,दिव्यराष्ट्र: विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर उन लोगों को सम्मानित किया गया, जो पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से टाइप 2 मधुमेह के साथ जीवन जी रहे हैं और नियमित उपचार एवं बेहतर जीवनशैली के माध्यम से अपने रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रित रखते हुए स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसके साथ ही, टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित होने के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।चेन्नई के गोपालपुरम स्थित डॉ. मोहन’स डायबिटीज स्पेशियलिटीज सेंटर, मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन और हिंदुजा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 5 नवंबर को पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 50 वर्षों से अधिक समय से टाइप 2 मधुमेह के साथ जीवन व्यतीत कर रहे और नियमित चिकित्सा देखभाल के माध्यम से इसे सफलतापूर्वक नियंत्रित रखने वाले व्यक्तियों को ‘डॉ. वी. मोहन डायबिटीज गोल्डन जुबली अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। वहीं, टाइप 1 मधुमेह के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए शिक्षा में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को ‘हिंदुजा फाउंडेशन टाइप 1 डायबिटीज एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। पुरस्कार डॉ. मोहन’स डायबिटीज स्पेशियलिटीज सेंटर एवं मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. वी. मोहन, हिंदुजा फाउंडेशन के कार्यक्रम निदेशक डॉ. आशीष मेंथी, डॉ. मोहन’स डायबिटीज स्पेशियलिटीज सेंटर की प्रबंध निदेशक एवं मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. आर. एम. अंजना तथा सेंटर के उपाध्यक्ष डॉ. रंजीत उन्नीकृष्णन ने प्रदान किए। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. आशीष मेंथी ने भी संबोधित किया।इस अवसर पर डॉ. वी. मोहन ने कहा, 50 वर्षों से अधिक समय तक टाइप 2 मधुमेह के साथ जीवन जीना और इसे लगातार नियंत्रण में रखना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है। यह इन लोगों के अनुशासन, दृढ़ संकल्प और अपने स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उचित उपचार, नियमित स्वास्थ्य जांच और निरंतर चिकित्सकीय देखभाल के साथ मधुमेह होने के बावजूद लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीना संभव है। इन लोगों की जीवन यात्रा दूसरों के लिए प्रेरणा है। इनके सम्मान के माध्यम से हम मधुमेह से पीड़ित अन्य लोगों में भी आशा और आत्मविश्वास जगाना चाहते हैं। डॉ. आशीष मेंथी ने कहा, टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों और युवाओं को शिक्षा एवं जीवन के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने और अपने सपनों को साकार करने के समान अवसर मिलने चाहिए। मधुमेह को नियंत्रित रखते हुए शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करना न केवल उनका उत्साह बढ़ाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सही चिकित्सा देखभाल, परिवार के सहयोग और सामाजिक समर्थन से वे अपनी पूरी क्षमता हासिल कर सकते हैं। इस पुरस्कार समारोह का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से मधुमेह के साथ जीवन जी रहे लोगों के आत्मविश्वास, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति को पहचान देना तथा टाइप 1 मधुमेह से जूझते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना है मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, शीघ्र पहचान एवं बेहतर प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करने के लिए हर वर्ष 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है। इसी अवसर के उपलक्ष्य में इस विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।





